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एंड्रॉइड के बल पर बाजार में एकाधिकार कायम कर रहा गूगल

Tue, 09 Jul 2019 06:25 AM IST
Avdhesh Kumar बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 09 Jul 2019 06:25 AM IST
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Google monitors monopoly market on Android
google
गूगल द्वारा अपने एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम के बल पर मोबाइल फोन कंपनियों को प्रभाव में लेने और अपने एप व सेवाएं फोन में पहले से इंस्टॉल करवाने के आरोपों की विस्तृत जांच के आदेश भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने दिए हैं। खास बात है कि सीसीआई के ही दो शोधकर्ताओं और एक अन्य एलएलबी स्टूडेंट ने यह एकाधिकार व्यापार विरोधी मामला सीसीआई में उठाया है। 
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इसके अनुसार बाजार में एकाधिकार बनाए रखने के लिए गूगल ऐसा कर रहा है। इसी प्रकार के एक मामले में यूरोप में पिछले वर्ष गूगल पर ही करीब 500 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगाया गया था। हालांकि जांच के यह आदेश सीसीआई ने अप्रैल में दिए थे, लेकिन हाल ही में आदेश सार्वजनिक होने पर मामला सामने आया।
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सीसीआई में इस मामले को यहां रिसर्च एसोसिएट उमर जावीद और सुकर्मा थापर व कश्मीर यूनिवर्सिटी के लॉ स्टूडेंट आकिब द्वारा उठाया गया। उन्होंने अल्फाबेट इंक की गूगल एलएलसी और इसकी भारतीय यूनिट को प्रतिवादी बनाया है। तीनों नवयुवा हैं और फिलहाल उन्होंने मामले पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं की है। 
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हालांकि सीसीआई में रहते हुए एकाधिकार व्यापार विरोधी केस दर्ज करने पर एक वेबसाइट पर यूजर द्वारा पूछे गए सवाल पर उमर जावीद ने उदाहरण में कहा कि एक पुलिस अधिकारी को क्या इसलिए केस दर्ज करने से रोका जा सकता है कि वह खुद पुलिस में है? सीसीआई के ही अध्ययनकर्ताओं द्वारा इस प्रकार के मामले को उठाने को भूतपूर्व लेकिन स्वीकार्य कहा जा रहा है। 

सीसीआई के पूर्व सदस्य एसएल बुनकर ने इस कदम को सराहनीय बताया और कहा कि मामले की प्रगति पर नजर रखी जानी चाहिए, इसका दुनिया भर में असर होगा। खुद सीसीआई ने कोई बयान नहीं दिया है, न ही गूगल ने कोई जवाब दिया है। हालांकि सीसीआई ने प्राथमिक जांच के बाद विस्तृत जांच के लिए आदेश दे दिए हैं। 

आरोप साबित होते हैं तो गूगल पर इस बार कितना जुर्माना लगाया जा सकता है, यह अभी साफ नहीं है। गूगल की भारतीय यूनिट ने वित्त वर्ष 2018 में भारत से 7040 हजार करोड़ का कारोबार किया था।

पहले भी भारत में 136 करोड़, यूरोप में 34 हजार करोड़ रुपये के लगे जुर्माने

भारत में इस प्रकार के मामले को एक फर्म ने सीसीआई में उठाया था। इस पर फरवरी 2018 में गूगल पर 136 करोड़ रुपये का जुर्माना लगा था। हालांकि इसके खिलाफ उसने अपील की है। वहीं बाजार में एकाधिकार के लिए फोन निर्माता कंपनियों को एंड्रॉइड पर गूगल के एप पहले से इंस्टॉल करवाने के मामले में यूरोपीय संघ भी गूगल पर 500 करोड़ डॉलर का जुर्माना लगा चुका है। इसी मामले को मौजूदा केस का आधार बनाया गया है।

मामले को ऐसे समझें

सीसीआई ने 14 पेज के आदेश में जो कहा, उसके मायने यह हैं कि मोबाइल फोन को चलाने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम एंड्रॉइड फोन निर्माता कंपनियों को देता है, और साथ में अपने कई एप्लीकेशन भी इन फोन में पहले से इंस्टॉल करवाता है। इनमें गूगल सर्च, क्रोम ब्राउजर, गूगल प्ले स्टोर आदि शामिल हैं। 

इसका नुकसान यह है कि मोबाइल निर्माता कंपनियां दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम को अपनाने के बारे में सोच भी नहीं पातीं। इस प्रकार, गूगल का एकाधिकार बढ़ता चला जाता है। इसे भारतीय कानूनों के अनुसार गैर-वाजिब माना गया है।

फैक्ट्स
- 88 प्रतिशत फोन विश्व में एंड्रॉइड पर चल रहे
- 99 प्रतिशत फोन जो भारत में पिछले वर्ष बेचे गए वे भी एंड्रॉइड पर हैं
- 150 दिन में जांच पूरी करने के आदेश सीसीआई ने दिए हैं
- किसी गूगल अधिकारी की भूमिका की भी जांच होगी
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