कर्ज लेकर के अपने सपने पूरे करने की होड़ में लगे हैं युवा

नारायण कृष्णमूर्ति Updated Mon, 06 Nov 2017 12:10 PM IST
with taking loan people are fulfilling their dreams, says narayana krishnamurthi
अपने भविष्य निर्माण के लिए सामाजिक एवं वित्तीय संकट के दौरान युवाओं में उधार लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इस तरह हम एक बचतकर्ता से एक खर्च करने वाले देश में तब्दील हो रहे हैं।
हम एक दिलचस्प समय में रह रहे हैं, देश की आबादी का साठ फीसदी हिस्सा युवा है और उनकी संख्या बढ़ रही है। इस युवा भारत ने जनसांख्यिकीय लाभांश को कई गुना बढ़ा दिया है और यह तब और विश्वसनीय लगता है, जब कोई कहता है कि यह किस तरह से हमें बढ़ती और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के बीच पहुंचाएगा।

इसके साथ ही हम कई वित्तीय समस्याओं से जूझ रहे युवाओं से रूबरू होते हैं-बेरोजगारी और रोजगार सृजन की धीमी गति बताते हैं कि हमारे युवा एक चुनौतीपूर्ण और कठिन भविष्य का सामना कर रहे हैं।

भौतिकवादी सुख-साधनों की तीव्र इच्छा के साथ युवाओं की बेचैनी स्पष्ट है। वर्ष 2000 से पहले के युवा अपनी पहली कार तब खरीदते थे, जब वे तीस वर्ष की उम्र के करीब होते थे, लेकिन 2010 के बाद के युवा पच्चीस वर्ष की उम्र से पहले कार चाहते हैं।

आसान कर्ज के विकल्प ने घर और कार खरीदना आसान बना दिया है। छोटी उम्र में वित्तीय लक्ष्यों एवं सपनों को साकार करने के लिए व्यक्तिगत कर्ज लेना एक वास्तविकता है। वित्तीय लक्ष्यों को साकार करने के लिए कर्ज लेने में कोई बुराई नहीं है, अगर यह आवश्यक एवं जरूरी हो।

लेकिन मोबाइल फोन, बाइक, कार का लगातार उन्नयन और उसके लिए तुरंत कर्ज लेना चिंता का कारण जरूर है। एक बचतकर्ता से हम एक खर्च करने वाले देश में तब्दील हो रहे हैैं। 

केंद्रीय सांख्यिकी संगठन द्वारा जारी आंकड़े के मुताबिक, वर्ष 2016-17 में घरेलू बचत सकल घरेलू उत्पाद का 18.5 फीसदी थी, जबकि वर्ष 2010-11 में यह 25 फीसदी थी। अगर कोई पिछले दो दशक की बचत दर की तुलना करे, तो पता चलेगा कि 1990 के दशक में हमारी बचत दर जितनी थी, अभी उसकी आधी है।

वित्तीय सेवा क्षेत्र के खुलने, वेतन में वृद्धि और कम ब्याज दर-इन सब ने भारतीयों के बीच, खासकर युवाओं में उधार की संस्कृति को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उधार लेने की सुविधा, ईएमआई संस्कृति के साथ कर्ज चुकाने में आसानी के चलते युवा अपनी वर्तमान इच्छाओं को पूरा करने के लिए भविष्य की आय को घटा रहे हैं। 
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