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बजट 2020: धीरे-धीरे खत्म होंगी सभी तरह की ‘छूट’, तभी हासिल होगा विनिवेश का लक्ष्य- सीतारमण

Sat, 01 Feb 2020 06:18 PM IST
paliwal पालीवाल बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 01 Feb 2020 06:18 PM IST
सार

  • निजी निवेश घटने से बढ़ाया सरकारी निवेश, राजकोषीय घाटा हमेशा नहीं रहेगा ऐसा
  • जताया भरोगा, हासिल होगा 2019-20 में 1.05 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य 

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budget 2020 finance minister says that exemption to tax payers will be rationalized
- फोटो : ANI

विस्तार

डिडक्शन और एक्जंप्शन नहीं लेने की शर्त पर आय कर की दर में कटौती का प्रस्ताव करने वाली केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि सरकार धीरे-धीरे हर तरह के डिडक्शन और एक्जंप्शन को खत्म करेगी। यह पूछे जाने पर कि इस बजट में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए अतिरिक्त पूंजी निवेश का प्रावधान नहीं किया गया है, तो क्या इन बैंकों को और पूंजी नहीं मिलेगी, इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आवश्यकता पर अतिरिक्त पूंजी प्रदान की जाएगी। अभी इसका उल्लेख करने का यह मतलब नहीं है कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर भी उपलब्ध नहीं कराया जाए।

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राजस्व घाटे से संबंधित सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा अभी राजस्व वसूली में कमी आई है। वस्तु एवं सेवा कर में भी अपेक्षित राजस्व वसूली नही हो पा रही है। इसलिए चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोषीय घाटे के लिए 3.8 फीसदी का अनुमान लगाया गया है, जो कि बजट अनुमान के मुकाबले महज आधे फीसदी की बढ़ोतरी है।
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इस समय अर्थव्यवस्था में निजी निवेश पर्याप्त नहीं हो रहा है इसलिए सरकारी निवेश बढ़ाया गया है। लेकिन राजकोषीय घाटा सदा ऐसा नहीं रहेगा। उम्मीद है कि अगले वित्त वर्ष में यह घट कर फिर से 3.5 फीसदी पर आ जाएगा।
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 विवाद से विश्वास योजना पर पूछे गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले साल अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में समाधान योजना लायी गई थी, जिसका कारोबारियों ने खूब फायदा उठाया। इसका असर यह हुआ है कि अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में कर विवाद लगभग खत्म हो गया है।

इसलिए अब प्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में ऐसा किया गया है। इसमें कहा गया है कि जिनका विवाद किसी भी पंचाट या न्यायालय में लंबित है, वह चाहे 31 मार्च तक सिर्फ कर की रकम दे कर विवाद का निपटारा कर सकते हैं। फिर उनसे न तो ब्याज की वसूली की जाएगी और न ही दंड वसूला जाएगा। जो 31 मार्च तक ऐसा नहीं कर पाते हैं, वह 30 जून तक 10 फीसदी और कर देकर ऐसा कर सकते हैं।

इस साल मनरेगा में आवंटन घटाये जाने वाले एक सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के दौरान कई राज्यों के कुछ क्षेत्र में अतिरिक्त काम बढ़ गया था। उसी की भरपाई के लिए रिवाइज्ड इस्टीमेट में आवंटन बढ़ाना पड़ा। अगले साल के लिए इस योजना में उतना ही आवंटन किया गया है, जितना इसके लिए जरूरी है।


विनिवेश से संबंधित एक सवाल पर विनिवेश सचिव टी के पांडे ने कहा कि इस साल विनिवेश का लक्ष्य बढ़ा दिया गया है और यह पूरा होगा। उनका कहना था कि भारतीय जीवन बीमा निगम में सरकारी हिस्सेदारी का विनिवेश प्राथमिक सार्वजनिक निर्गम या आईपीओ के जरिये होगा। इसके लिए प्रकिया शुरू की जाएगी। सरकार विनिवेश के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रति आश्वस्त है। उल्लेखनीय है कि इस बार जहां 2.10 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा गया है वहीं चालू वित्त वर्ष के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य तय किया गया था।

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