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नोटबंदी से आर्थिक विकास की गति हुई धीमी: मनमोहन सिंह
amarujala.com- Submitted by: मुकेश झा
Updated Tue, 06 Jun 2017 10:28 PM IST
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- फोटो : self
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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मंगलवार को कहा कि देश का विकास धीमा पड़ा है जिसका मुख्य कारण नोटबंदी है और अर्थव्यवस्था केवल सार्वजनिक व्यय के इंजन पर चल रही है। उन्होंने स्थिति विशेषकर रोजगार सृजन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर गहरी चिंता जताई। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी नोटबंदी की असफलता और देश के आर्थिक विकास दर प्रभावित होने पर चर्चा की।
पूर्व पीएम सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में अपने संबोधन में आर्थिक विकास में आई गिरावट पर चिंता जताई जो गत तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में झलक रही है। सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मनमोहन ने कहा, ‘भारत के गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2016-17 के जीडीपी आंकड़े कुछ दिन पहले जारी किए गए।
नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी घोषणा के कारण भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है।’ उन्होंने कहा, ‘आर्थिक गतिविधियों को बताने वाला वास्तविक उप माप सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में भारी और निरंतर कमी आई है। निजी क्षेत्र का निवेश ध्वस्त हो गया है तथा अर्थव्यवस्था एकमात्र सार्वजनिक व्यय के इंजन पर चल रही है। उद्योगों का जीवीए जो मार्च 2016 में 10.7 प्रतिशत था वह मार्च 2017 में घटकर 3.8 प्रतिशत रह गया। इसमें करीब सात प्रतिशत की गिरावट आई।’ पूर्व प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन को सबसे चिंताजनक पहलू बताया।
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पूर्व पीएम सिंह ने मंगलवार को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में अपने संबोधन में आर्थिक विकास में आई गिरावट पर चिंता जताई जो गत तिमाही के जीडीपी आंकड़ों में झलक रही है। सोनिया गांधी के आवास पर हुई कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में मनमोहन ने कहा, ‘भारत के गत वित्त वर्ष की चौथी तिमाही और पूरे वित्त वर्ष 2016-17 के जीडीपी आंकड़े कुछ दिन पहले जारी किए गए।
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नवंबर 2016 में की गई नोटबंदी घोषणा के कारण भारत के आर्थिक विकास में भारी गिरावट आई है।’ उन्होंने कहा, ‘आर्थिक गतिविधियों को बताने वाला वास्तविक उप माप सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में भारी और निरंतर कमी आई है। निजी क्षेत्र का निवेश ध्वस्त हो गया है तथा अर्थव्यवस्था एकमात्र सार्वजनिक व्यय के इंजन पर चल रही है। उद्योगों का जीवीए जो मार्च 2016 में 10.7 प्रतिशत था वह मार्च 2017 में घटकर 3.8 प्रतिशत रह गया। इसमें करीब सात प्रतिशत की गिरावट आई।’ पूर्व प्रधानमंत्री ने रोजगार सृजन को सबसे चिंताजनक पहलू बताया।
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