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काम की बात: संपत्ति का सौदा रद्द तो ऐसे मिलेगा रिफंड, टोकन मनी पर ज्यादा संकट

Mon, 31 May 2021 06:30 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 31 May 2021 06:30 AM IST
सार

  • खरीदार की ओर से सौदा रद्द किए जाने पर विक्रेता को टोकन मनी की पूरी राशि जब्त करने का भी अधिकार है। 
  • खरीदार इस पर टैक्स छूट का दावा भी नहीं कर सकता, क्योंकि आयकर कानून के तहत यह राशि पूंजीगत हानि मानी जाएगी।

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Report: Buyers will get a refund if the property deal is canceled
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

विस्तार

महामारी में रोजगार और आमदनी छिनने के साथ लोगों को वित्तीय प्राथमिकताएं बदलने पर भी मजबूर कर दिया है। सैकड़ों ऐसे मकान खरीदार है जिन्होंने महामारी से पहले बुकिंग कराई लेकिन पूंजी नहीं जुटा पाने के कारण सौदा रद्द करा रहे हैं। ऐसे खरीददारों को बिल्डर या प्रॉपर्टी डीलर को दिया पैसा कैसे वापस मिलेगा पूरा गणित बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-

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टोकन मनी पर ज्यादा संकट, टैक्स छूट भी नहीं 
संपत्ति सलाहकार फर्म 99 एकड़ की वरिष्ठ विश्लेषक सुभद्रा भदौरिया का कहना है कि अधिकतर बिल्डर सौदे के अनुबंध के समय खरीदार से ली गई टोकन मनी की 10 से 15 फीसदी राशि काटकर शेष पैसा लौटा देते हैं। टोकन मनी वह राशि होती है जो अनुबंध के लिए बतौर बयाना खरीदार देता है। यह निश्चित राशि भी हो सकती है अथवा संपत्ति का कुल मूल्य का एक हिस्सा भी हो सकता है।
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खरीदार के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि उसकी ओर से सौदा रद्द किए जाने पर विक्रेता को टोकन मनी की पूरी राशि जब्त करने का भी अधिकार है। खरीदार इस पर टैक्स छूट का दावा भी नहीं कर सकता, क्योंकि आयकर कानून के तहत यह राशि पूंजीगत हानि मानी जाएगी। वहीं विक्रेता के लिए किया राशि पूंजीगत लाभ के बजाय अन्य स्रोत से हुई आय होगी जिस पर टैक्स चुकाना पड़ेगा।
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स्टांप शुल्क 98 फीसदी वापस
संबंधी लेने के लिए खरीददार को स्टांप शुल्क भी चुकाना होता है जो हर राज्य में अलग-अलग क्षेत्र के सर्किल रेट के हिसाब से बलिया तैयार किया जाता है अनुबंध के 6 महीने के भीतर सौदा रद्द होने पर खरीदार स्टांप शुल्क के रिफंड का दावा कर सकता है।

इसके लिए हर राज्य में अलग-अलग अवधि रहती है जो 6 महीने से 2 साल तक हो सकती है। रिफंड आवेदन के साथ संपत्ति अनुबंध और सौदा रद्द होने की मूल प्रति लगानी होगी। संबंधित विभाग की ओर से जांच पड़ताल के बाद ग्राहक को स्टांप शुल्क की 98 फ़ीसदी राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन पंजीकरण शुल्क वापस नहीं मिलेगा। कई मामलों में भी मिलता है जब बिल्डर तय समय पर मकान का पजेशन नहीं दे पाता।

पेचीदे नियम में फंस सकती है जीएसटी की राशि
अधिकतर ग्राहक में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में मकान खरीदना चाहते हैं क्योंकि यह सस्ता होने के साथ निर्माण प्रक्रिया उनकी आंखों के सामने रहती है। ऐसे प्रोजेक्ट में अनुबंध के समय दी गई राशि में जीएसटी भी शामिल रहता है, जिसे सौदा रद्द होने पर बिल्डर वापसी से इंकार कर सकता है क्योंकि वह आपको सेवाएं दे चुका है। लिहाजा जीएसटी रिफंड का दावा भी नहीं किया जा सकता। बिल्डर की ओर से जीएसटी सरकार को चुकाए जाने के बाद ग्राहक के लिए इसे वापस पाना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है।


सावधानी बरते संपत्ति खरीदार 

  • बिल्डर को टोकन मनी या अनुबंध राशि का नगद भुगतान कतई न करें। 
  • अनुमान से पहले ही अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर बिल्डर या डीलर से बातचीत कर लें। 
  • अनुबंध के बाद बैंक ग्राहक को लोन देने से इनकार करता है तो बिना कटौती टोकन मनी वापस करने के लिए भी अपने बिल्डर से पहले ही आश्वासन ले लें। 
  • सोदा का अनुबंध करते समय बिल्डर की ओर से दिए गए मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करने के बजाय कानूनी दस्तावेज तैयार करना बेहतर होगा।

दस्तावेज में सभी शर्ते शामिल करें 
कोशिश यही करनी चाहिए कि सौदा रद्द न करना पड़े। क्योंकि वित्तीय नुकसान के साथ मकान भी हाथ से निकल जाएगा। फिर भी मकान संपत्ति का अनुबंध कराते समय सौदा रद्द होने की स्थिति में अपने रिफंड और दावा अधिकारों का भी कानूनी दस्तावेजों पर स्पष्ट उल्लेख कराएं।    --बलवंत जैन, निवेश सलाहकार

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