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निवेश के मंत्र 76: करना चाहते हैं शेयर बाजार में निवेश? तो फायदे में रहने के लिए जानिए इन फंडामेंटल्स के बारे में

Mon, 16 Nov 2020 04:37 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Mon, 16 Nov 2020 04:37 PM IST
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know about important terms and fundamental related to investment in share market
निवेश - फोटो : pixabay

कम उम्र में ट्रेडिंग शुरू करना एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह वित्तीय अनुशासन लाता है और पर्याप्त बचत के साथ भविष्य की अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तैयार करता है। ज्ञान की कमी के कारण लंबे समय तक लोगों में शेयर बाजार में निवेश करने को लेकर हिचकिचाहट थी। उन्हें पारंपरिक दृष्टिकोण का ही पता था जिसमें उन्हें शेयर खरीदने या बेचने के लिए स्टॉक ब्रोकर के पीछे जाना पड़ता था। इस प्रयास में भारी-भरकम ब्रोकरेज फीस और अन्य छिपी लागत भी हावी थी। अगर आप भी शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं और आपको इसकी ज्यादा जानकारी नहीं है, तो ये खबर आपके लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हम आपको कुछ ऐसे अनुपातों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप आसानी से शेयर का मूल्यांकन कर सकेंगे। 

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प्राइस टू अर्निंग रेश्यो (पीई)
किसी कंपनी के शेयर की वैल्यू का पता लगाने के लिए पीई रेश्यो का इस्तेमाल होता है। यह शेयर की कीमत और शेयर से आय का अनुपात होता है। मालूम हो कि शेयर से आय को ईपीएस भी कहते हैं। आसान भाषा में समझें, तो इसका अर्थ है अर्निंग प्रति शेयर। यह एक ही सेक्टर में दो कंपनियों के बीच चयन में मददगार होता है। 
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पी/ई = (प्रति शेयर मूल्य/प्रति शेयर आय)

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पीईजी अनुपात
पीईजी अनुपात का उपयोग कंपनी की आय में वृद्धि को ध्यान में रखकर शेयर के मूल्य को खोजने में किया जाता है। यह पीई की तुलना में ज्यादा उपयोगी माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पीई कंपनी की विकास दर को अनदेखा कर देता है, लेकिन पीईजी अनुपात में ऐसा नहीं है। 
पीईजी अनुपात = (पीई अनुपात/आय में अनुमानित वार्षिक वृद्धि)

प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात    
प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात को कंपनी का शुद्ध संपत्ति मूल्य भी कहा जाता है। आसान भाषा में समझें, तो यह कुल संपत्ति माइनस अमूर्त संपत्ति और देनदारियों के रूप में गणना कर निकलता है। जिन कंपनियों का प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात    कम होता है, उन्हें कम मूल्यवान माना जाता है। 

प्राइस टू बुक वैल्यू अनुपात = (प्रति शेयर बाजार मूल्य/प्रति शेयर बुक वैल्यू)

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प्रति शेयर आय (ईपीएस)
प्रति शेयर आय (ईपीएस) प्रत्येक शेयर के लिए आवंटित कंपनी के लाभ का हिस्सा होता है। यह कंपनी की लाभप्रदता के संकेतक के रूप में कार्य करता है। प्रति शेयर आय एक वित्तीय अनुपात है, जो शुद्ध आमदनी को आम में विभाजित करता है। मालूम हो कि प्रति शेयर आय बढ़ाने वाली कंपनियों के शेयर को निवेश के लिए बेहतर माना जाता है।  
ईपीएस = (शुद्ध आय/कुल शेयर)

रिटर्न ऑन इक्विटी (आरओई)
रिटर्न ऑन इक्विटी यानी इक्विटी पर रिटर्न (आरओई) दर्शाता है कि कंपनी शेयरधारकों को पुरस्कृत करने में कितनी अच्छी है। यह शेयरधारक को इक्विटी के फीसदी के रूप में दी गई शुद्ध आय की राशि है। अक्सर निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे उन्हीं कंपनियों के शेयरों में निवेश करें, जिनका पिछले तीन सालों का औसत आरओई ब्याज दर और महंगाई दर की कुल राशि से ज्यादा है। 
आरओई = (शुद्ध आय/शेयरधारकों का कुल फंड)

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