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डेबिट कार्ड से पेट्रोल-डीजल भुगतान, तेल कंपनियों को पड़ रहा भारी
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 14 Feb 2017 04:48 PM IST
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- फोटो : File Photo
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नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के क्रम में देशभर के पेट्रोल पंपों पर डेबिट कार्ड पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट एमडीआर से मुक्ति से ग्राहकों को तो सुविधा मिल रही है। लेकिन इससे तेल बेचने वाली सरकारी कंपनियों को नुकसान हो रहा है। अधिकारियों का कहना है कि आगामी 31 मार्च तक तो वर्तमान व्यवस्था ही चलती रहेगी, लेकिन आगे के लिए कुछ सोचना होगा।
देश के एक सरकारी तेल विपणन कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अभी तो डेबिट कार्ड से पेट्रोल-डीजल खरीदने पर जो एमडीआर लग रहा है, उसका भुगतान तेल कंपनियां कर रही हैं। लेकिन ऐसी व्यवस्था ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती है क्योंकि इससे नुकसान हो रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि इस बारे में सरकार में उच्च स्तर पर बात चल रही है और इसका कुछ न कुछ समाधान निकलेगा।
उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के बाद से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्घता जताते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ दिन पहले कहा था कि इस तरह के पेमेंट का वॉल्यूम बढ़ने के साथ ही डेबिट कार्ड पेमेंट पर लगने वाले चार्जेस भी कम होंगे। रिजर्व बैंक इस दिशा में काम कर रहा है। अभी पेमेंट्स एंड सेटलमेंट एक्ट के तहत रिजर्व बैंक ने एक हजार रुपए के डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर एमडीआर 0.25 फीसदी तय किया है, जबकि 2000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन पर यह 0.50 फीसदी तय किया गया है। 2000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन पर चार्ज तय करने का कार्य चल रहा है और यह जल्द ही पूरा होगा।
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अभी जो अंतरिम व्यवस्था बनी है, उसमें पेट्रोल पंपों पर डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाला शुल्क तेल कंपनियों द्वारा वहन किया जा रहा है। जहां तक क्रेडिट कार्ड की बात है तो उसमें शुल्क का भुगतान ग्राहकों को ही करना होगा क्योंकि क्रेडिट कार्ड में खरीदारी उधारी में होती है और उसमें ग्राहकों को कुछ अवधि के अंदर भुगतान करने की छूट मिलती है।
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देश के एक सरकारी तेल विपणन कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अभी तो डेबिट कार्ड से पेट्रोल-डीजल खरीदने पर जो एमडीआर लग रहा है, उसका भुगतान तेल कंपनियां कर रही हैं। लेकिन ऐसी व्यवस्था ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती है क्योंकि इससे नुकसान हो रहा है। हालांकि, उनका कहना है कि इस बारे में सरकार में उच्च स्तर पर बात चल रही है और इसका कुछ न कुछ समाधान निकलेगा।
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उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के बाद से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के प्रति प्रतिबद्घता जताते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ दिन पहले कहा था कि इस तरह के पेमेंट का वॉल्यूम बढ़ने के साथ ही डेबिट कार्ड पेमेंट पर लगने वाले चार्जेस भी कम होंगे। रिजर्व बैंक इस दिशा में काम कर रहा है। अभी पेमेंट्स एंड सेटलमेंट एक्ट के तहत रिजर्व बैंक ने एक हजार रुपए के डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर एमडीआर 0.25 फीसदी तय किया है, जबकि 2000 रुपए तक के ट्रांजैक्शन पर यह 0.50 फीसदी तय किया गया है। 2000 रुपए से अधिक के ट्रांजैक्शन पर चार्ज तय करने का कार्य चल रहा है और यह जल्द ही पूरा होगा।
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अभी जो अंतरिम व्यवस्था बनी है, उसमें पेट्रोल पंपों पर डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर लगने वाला शुल्क तेल कंपनियों द्वारा वहन किया जा रहा है। जहां तक क्रेडिट कार्ड की बात है तो उसमें शुल्क का भुगतान ग्राहकों को ही करना होगा क्योंकि क्रेडिट कार्ड में खरीदारी उधारी में होती है और उसमें ग्राहकों को कुछ अवधि के अंदर भुगतान करने की छूट मिलती है।