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Hindi News ›   Maharashtra ›   Bank credit grew by 5.74 percent and deposits by 9.73 on year on year basis according to RBI data

आरबीआई आंकड़ा: सालाना आधार पर बैंक कर्ज 5.74 प्रतिशत और जमा 9.73 बढ़ी

Tue, 22 Jun 2021 01:00 AM IST
Kuldeep Singh पीटीआई, मुंबई
पीटीआई, मुंबई Published by: Kuldeep Singh Updated Tue, 22 Jun 2021 01:00 AM IST
सार

  • रिजर्व बैंक के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 में बैंक कर्ज 5.56 प्रतिशत और जमा 11.4 प्रतिशत बढ़ी।
  • पांच जून, 2020 को समाप्त पखवाड़े में बैंक कर्ज 102.55 लाख करोड़ और जमा राशि 139.55 लाख करोड़ रुपये रही थी।

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Bank credit grew by 5.74 percent and deposits by 9.73 on year on year basis according to RBI data
RBI - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बैंक कर्ज चार जून, 2021 को समाप्त पखवाड़े में सालाना आधार पर 5.74 प्रतिशत बढ़कर 108.43 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं जमा 9.73 प्रतिशत बढ़कर 153.13 लाख करोड़ रुपये हो गई।

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भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े के अनुसार एक साल पहले पांच जून, 2020 को समाप्त पखवाड़े में बैंक कर्ज 102.55 लाख करोड़ रुपये और जमा राशि 139.55 लाख करोड़ रुपये रही थी।
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इससे पूर्व, 21 मई, 2021 को समाप्त पखवाड़े में बैंक ऋण 5.98 प्रतिशत जबकि जमा 9.66 प्रतिशत बढ़ी थी। केंद्रीय बैंक के आंकड़े के अनुसार, समूचे वित्त वर्ष 2020-21 में बैंक कर्ज 5.56 प्रतिशत और जमा 11.4 प्रतिशत बढ़ी।
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनुमान लगाया है कि देश में दूसरी लहर के कारण चालू वित्त वर्ष के दौरान उत्पादन में दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। आर्थिक उत्पादन के नुकसान का जीडीपी के साथ सीधा संबंध नहीं हो सकता है, लेकिन यह अर्थव्यवस्था में मूल्यवर्धन में नुकसान की ओर इशारा करता है। पहले ही, आरबीआई सहित कई एजेंसियों ने वित्त वर्ष के लिए विकास अनुमानों को कम कर दिया है।

टीकाकरण की गति तय करेगी पुनरुद्धार का रास्ते
भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों के एक लेख में कहा गया है कि कोविड-19 टीकाकरण की गति और पैमाना आर्थिक पुनरुद्धार के रास्ते को तय करेगा। इसमें यह भी कहा गया है कि अर्थव्यवस्था में महामारी तथा पहले से मौजूद चक्रीय और संरचनात्मक बाधाओं से पार पाने की जरूरी क्षमता तथा मजबूती है।

अर्थव्यवस्था की स्थिति पर आरबीआई की मासिक पत्रिका में डिप्टी गर्वनर एम डी पात्रा और अन्य अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से लिखे गये लेख में कहा गया है कि मौजूदा आकलन के अनुसार महामारी से केवल घरेलू मांग प्रभावित हुई है।


लॉजिस्टिक और अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की जरूरत
इसमें कहा गया है कि टीका स्वयं से महामारी का खात्मा नहीं करेगा। 'हमें वायरस के साथ जीना सीखना होगा, टीके के साथ स्वास्थ्य सेवाओं, लॉजिस्टिक और अनुसंधान में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।'

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