चिंता-मनी 7: वरिष्ठ नागरिक कहां और कैसे करें निवेश?
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रमाकांत शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं और एफडी के ब्याज और कुछ तयशुदा रिटर्न निवेश पर निर्भर हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ब्याज दर घटती गई हैं और जीवन-यापन महंगा होता जा रहा है। ऐसे हालात में वे अपने वित्तीय प्रबंधन को लेकर चिंतित हैं।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रमाकांत जी जैसे लोगों को जब सारी चिंताओं से मुक्त हो जाना चाहिए, जमा पर ब्याज दरें घटने से उनके सामने वित्तीय अनिश्चितता बढ़ती जा रही है। गौर कीजिए कि वर्ष 2012 में बैंक में जमा 40 लाख रुपये का मासिक ब्याज 35,352 रुपये (सालाना 4.25 लाख रुपये) होता था। आज उतने ही जमा पर मासिक ब्याज 35 फीसदी घटकर 22,933 रुपये (सालाना 2.75 लाख रुपये) हो गया है। यहां तक कि वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) के तहत 2014 में 9.3 फीसदी की दर से ब्याज मिलता था, जो अब 21 फीसदी घटकर 7.4 फीसदी रह गया है।
रमाकांत जी की तरह अनेक लोग हैं, जिन्हें इस चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके आत्मसम्मान को चोट पहुंचती है। अनेक रिटायर लोगों को वृद्धावस्था से जनित गरीबी का सामना करना पड़ता है। महंगाई का प्रभाव और कैपिटल को सुरक्षित रखकर ब्याज से होने वाली आय पर निर्भरता बहुत कारगर नहीं है। महंगाई का प्रभाव और ब्याज से होने वाली आय पर लगने वाला आयकर महंगाई की वास्तविक चुनौती को बढ़ा रहे हैं। इसलिए यह अहम है कि ऐसे वित्तीय उपाय देखें जाएं, जिनपर टैक्स का भार ना पड़े और जो महंगाई से दूरगामी तरीके से निपट सकें।
मानसिकता बदलें
ऐसे लोग जिनके पास अब भी रिटायर होने में कुछ साल हैं, वे रमाकात जी जिस परिस्थिति का सामना कर रहे हैं, उससे दो सबक सीख सकते हैं-
- पहला यह कि आपको सेवानिवृत्ति के बाद ब्याज से होने वाली आय को विकल्प के तौर पर नहीं देखना चाहिए।
- दूसरा सबक है, इक्विटी और इक्विटी से जुड़े साधनों में अनेक लोग इस भय से निवेश नहीं करते कि इससे उनका पैसा डूब जाएगा, मगर इससे मुनाफा भी हो सकता है। इक्विटी में निवेश जोखिम से भरा हुआ है, यह धारणा पूरी तरह से सही नहीं है।
खासतौर से ऐसे समय में जब लोग कार, घर या रोजमर्रा के काम आने वाली चीजें कर्ज पर खरीदने के लिए भविष्य की अपनी आय को जोखिम मे डाल रहे हों। यह जोखिम तब और बढ़ जाता है जब नौकरियां चली जाती हैं या फिर वेतन में कटौती हो जाती है, जैसा किन इन दिनों कई लोग सामना कर रहे हैं। इक्विटी में तभी धन लगाएं जब आपको 8-10 सालों तक इस धन की जरूरत ना हो। वह भी यह जानते हुए कि इसमें रिटर्न एफडी जैसा नहीं हो सकता।
समाधान क्या है
घटती ब्याज दरों से निपटने के लिए सही नजरिया आपकी उम्र, आपकी परिस्थितियों और आपकी वित्तीय संपत्ति पर निर्भर है। यदि आप सोच रहे हैं कि जमा पर ब्याज दरों में तीन से पांच सालों में बढ़ोतरी होगी, तो ऐसा नहीं लगता। आदर्श स्थिति यह है कि आप अपना अतिरिक्त धन एफडी के रूप में बैंक में रखें। इसके लिए आपको कुछ बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं, जिससे आपकी मौजूदा जीवनशैली प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि, संभव है, तो अपने घर का कुछ हिस्सा या पूरी बेच दें और उसके बदले कोई छोटा मकान ले लें या किराए का मकान ले लें। इससे आपको कुछ अतिरिक्त आय होगी या आप जमा में वृद्धि कर सकते हैं, जिससे ब्याज दर में कमी से होने वाले नुकसान की भरपाई हो जाएगी।
आप सोना जैसी संपत्ति बेचकर कुछ नकद भी हासिल करना चाहेंगे, जिससे जमा से होने वाली आय तथा आपके खर्च के बीच के अंतर को कम किया जा सके। आपको अपने बच्चों तथा परिवार के सदस्यों को अपनी वित्तीय स्थिति से अवगत कराना चाहिए ताकि वे आपको जीवन के आखिरी चरण में मदद कर सकें। आम तौर पर भारतीय पारिवारिक संस्कृति और भावनात्मक संबंध आज भी मौजूद है, जिससे परिवार के सदस्य अपने प्रियजन की मदद के लिए तत्पर रहते हैं।