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लोन वापसी पर RBI कसेगा बकायदारों पर शिकंजा, अध्यादेश को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
Updated Fri, 05 May 2017 01:23 PM IST
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : WordPress
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बैंकों के डूबे हुए कर्ज यानी 'बैड डेब्ट्स' को कम करने के लिए बुधवार को कैबिनेट ने एक अध्यादेश का सुझाव दिया जिससे भारतीय रिजर्व बैंक प्रमुख ऋण बकाएदारों को खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करेगा। इस अध्यादेश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिल गई है और जल्द ही इसकी विसतृत जानकारी सामने आएगी। इस पैकेज को सरकार, आरबीआई और बैकों की बीच हुई बातचीत के बाद बनाया गया है।
सूत्रों का कहना है कि इस अध्यादेश के लागू हो जाने के बाद आरबीआई का कद बढ़ जाएगा और वो विशेष अधिकार के साथ नियामक बन जाएगा। इसके साथ ही सरकार चुनिंदा मसलों में ही आरबीआई को सलाह देगी।
गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्रों के पास 6 लाख करोड़ रुपये के नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) हैं, जिसके उनके प्रदर्शन पर खासा असर पड़ा है। हालांकि, सरकार ने पहले भी कोशिश की थी, मगर वो कदम नाकाफी साबित हुए। बैंक सैटलमेंट पैकेज पर ध्यान नहीं देना चाहते थे क्योंकि उन्हें सीवीस और सीएजी की रिपोर्ट में खराब नंबर मिलने का डर था, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हो सकती है।
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सूत्रों का कहना है कि इस अध्यादेश के लागू हो जाने के बाद आरबीआई का कद बढ़ जाएगा और वो विशेष अधिकार के साथ नियामक बन जाएगा। इसके साथ ही सरकार चुनिंदा मसलों में ही आरबीआई को सलाह देगी।
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गौरतलब है कि सार्वजनिक क्षेत्रों के पास 6 लाख करोड़ रुपये के नॉन परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) हैं, जिसके उनके प्रदर्शन पर खासा असर पड़ा है। हालांकि, सरकार ने पहले भी कोशिश की थी, मगर वो कदम नाकाफी साबित हुए। बैंक सैटलमेंट पैकेज पर ध्यान नहीं देना चाहते थे क्योंकि उन्हें सीवीस और सीएजी की रिपोर्ट में खराब नंबर मिलने का डर था, जिसके बाद सीबीआई जांच भी हो सकती है।
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बैंकों ने मांगी सरकार से मदद
अरुण जेटली (फाइल फोटो)
बैंको की सलाह पर सरकार और आरबीआई मौजूदा ऋण प्रणाली को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। इसके तहत कॉर्पोरेट ऋष को पुनर्गठित करने के लिए ऋष की 10 फीसदी हिस्से को इक्विटी में तब्दील किया जाएगा। इसके अलावा ऋष लेन-देन पर भी निगरानी रखी जाएगी। मौजूदा समय में पूर्वी सीवीसी प्रदीप कुमार और सतर्कता आयुक्त जानकी बल्लभ इस कार्य के लिए नियुक्त हैं।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कैबिनेट ने बैकिंग सेक्टर के संदर्भ में कुछ बड़े फैसले किए हैं। कुछ फैसले महामहिम राष्ट्रपति को लेने और उनकी मंजूरी के बिना ज्यादा जानकारी नहीं दी सकती। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, जानकारी भी साझा की जाएगी।
इससे पहले बैंकों ने भी वित्त मंत्री से भी इस मुद्दे पर मदद मांगी थी, जिससे एनपीए को कम किया जा सके। बैंकों ने कहा था कि वो लोन की अवधि और इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के मूड में नहीं है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि कैबिनेट ने बैकिंग सेक्टर के संदर्भ में कुछ बड़े फैसले किए हैं। कुछ फैसले महामहिम राष्ट्रपति को लेने और उनकी मंजूरी के बिना ज्यादा जानकारी नहीं दी सकती। जैसे ही मंजूरी मिलेगी, जानकारी भी साझा की जाएगी।
इससे पहले बैंकों ने भी वित्त मंत्री से भी इस मुद्दे पर मदद मांगी थी, जिससे एनपीए को कम किया जा सके। बैंकों ने कहा था कि वो लोन की अवधि और इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के मूड में नहीं है।