सात महीने के उच्च स्तर पर जा सकती है महंगाई दर, सब्जियों के बढ़ते दाम ने बजाया बैंड
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महंगाई दर पिछले सात महीने के उच्च स्तर पर जा सकती है। अक्टूबर महीने के लिए महंगाई दर में बढ़ोतरी की आशंका की जा रही है, क्योंकि सब्जियों के दाम सबसे ज्यादा थे। कई राज्यों में बारिश के चलते फसल खराब हो गई थी, जिसके चलते देश भर में प्याज-टमाटर सहित अन्य सब्जियों के भाव अपने उच्चतम स्तर पर चले गए थे।
महंगाई दर के बढ़ने से नहीं मिलेगा यह फायदा
रायटर्स द्वारा किए गए एक पोल के मुताबिक, अगर रिटेल और खुदरा महंगाई दर में तेजी रहती है तो फिर रिजर्व बैंक भी दिसंबर में अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। महंगाई दर का डाटा 13 नवंबर को जारी किया जाएगा।
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इस बार इतनी हो सकती है महंगाई दर
इकोनॉमिक एक्सपर्ट के मुताबिक इस बार महंगाई दर 3.46 फीसदी तक जा सकती है, जो कि मार्च के बाद सबसे ज्यादा होगी। इसमें पेट्रोल-डीजल के बढ़ते रेट भी एक बड़ा कारण बनेंगे। कच्चे तेल के चलते अभी इनके दाम लगातार बढ़ते रहेंगे और हाल-फिलहाल इसमें किसी तरह का कोई फायदा मिलने की उम्मीद नहीं है।
सिंतबर में यह थी महंगाई दर
खाद्य सामग्रियों और खास कर सब्जियों की कीमतें घटने से थोक महंगाई दर सितंबर में घटकर 2.60 फीसदी दर्ज की गई। एक महीने पहले अगस्त में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित महंगाई दर बढ़कर चार महीने के ऊपरी स्तर 3.24 फीसदी पर पहुंच गई थी। एक साल पहले सितंबर 2016 में थोक महंगाई दर 1.36 फीसदी पर थी।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) की सेंट्रल मॉनेटरी कमेटी ने 7 अक्टूबर को मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए रेपो रेट में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया था। इससे लोगों को दिवाली पर सस्ती ईएमआई का गिफ्ट नहीं मिला था।
आरबीआई के गर्वनर उर्जित पटेल की अध्यक्षता में बनी एमपीसी ने घोषणा करते हुए कहा था कि महंगाई दर अपने उच्च स्तर पर है, जिसकी वजह से रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।
रेपो रेट को 6 फीसदी पर रखा गया है। बैंक रेट और एमएसएफ रेट 6.25 फीसदी पर बरकरार रहेगा। हालांकि आरबीआई ने एसएलआर 0.5 फीसदी घटाकर 19.5 फीसदी किया है। आरबीआई की अगली क्रेडिट पॉलिसी 5-6 दिसंबर के दौरान होगी।