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दुर्घटना पर 3 साल के अंदर ही लेना होगा मुआवजा
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Thu, 31 Jan 2013 11:55 PM IST
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दुर्घटना पर मिलने वाले थर्ड पार्टी इश्योरेंस क्लेम के नियम सख्त करने की तैयारी है। इसके तहत पीड़ित को हर हालत में तीन साल के भीतर अपने मुआवजे के लिए अदालत में दावा दाखिल करना होगा। मौजूदा कानून के तहत पीड़ित कभी भी दावा दाखिल कर सकता है। इसी तरह नए कानून में दावा दाखिल करने के लिए स्थान क्षेत्र भी सीमित करने की तैयारी है।
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सूत्रों के अनुसार मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन के लिए जो ड्रॉफ्ट तैयार किया गया है, उसके तहत दो प्रमुख संशोधनों की सिफारिश की गई है। अधिकारी के अनुसार अभी थर्ड पार्टी इंश्योरेंस के तहत क्लेम लेने की कोई समय सीमा तय नहीं है। यानी पीड़ित दुर्घटना के बाद अपने जीवन में कभी भी मुआवजे का दावा कर सकता है।
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बीमा कंपनियों द्वारा इस बात की कई बार मांग की गई है, कि दावा लेने के लिए कोई समय सीमा तय न होने से थर्ड पार्टी इश्योरेंस में धोखाधड़ी करने के मामले सामने आए हैं। कई मामलों में लोगों ने 10-15 साल बाद क्लेम के लिए अदालत में दावा दाखिल किया है।
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ऐसे में क्लेम की सही पड़ताल करना काफी मुश्किल हो जाता है, जिसका असर यह हुआ है कि कंपनियां, खासतौर से निजी कंपनियां थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में कम रुचि ले रही हैं। इसे देखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि इसके अलावा मौजूदा एक्ट में संशोधन के लिए इस बात की भी सिफारिश की गई है, कि दावा करने का स्थान क्षेत्र भी तय होना चाहिए। अभी इंश्योरेंस क्लेम के लिए देश के किसी भी क्षेत्र में दावा करने की छूट है।
नए प्रस्ताव के तहत इसे सीमित किया जा रहा है। यानी पीड़ित केवल जहां दुर्घटना हुई है, उस क्षेत्र की अदालत में दावा कर सकता है, दूसरा वह जिस क्षेत्र में निवास करता है वहां की अदालत में दावा कर सकता है, तीसरा जिस क्षेत्र में इंश्योरेंस कंपनी काम कर रही है, वहां की अदालत में वह इंश्योरेंस के लिए दावा दाखिल कर सकेगा।
नए कानून के लागू होने से जहां क्लेम के जरिये होने वाली धोखाधड़ी में लगाम लग सकेगी, वहीं निजी कंपनियों की भी थर्ड पार्टी इंश्योरेंस में रुचि बढ़ेगी। इंडस्ट्री सूत्रों के अनुसार कुल मोटर इंश्योरेंस कारोबार में थर्ड पार्टी इंश्योरेंस प्रीमियम की हिस्सेदारी करीब 35 फीसदी है। साल 2012-13 में इसके क्लेम रेशियो 15-200 फीसदी बढ़ा है। जिसकी वजह के इस कारोबार में कंपनियों की रुचि कम होती जा रही है।