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चिंता मनी-44 : प्रधानमंत्री वय वंदन योजना अच्छी या फिक्स्ड डिपॉजिट ज्यादा बेहतर है?

नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार Published by: योगेश साहू Updated Thu, 01 Oct 2020 01:55 AM IST
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रुपये - फोटो : pixabay

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अड़सठ वर्षीय सतनाम सिंह बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों में लगातार गिरावटों से निराश हैं और जानना चाहते हैं कि क्या प्रधानमंत्री वय वंदन योजना (पीएमवीवीवाई) बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की तुलना में अच्छी है।
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वर्ष 2012 में कृषि विश्वविद्यालय से रिटायर होने के बाद सतनाम सिंह आश्वस्त थे कि पेंशन और बचत से उनकी बची जिंदगी आराम से गुजर जाएगी। लेकिन हर गुजरते साल बचत की ब्याज दर गिरने और जीवन निर्वाह का खर्च बढ़ने से उनके आत्मविश्वास को चोट लगती रही। अब सतनाम सिंह जानना चाहते हैं कि क्या प्रधानमंत्री वय वंदन योजना फिक्स्ड डिपॉजिट का विकल्प हो सकती है।


रिटायर्ड लोगों के लिए एफडी और मासिक पेंशन योजना (मंथली पेंशन स्कीम) निवेश की दो सबसे लोकप्रिय योजना है। बैंक वरिष्ठ नागरिकों को उनके डिपॉजिट पर 0.5 फीसदी अधिक ब्याज देते हैं। दूसरी ओर, एलआईसी ने 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए 2017 से प्रधानमंत्री वय वंदन योजना शुरू की है। 10 साल तक की इस योजना में बुजुर्ग नागरिकों को मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना स्तर पर पेंशन दी जाती है।

एफडी और पीएमवीवीवाई
दोनों ही योजनाओं में जमा राशि पर ब्याज दिया जाता है। इन दो योजनाओं में बुनियादी फर्क यह है कि फिक्स्ड डिपॉजिट में ब्याज जहां साल में दिया जाता है, वहीं पीएमवीवाईवाई में साल में ब्याज अनेक बार दिया जाता है। दोनों में गारंटेड रिटर्न है, लेकिन ब्याज दर के मामले में पीएमवीवाईवाई बेहतर है, जिसका मौजूदा गारंटेड रिटर्न 7.4 प्रतिशत है, जो बैंक एफडी की तुलना में कहीं अधिक है।

पीएमवीवाईवाई में सबसे कम पेंशन 1,000 रुपये मासिक और सबसे अधिक 9,250 रुपये मासिक है। इस योजना में सबसे कम 1.63 लाख और सबसे अधिक 15 लाख रुपये का निवेश किया जा सकता है। एफडी में निवेश की कोई सीमा नहीं है और इसमें कम राशि भी रखी जा सकती है। लेकिन एफडी की ब्याज दर 6.7 फीसदी से 7.2 है, जो पीएमवीवाईवाई की तुलना में कम है।

योजना का चुनाव
जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है और फिर कहा जा रहा है, कि कभी भी जमा राशि पर गारंटेड ब्याज दर से प्रभावित होकर निवेश नहीं करना चाहिए। हर साल एफडी पर ब्याज दर कम हो रही है, दूसरी ओर, मुद्रास्फीति की दर बढ़ती जा रही है।

बैंक की ब्याज दर से मुद्रास्फीति की दर घटाने पर जो बचता है, वही रिटर्न की वास्तविक दर है। पर दोनों को घटाने पर कभी शून्य बचता है, तो कभी मुद्रास्फीति की दर ही अधिक होती है-यानी जो रिटर्न है, वह नकारात्मक है।
बचत खाते की 3.5-4 फीसदी की ब्याज दर और मुद्रास्फीति की 5.5-6 फीसदी की दर को ही लीजिए।

इसका मतलब यह है कि वास्तविक अर्थ में बचत खाते में रखी धनराशि में कोई वृद्धि नहीं हो रही है। निवेश पर मिलने वाले गारंटेड रिटर्न के पीछे भागने से पहले इस सरल गणितीय सबक को ध्यान में रखना चाहिए। इस तरह के निवेश से जुड़ा जोखिम सीधे-सीधे भले ही आपकी जमा पूंजी पर असर न डालता हो, लेकिन परोक्ष रूप से एक समय के बाद यह आपके निवेश को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।

अपनी उम्र और इक्विटी में पहले कभी निवेश न करने के अनुभव को देखते हुए सतनाम सिंह को डेब्ट फंड में पैसे रखने के बारे में सोचना चाहिए। इसमें रिटर्न की गारंटी नहीं है, लेकिन इसमें जमा पूंजी पर असर नहीं पड़ता, साथ ही, एफडी और पीएमवीवाईवाई के विपरीत इसमें टैक्स बचत भी होती है।

बैंक खाते या एफडी में पैसे रखने की तुलना में लिक्विड फंड या कम अवधि वाले फंड में निवेश करना बेहतर विकल्प है। इसमें किसी को तीन से पांच दिन में अपने पैसे वापस मिल जाते हैं। सतनाम सिंह को गारंटेड और परिवर्तनीय रिटर्न के लिए अपने पैसे डेब्ट फंड और पीएमवीवाईवाई में रखने चाहिए।

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