काम की खबर: पैसों की जरूरत है, तो म्यूचुअल फंड से लें लोन, ऐसे करें आवेदन
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म्यूचुअल फंड या सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) में पैसा लगाने वाले निवेशकों को कई बार कम समय के लिए पैसों की जरूरत होती है। ऐसे में वह या तो अपने फंड बेच देते हैं या निवेश योजनाओं को बंद कर देते हैं। ऐसी स्थिति में निवेश योजना रोकने या फंड बेचने के बजाए इसकी इकाइयों पर कर्ज लेना बेहतर होगा।
निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का कर्ज आपको म्यूचुअल फंड इकाइयों को बेचने से बचाता है। साथ ही आपकी जरूरत भी पूरी हो जाती है और वित्तीय योजनाओं पर आंच भी नहीं आती है। इसके अलावा कर की भी कोई उलझन नहीं होती और ना ही फंड की इकाइयों को गिरवी रखने से मालिकाना हक पर कोई असर पड़ता है। म्यूचुअल फंड के बदले कर्ज लेने पर तत्काल कैश की जरूरत पूरी हो जाती है। यह कम अवधि में पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे कर्ज के मुकाबले सस्ता पड़ता है, क्योंकि यह एक तरह से ओवरड्रॉफ्ट पॉलिसी की तरह होता है। इसमें बेकार पड़े म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट का भी लाभ मिलता है।
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बैंक या एनबीएफसी से मिलेगा कर्ज
निवेशक अपने म्यूचुअल फंड पर कर्ज लेने के लिए बैंक या गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पास इकाइयों को गिरवी रख सकते हैं। उन्हें तय अवधि के भीतर लिए गए कर्ज को ब्याज सहित वापस करना होगा। आम तौर पर इस तरह के कर्ज पर ब्याज दर 10.5-12 फीसदी होती है। हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि यह ब्याज दर आपके लिक्विड फंड या डेट फंड पर मिलने वाले ब्याज की तुलना में ज्यादा होगी। लिहाजा इक्विटी फंड की इकाइयों पर ही कर्ज लेना बेहतर होगा।
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ऐसे करें कर्ज के लिए आवेदन
म्यूचुअल फंड पर कर्ज देने के लिए कई ऑनलाइन पोर्टल प्री-अप्रूवल की सुविधा देते हैं। अगर निवेशक के पास फंड डीमैट रूप में हैं, तो यह काम काफी आसान हो जाता है। हालांकि, भौतिक रूप में फंड की इकाइयां होने पर कर्ज की प्रक्रिया लंबी और जटिल हो जाती है। ऐसे में निवेशक को पहले फाइनेंसर से लोन अग्रीमेंट करना होगा और फाइनेंसर म्यूचुअल फंड रजिस्ट्रार को लिखेगा। कर्ज के लिए गिरवी रखी गई इकाइयों को रजिस्ट्रार चिन्हित करेगा। फाइनेंसर इन इकाइयों के कुल मूल्य का 60 से 70 फीसदी राशि ही कर्ज के रूप में देते हैं।
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इन बातों का ध्यान रखें निवेशक
- जब तक आपकी म्यूचुअल फंड इकाइयां गिरवी रहती हैं, उन्हें बेचा नहीं जा सकता।
- कर्ज चुकाने के बाद फाइनेंसर से फंड हाउस को पत्र भेजकर इकाइयों को गिरवी मुक्त जरूर कराएं।
- फाइनेंसर अगर चाहे तो कर्ज के कुछ हिस्से के भुगतान के बाद ही म्यूचुअल इकाइयों को आंशिक रूप से गिरवी मुक्त करा सकता है।
- अगर निवेशक ने कर्ज नहीं चुकाया तो डिफॉल्ट की स्थिति में फाइनेंसर इन इकाइयों को भुनाने के लिए फंड हाउस से अपील कर सकता है।