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पहली छमाही में ही केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बजट के सालाना अनुमान से ऊपर निकला
Fri, 30 Oct 2020 12:14 AM IST
Kuldeep Singh
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Fri, 30 Oct 2020 12:14 AM IST
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Ministry of Finance
- फोटो : फाइल फोटो
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केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा पहली छमाही में ही वार्षिक अनुमान से ऊपर पहुंच गया है। राजस्व प्राप्ति कम रहने से सितंबर में समाप्त छह माह में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान के 114.8 प्रतिशत तक पहुंच गया।
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कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन की पहली तिमाही में आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं हैं। यही वजह है कि वर्ष की पहली छमाही में राजस्व प्राप्ति भी प्रभावित हुई और राजकोषीय घाटा 9.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। बजट में 2020-21 में राजकोषीय घाटे के 7.96 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया है।
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केंद्र सरकार के महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा जारी किए गये आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष 2020-21 की अप्रैल से सितंबर अवधि के दौरान केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 9,13,993 करोड़ रुपये रहा है। जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 92.6 प्रतिशत था पर इस वर्ष यह 114.8 प्रतिशत पर पहुंच गया।
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केंद्र सरकार को मिलने वाले कुल राजस्व और उसके कुल खर्च के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है। इस साल जुलाई में ही राजकोषीय घाटा वार्षिक अनुमान के बराबर पहुंच गया था।
इस वित्त वर्ष में सितंबर तक सरकार को कुल 4,58,508 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। यह राशि अनुमानित वार्षिक राजस्व का 25.18 प्रतिशत रही है। पिछले वित्त वर्ष में सितंबर तक यह प्राप्ति वार्षिक अनुमान का 40.2 प्रतिशत रही थी।
केंद्र सरकार के महालेखा नियंत्रक के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर माह तक प्राप्त राजस्व में केंद्र को शुद्ध रूप से 4,58,508 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई। इसमें से 92,274 करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व और 14,635 करोड़ रुपये गैर- ऋण पूंजी प्राप्त हुई। गैर-ऋण पूंजी प्राप्ति में 8,854 करोड़ रुपये कर्ज वसूली और 5,781 करोड़ रुपये विनिवेश प्राप्ति के रूप में मिले।
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी विज्ञप्ति में महालेखा नियंत्रक (सीजीए) के आंकड़ों को दिया गया है। इसमें कहा गया है कि सितंबर तक केंद्रीय कर में राज्यों को उनके हिस्से के रूप में 2,59,941 करोड़ रुपये जारी किये गये। यह राशि पिछले साल के मुकाबले 51,277 करोड़ रुपये कम रही है।