यूपीए के 10 सालों में आया 770 अरब डॉलर का कालाधन, रिपोर्ट की जानकारी देने से वित्त मंत्रालय का इंकार
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2005-14 के बीच (यूपीए सरकार के 10 साल का कार्यकाल) में कुल 770 अरब का कालाधन भारत में आया था, लेकिन वित्त मंत्रालय ने संसद की गोपनीयता भंग होने की संभावना के चलते इस तरह की रिपोर्ट को जारी करने से साफ इंकार कर दिया है।
कांग्रेस के कार्यकाल में बने थे तीन कमीशन
कांग्रेस सरकार ने 2011 में काला धन का पता लगाने के लिए तीन अलग-अलग संस्थानों से रिपोर्ट तैयार करने को कहा था, जिन्होंने 30 दिसंबर 2013, 18 जुलाई 2014 और 21 अगस्त 2014 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। यह तीन कमीशन दिल्ली स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी, नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च व फरीदाबाद स्थित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट हैं।
केंद्र ने दिया यह तर्क
केंद्र सरकार ने इन तीनों रिपोर्टों को सार्वजनिक करने से पूरी तरह से इंकार कर दिया है। सरकार ने कहा है कि उसने यह रिपोर्ट पिछले साल 21 जुलाई को संसद में वित्त मामलों के लिए बनी स्टैंडिंग कमेटी को सौंप दी थी। अभी यह रिपोर्ट स्टैंडिंग कमेटी के पास विचाराधीन है, जिसके चलते इसके बारे में किसी तरह की जानकारी नहीं दी जा सकती है।
अमेरिका के इस संस्थान ने किया आकलन
हालांकि अमेरिका स्थित ग्लोबल फाइनेंशियल इंटेग्रिटी नामक थिंक टैंक के अनुसार भारत में 2005-14 के बीच भारत में करीब 770 अरब डॉलर का काला धन आया, जबकि 165 अरब डॉलर का कालाधन देश से बाहर गया। हालांकि यह केवल एक आकलन है और सरकार की तरफ से इस बात की पुष्टि नहीं की गई है।
भारतीयों का दोगुना हुआ है स्विस बैंक में धन
स्विस नेशनल बैंक की तरफ से हाल ही में बताया गया था कि वहां के बैंकों में वर्ष 2017 में भारतीयों की जमा राशि में 50 फीसदी यानी करीब दो गुना इजाफा हुआ है। अधिकृत तौर पर वहां भारतीय लोगों की जमा राशि करीब 7,000 करोड़ रुपये हो गई है। हालांकि आंकड़ों के मुताबिक, स्विस बैंक में जमा विदेशी धन में केवल 0.07 फीसदी धन ही भारतीयों का है।
दूसरे देशों के जरिए जाने वाले भारतीय पैसे की जानकारी नहीं
स्विस नेशनल बैंक के आंकड़ों में वो पैसा शामिल नहीं था, जो भारतीय लोगों ने अन्य देशों में शैल (फर्जी) कंपनियां खोलकर उनके जरिए वहां जमा कराया है। बता दें कि जांच एजेंसियों का कहना है भारतीय अपना काला धन दूसरे देशों में घुमाकर मल्टीपल लेयर प्रणाली के जरिए स्विस बैंक तक पहुंचाते हैं।
अगले साल से काला धन छिपाना होगा बंद
स्विट्जरलैंड ने भारत समेत अन्य देशों को उनके यहां से आने वाले पैसे की अपने आप जानकारी देने का फ्रेमवर्क तैयार कर लिया है। इसके चलते अगले साल से भारत को अपने देश से आने वाले पैसे का ऑटोमैटिक डाटा मिलना शुरू हो जाएगा, जिससे काला धन छिपाना असंभव हो जाएगा।
निष्क्रिय खातों में एक देहरादून का
स्विस बैंक में 6 निष्क्रिय घोषित भारतीय खातों में से एक देहरादून के बहादुरचंद्र सिंह का है, जबकि दो खातेदारों पियरे वाचक व बर्नेट रोजमैरी का बंबई (अब मुंबई) का बताया गया है। अन्य तीन में पेरिस निवासी डॉक्टर मोहनलाल, लंदन निवासी एसवाई प्रभुदास और अज्ञात पते वाले किशोरी लाल शामिल हैं।