अमेजन को सरकार से मिले यह दो बड़े झटके, इस बिजनेस मॉडल पर लगेगी रोक
अमेजन को सरकार ने दो बड़े झटके दे दिए हैं। जहां अब इसके ग्राहकों को एमआरपी पर सामान खरीदना पड़ेगा, वहीं अब इन कंपनियों को सामान की डिलिवर करने के लिए किसी एक कंपनी से पार्टनरशिप भी नहीं कर सकेंगे।
अमेजन, क्लाउडटेल को लगा सबसे बड़ा झटका
अमेजन और उसकी डिलिवरी साझेदारी कंपनी क्लाउडटेल इंडिया को सबसे बड़ा झटका लगेगा। क्लाउडटेल अमेजन पर सबसे बड़ा विक्रेता है, जो कि तेज डिलिवरी और स्टॉक कंट्रोल पर नजर रखता है। अमेजन पर मौजूद छोटे व्यापारियों का आरोप है कि उनके उत्पादों को पहले बेचने के बजाए हमेशा बड़े व्यापारियों को तरजीह मिलती है।
क्लाउडटेल इंडिया और अमेजन की 51:49 के अनुपात में साझेदारी है। क्लाउडटेल ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 7149 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था, जो 2016-17 के मुकाबले 30 फीसदी ज्यादा है।
देश में खुदरा बाजार बहुत बड़ा है। एक अनुमान के मुताबिक देश में लगभग चार करोड़ खुदरा की दुकानें हैं।
इनके माध्यम से लगभग चौदह करोड़ लोगों का रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। जीएसटी के कारण पहले ही सरकार से नाराज चल रहे व्यापारी ऑनलाइन कंपनियों पर कोई लगाम न लगाए जाने से भी नाराज चल रहे थे। सरकार ने जीएसटी की दर घटाकर व्यापारियों को मनाने का काम किया था।
नहीं हो सकेगी एक्सक्लूसिव बिक्री
ऑनलाइन कंपनियों जैसे अमेजन व फ्लिपकार्ट आदि पर अब किसी भी उत्पाद की एक्सक्लूसिव बिक्री नहीं हो सकेगी। केंद्र सरकार ने बुधवार को एक आदेश जारी करते हुए इस तरह की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे खुदरा व्यापारियों को समान प्रतिस्पर्धा का मौका मिलेगा। अब तक ऐसे किसी कानून के न होने से ऑनलाइन मार्केट में एक्सक्लूसिव उत्पादों के सेल लगाकर कंपनियां मोटा कमा रहीं थीं।
कंपनियां लगाती थी एक्सक्लूसिव सेल
कंपनियां बाजार में अच्छी कंपनियों के आने वाले प्रमुख उत्पाद की एक्सक्लूसिव सेल लगाती थीं। इससे इन नए उत्पादों को बाद में खुदरा बाजार में आने पर भी बहुत कम ग्राहक उसके पास जा रहे थे। खुदरा व्यापारियों का बिजनेस लगभग ठप होने की स्थिति आ गई थी। इससे बचने के लिए व्यापारियों ने सरकार से गुहार लगाई थी।
फ्लिपकार्ट को भी छोड़ा पीछे
अमेजन अब भारत में भी नंबर एक पायदान पर पहुंच गई है। इसने भारतीय कंपनी फ्लिपकार्ट को भी पीछे छोड़ दिया है। बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार अमेजन ने 31 मार्च 2018 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में 53 हजार करोड़ रुपये (7.5 अरब डॉलर) की कुल बिक्री की।