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छात्रों के को-लिविंग आवास के लिए दिल्ली-एनसीआर सबसे बड़ा बाजार, 4.75 लाख बेड की जरूरत

Wed, 22 Jan 2020 08:12 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 22 Jan 2020 08:12 PM IST
सार

  • उच्च शिक्षण संस्थानों में तेजी से बढ़ रही बाहरी छात्रों की संख्या
  • 2.5 लाख अतिरिक्त बेड चाहिए दिल्ली-एनसीआर में छात्रों के लिए 
  • रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास में होगी छात्रा आवास की मुख्य भूमिका

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delhi ncr becomes largest market for co-living students, needs 4.75 lakh beds
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

छात्र आवास के लिहाज से दिल्ली-एनसीआर, बंगलूरू और पुणे देश के तीन सबसे बड़े बाजार हैं। इन शहरों में वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए संगठित को-लिविंग ऑपरेटरों को अतिरिक्त 4.75 लाख बेड की जरूरत है।
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कुशमैन एंड वेकफील्ड ने स्टूडेंट अकमोडेशन प्रोवाइडर्स फोरम ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि 2018-19 में भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की कुल संख्या 3.7 करोड़ रही। इनमें से 24 फीसदी यानी 90.8 लाख छात्र बाहरी थे। वहीं, दिल्ली-एनसीआर के उच्च शिक्षण संस्थानों में 7.45 लाख छात्र हैं, जिनमें 50 फीसदी बाहरी हैं। इन छात्रों के लिए आवास की मांग पूरी करने के लिए 2.5 लाख अतिरिक्त बेड की जरूरत है।
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इसके अलावा, बंगलूरू में ऐसे छात्रों की संख्या 5.38 लाख है, जिनमें से 60 फीसदी बाहरी हैं। इन छात्रों के लिए अतिरिक्त 92,000 बेड चाहिए। पुणे के उच्च शिक्षण संस्थानों में चार लाख छात्र हैं। इनमें 60 फीसदी बाहरी हैं, जिनके लिए अतिरिक्त 1.33 बेड की जरूरत है। 
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छात्र आवास क्षेत्र में भारी एफडीआई की उम्मीद 

कुशमैन एंड वेकफील्ड के कंट्री हेड एवं एमडी (इंडिया) अंशुल जैन ने कहा कि भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों में बाहरी छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि भारत में छात्र आवास क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में है।

नीतिगत समर्थन और निजी निवेश के बल पर यह आने वाले समय में रियल एस्टेट क्षेत्र के विकास का मुख्य कारक होगा। वहीं, स्टूडेंट अकमोडेशन प्रोवाइडर्स फोरम ऑफ इंडिया के संयोजक कौशल माहन ने कहा कि इस क्षेत्र में भारी मात्रा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आने की उम्मीद है। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास होगा। इस क्षेत्र के विकास के लिए सरकार को प्रोत्साहन नीतियां बनानी चाहिए। 

अक्तूबर-दिसंबर में नोएडा-गुरुग्राम में बढ़ी मकान बिक्री

हाउसिंग ब्रोकरेज कंपनी प्रॉपइक्विटी ने अपनी चौथी तिमाही रिपोर्ट में कहा कि अक्तूबर-दिंसबर, 2019 में मकानों की बिक्री नोएडा में 20 फीसदी बढ़कर 1,615 और गुरुग्राम में 19 फीसदी बढ़कर 2,175 इकाई रही। हालांकि, आर्थिक सुस्ती और नकदी संकट के कारण नौ शहरों में कुल बिक्री इस अवधि में 9 फीसदी घटकर 60,453 इकाई रह गई।

इसके अलावा, नए मकानों की आपूर्ति में भी सालाना आधार पर 10 फीसदी की गिरावट आई है। आंकड़ों के मुताबिक, आलोच्य अवधि में पुणे में बिक्री 9 फीसदी गिरकर 15,453 इकाई रही। ठाणे और हैदराबाद में यह 16 फीसदी घटकर क्रमश: 11,933 और 4,643 इकाई रही।


बंगलूरू और मुंबई में 12-12 फीसदी और चेन्नई में 14 फीसदी की गिरावट आई है। हालांकि, कोलकाता में बिक्री 26 फीसदी की तेजी रही। कंपनी के संस्थापक एवं एमडी समीर जसूजा ने कहा कि हमें 2020 में रियल एस्टेट बाजार में सुधार की उम्मीद है। आशा है कि सरकार बजट में सकारात्मक उपायों की घोषणा करेगी।
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