फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Gas-based power generation will be cheaper

आज का साक्षात्कार : गैस आधारित बनें कोयला वाले बिजलीघर 

Mon, 10 Jun 2019 03:18 AM IST
Avdhesh Kumar बीसी त्रिपाठी, सीएमडी, गेल इंडिया लिमिटेड
बीसी त्रिपाठी, सीएमडी, गेल इंडिया लिमिटेड Published by: Avdhesh Kumar Updated Mon, 10 Jun 2019 03:18 AM IST
विज्ञापन
Gas-based power generation will be cheaper
बीसी त्रिपाठी (फाइल फोटो)
सिटी गैस परियोजना में सरकार की महारत्न कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इस समय गेल अपनी अनुषंगी इकाइयों और साझेदार कंपनियों के जरिए गैस वितरण में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी निभा रही है। इसे अगले कुछ साल में 75 फीसदी करने का लक्ष्य है। कंपनी की भविष्य की परियोजनाओं पर अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने गेल के सीएमडी बीसी त्रिपाठी से बातचीत की। पेश है अंश : 
विज्ञापन


प्रश्न- सरकार ऊर्जा के मामले में भारत को गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है। इसमें गेल का क्या योगदान है?

उत्तर- भारत को गैस पर आधारित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में गेल महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वर्तमान में हमारी करीब 11,500 किलोमीटर की पाइपलाइन की परियोजना पूर्ण हो चुकी है। करीब 6,000 किलोमीटर की पाइपलाइन परियोजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना का काम काफी तेजी से हो रहा है। कई परियोजनाएं पूर्ण होने की कगार पर हैं। 
विज्ञापन


इससे देश के अधिकतर हिस्सों में हाई प्रेशर गैस की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। इससे औद्योगिक, व्यावसायिक और घरेलू तीनों श्रेणी के ग्राहकों की आवश्यकता की पूर्ति हो सकेगी। इससे बिजलीघरों, लोहा इस्पात उद्योग और रासायनिक उर्वरक उद्योग को कोयले के बदले गैस पर शिफ्ट होने में मदद मिलेगी। इसके अलावा घरों में पाइप से आपूर्ति होने वाले गैस पीएनजी और मोटर वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन



प्रश्न- सिटी गैस परियोजनाओं में गेल की क्या भागीदारी है?

उत्तर- घरेलू गैस परियोजनाओं में हमारी स्थिति काफी बेहतर है। यदि हम अपनी, अपने अनुषंगी उपक्रमों और साझेदारी वाली परियोजनाओं को जोड़ दें तो इस समय करीब 60 फीसदी परियोजनाएं गेल से ही जुड़ी हैं। आने वाले समय में हम इसे 75 फीसदी तक पहुंचाना चाहते हैं। हम बंगलूरू, वाराणसी, पटना, रांची, जमशेदपुर, बोकारो, भुवनेश्वर, कटक और कोलकाता आदि में अपना कारोबार फैला रहे हैं। 

इस विकास में गेल की इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड और महानगर गैस लिमिटेड जैसी कंपनियां बड़ी भागीदारी निभाएंगी। अभी सिर्फ इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड ही करीब दो लाख घरों तक पीएनजी की पहुंच बना चुकी है, जबकि महानगर गैस लिमिटेड की पहुंच करीब डेढ़ लाख घरों तक हो चुकी है। देखा जाए तो आठ लाख कनेक्शन में दिल्ली-मुंबई का योगदान करीब 3.5 लाख का है।

प्रश्न- देश में बिजली बनाने में गैस की भागीदारी अब भी काफी कम है। इसे कैसे बढ़ाया जा सकता है?

उत्तर- आपने सही कहा... इस समय बिजली बनाने में महज छह फीसदी ही गैस का उपयोग हो रहा है। दुनिया के अन्य देशों में इसकी हिस्सेदारी 24 फीसदी है। भारत में भी यदि सही तरीके से काम हो तो इसकी हिस्सेदारी को बढ़ाकर 15 फीसदी तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। आप देखें तो अब भी भारत में अधिकतर बिजलीघर कोयले का ही इस्तेमाल कर रहे हैं। इस वजह से पर्यावरण भी काफी दूषित हो रहा है। 

स्वच्छ ऊर्जा के लिए अक्षय ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन यदि कोयले वाले बिजलीघरों को गैस में बदल दिया जाए तो वह बेहतर होगा। इससे उन बिजलीघरों में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी भी चलती रहेगी और सभी मौसम में हर वक्त बिजली की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित हो सकेगी। अक्षय ऊर्जा के स्रोतों में देखें तो सौर ऊर्जा से दिन में ही कुछ घंटे ही बिजली मिल सकती है। पवन ऊर्जा में भी हवा चलने पर ही बिजली बन सकती है। जल विद्युत में भी जब तक डैम में पानी रहेगा, तभी तक आप बिजली बना सकते हैं।

प्रश्न- अगर हर क्षेत्र में गैस का ही इस्तेमाल होने लगे तो इतनी अधिक मात्रा में गैस की आपूर्ति कैसे होगी? 

उत्तर- इसमें परेशानी की कोई बात नहीं है। अधिक मात्रा में गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आयात करना होगा। अब भी घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति नहीं है। कुल खपत में करीब 50 फीसदी गैस घरेलू स्रोतों से मिल पाती है और बाकी का आयात करना पड़ता है। यदि यहां गैस की खपत बढ़ने से इसका आयात बढ़ाना पड़ता है तो भी यह कोयले के मुकाबले सस्ता पड़ेगा और बेहतर होगा।

प्रश्न- विभिन्न परियोजनाओं के लिए पूंजीगत व्यय का क्या लक्ष्य है?

उत्तर- इस समय हमारा पूंजीगत व्यय करीब 50 हजार करोड़ रुपये का है। इनमें से 35,000 करोड़ रुपये तो सिर्फ पाइपलाइन की परियोजना के लिए ही है। हमारी इन परियोजनाओं के पूर्ण हो जाने के बाद उत्तराखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में भी गैस की आपूर्ति होने लगेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed