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GST से महंगे हुए पटाखे, NCR में बैन से प्रभावित होगा हजार करोड़ का कारोबार

Tue, 10 Oct 2017 10:32 AM IST
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल
amarujala.com- Written by: अनंत पालीवाल Updated Tue, 10 Oct 2017 10:32 AM IST
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gst, supreme court ban in delhi-ncr affects fire cracker business
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पटाखों पर सोमवार को बैन लगाने से पहले इनके दाम पूरे देश में बढ़ गए थे। पूरे देश में दिवाली से पहले करीब 7 हजार करोड़ का कारोबार होता है। वहीं बैन लगने से अकेले दिल्ली-एनसीआर में एक हजार करोड़ का कारोबार प्रभावित होने की आशंका है। 
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जीएसटी के दायरे में आई पटाखों की बिक्री
इस साल से पटाखों को भी जीएसटी के दायरे में आ गई है। पटाखों को 28 फीसदी स्लैब में रखा गया है। इस वजह से पिछले वर्ष की तुलना में पटाखे महंगे हो गए हैं। पटाखों के महंगा होने की वजह से इस बार थोक व्यापारी पहले से ही कम बिक्री से परेशान थे, वहीं दिल्ली-एनसीआर में बैन लगने से इसको काफी नुकसान होगा। 
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पढ़ें- SC के आदेश से दिवाली के पटाखे फुस्स, व्यापारियों का निकला दिवाला
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दिल्ली-एनसीआर के पटाखा विक्रेताओं के वकील ने पिछले साल नवंबर के आदेश को बहाल करने का विरोध करते हुए कहा कि 12 सितंबर का सुप्रीम कोर्ट का आदेश सीपीसीबी सहित सभी पक्षों को सुनने के बाद दिया गया था। इसलिए उसे बदलने की जरूरत नहीं है। हालांकि पटाखों से हवा की गुणवत्ता खराब होती है लेकिन, यह पार्टीकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 के बढ़ने के पीछे मुख्य वजह नहीं है।

इन शहरों में पड़ेगा असर
प्रदूषण के बढ़े हुए स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस दिवाली दिल्ली एनसीआर में पटाखों की बिक्री पर रोक लगा दी है। इससे गुरुग्राम के पटाखा गोदाम मालिकों में हलचल मच गई है। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद यह दीवाली बिन पटाखे फीकी बीतेगी।

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में करीब 180 दुकानें लगाई जाती हैं। दुकानों पर 2 से 5 लाख का माल रहता था। इसी तरह फुटकर व्यापारी दादरी, जेवर, रबूपुरा, भंगेल, सलारपुर और बिलासपुर आदि जगहों पर पटाखा की दुकानें लगाते हैं। 

फरीदाबाद एवं बल्लभगढ़ के पटाखा विक्रेताओं को 30 करोड़ रुपये का झटका लगा है। पटाखा कारोबारियों ने दुकानें लगाने के लिए स्टॉक मंगाकर रख लिया है। अब 31 अक्तूबर तक रोक लगने के कारण व्यापारियों की उम्मीदों को तगड़ा झटका लगा है।


दिल्ली सदर बाजार पटाखा एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने यदि रोक लगानी ही थी, तो एक माह पहले लाइसेंस रिन्यू करवाने की इजाजत क्यों दी। सदर बाजार में हर वर्ष 74 दुकानदारों को लाइसेंस मिलता है, जबकि इस बार मात्र 24 दुकानदारों को मिला है। इनमें से ऐसे दुकानदार ज्यादा हैं, जो एक माह के लिए किराये की दुकान लेकर पटाखों का स्टॉक भरते हैं।

शिवकासी में भी दिखा असर
तमिलनाडु के शिवकासी से ही पूरे देश में पटाखों की सप्लाई की जाती है। पटाखों के लिए शिवकासी को गढ़ माना जाता है। पूरे देश में 85 फीसदी बिक्री यहीं से होती है। करीब 3 लाख लोग यहां पर पटाखे बनाने के कारोबार से जुड़े हुए हैं। वहीं 5 लाख लोग सप्लाई और पेपर प्रिंटिंग से जुड़े हैं। शिवकासी में लोगों को आशंका है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन अन्य शहरों में भी हो सकता है, जहां प्रदूषण की समस्या है। 
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