जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ के पार, वसूली बढ़ने से काबू में आएगा राजकोषीय घाटा
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ताजा जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार नवंबर महीने में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत हुआ 1.03 लाख करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह हुआ। इसमें केंद्रीय जीएसटी का हिस्सा 19,592 करोड़ रुपये जबकि राज्य जीएसटी 27,144 करोड़ रुपये हिस्सा रहा। एकीकृत माल और सेवा कर के रूप में 49,028 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। उपकर के रूप में 7,727 करोड़ रुपये मिले।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस बार नवंबर में केंद्रीय जीएसटी से वसूली 19,592 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी से 27,144 करोड़ रुपये, एकीकृत जीएसटी से 49,028 करोड़ रुपये और जीएसटी उपकर से वसूली 7,727 करोड़ रुपये रही। एकीकृत जीएसटी में से 20,948 करोड़ रुपये आयात से वसूल हुए। इसी तरह उपकर की वसूली में 869 करोड़ रुपये आयातित माल पर उपकर से प्राप्त हुए।
इससे पहले सितंबर और अक्तूबर महीने में जीएसटी संग्रह में सालाना आधार पर गिरावट आई थी। बयान में कहा गया कि नवंबर में घरेलू लेन-देन पर जीएसटी संग्रह में 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यह इस साल जीएसटी राजस्व में सबसे अच्छी मासिक वृद्धि है।
Gross GST Revenue collection for November, 2019 is Rs 1,03,492 crore. CGST collection is Rs 19,592 crore, SGST is Rs 27,144 crore, IGST is Rs 49,028 crore (including Rs 20,948 crore collected on imports) and Cess is Rs 7,727 crore (including Rs 869 crore collected on imports). pic.twitter.com/LOmkQbW6gU
— ANI (@ANI) December 1, 2019
जीएसटी वसूली बढ़ने से राजकोषीय स्तर पर सरकार को मिलेगा सहारा
तीन महीने के अंतराल के बाद नवंबर में एक बार फिर जीएसटी वसूली 1 लाख करोड़ रुपये के पार जाने से सरकार को राजकोषीय स्तर पर राहत मिलेगी। नवंबर में ही देश का राजकोषीय घाटा बजट में तय लक्ष्य का 102 फीसदी पहुंच चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्व में बढ़ोतरी होने पर सरकार के पास खर्च के लिए ज्यादा पैसे होंगे, जो विकास को गति देने में मददगार होंगे।
गौरतलब है कि त्योहारी सीजन की वजह से नवंबर में 1.02 लाख करोड़ रुपये की जीएसटी वसूली हुई, जो जुलाई के बाद पहली बार 1 लाख करोड़ के लक्ष्य के पार गई है। डेलॉय इंडिया के पार्टनर एमएस मणि का कहना है कि जीएसटी वसूली में इजाफा बाजार धारणा में सुधार को दर्शाता है। अगर यह बढ़ोतरी आने वाले महीनों में भी जारी रहती है, तो इससे राजकोषीय घाटे पर काबू पाने में सरकार को काफी मदद मिलेगी।
घाटे नहीं खर्च पर ध्यान दे सरकार : सेन
भारत के पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रणब सेन का कहना है कि सरकार को अभी राजकोषीय घाटे पर ध्यान देने के बजाए खर्च और खपत बढ़ाने पर जोर देना चाहिए। सेन ने कहा कि असली समस्या खपत के मोर्चे पर है, जिसे बढ़ाने के लिए लोगों के हाथ में पैसे चाहिए। सरकार को आरबीआई से कहना चाहिए कि वह बॉन्ड की खरीदारी करे, ताकि नए बॉन्ड जारी किए जा सकें। यह काम 3.4 फीसदी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य के साथ पूरा नहीं होगा, बल्कि इसकी समीक्षा करनी पड़ेगी