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जीएसटी 86,449 करोड़ रही अगस्त में, विनिर्माण पीएमआई 52 पहुंचा सूचकांक
Wed, 02 Sep 2020 03:13 AM IST
गौरव पाण्डेय
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Wed, 02 Sep 2020 03:13 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : iStock
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पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर रिकॉर्ड नीचे जाने के बाद सरकार को अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर कुछ राहत मिली है। अगस्त में विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आने के साथ घरेलू बाजार में वाहनों की बिक्री ने भी जोर पकड़ा है। कई राज्यों के कुछ हिस्सोें में लॉकडाउन से जीएसटी वसूली पर असर तो पड़ा लेकिन संतोषजनक रही है।
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वित्त मंत्रालय ने बताया कि अगस्त में कुल जीएसटी संग्रह 86,449 करोड़ रुपये रहा, जो जुलाई में 87,422 करोड़ था। सालाना आधार पर देखा जाए तो अगस्त की जीएसटी वसूली पिछले साल की समान अवधि का 88 फीसदी रही। अगस्त, 2019 में 98,202 करोड़ जीएसटी संग्रह हुआ था। इस साल अगस्त में आए कुल जीएसटी राजस्व में केंद्र के हिस्से 15,906 करोड़ और राज्यों के हिस्से 21,064 करोड़ आया। राज्य-केंद्र की संयुक्त हिस्सेदारी वाले एकीकृत जीएसटी के तहत 42,264 करोड़ की वसूली हुई, जिसमें 19,179 करोड़ आयात शुल्क के रूप में है। इसके अलावा 7,215 करोड़ का सेस भी प्राप्त हुआ है। आईजीएसटी में से 18,216 करोड़ रुपये केंद्र को मिलेंगे जबकि 14,650 करोड़ रुपये राज्यों को दिए जाएंगे।
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वहीं, आईएचएस मार्किट ने अगस्त में विनिर्माण गतिविधियों का सूचकांक 52 अंक के साथ सकारात्मक रखा है। जुलाई में विनिर्माण पीएमआई 46 था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग और खपत में इजाफा होने की वजह से विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आई है।
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चार महीने बाद संभला विनिर्माण क्षेत्र
आईएचएस मार्किट के अनुसार, अप्रैल में लॉकडाउन के बाद से विनिर्माण गतिविधियां सुस्त चल रही थीं। अगस्त में चार महीने बाद एक बाद फिर जोर पकड़ा है। इससे पहले अप्रैल में विनिर्माण पीएमआई 27.4, मई में 30.8, जून में 47.2 और जुलाई में 46 रहा था। इससे पहले यह सूचकांक लगातार 32 महीने तक 50 से ऊपर बना रहा। विनिर्माण पीएमआई 50 से ऊपर रहना क्षेत्र के विस्तार और 50 से नीचे आना गिरावट को दर्शाता है। आईएचएस मार्किट की अर्थशास्त्री श्रेया पटेल ने कहा, दूसरी तिमाही से मांग में इजाफा होने से विनिर्माण क्षेत्र में फिर तेजी आनी शुरू हो गई है। घरेलू बाजार में खपत बढ़ रही है, जिससे विनिर्माण इकाइयों को नए ऑर्डर मिलने शुरू हो गए हैं। उम्मीद है कि रोजगार सृजन के मोर्चे पर भी राहत मिलेगी। हालांकि, महामारी की वजह से डिलीवरी में अभी ज्यादा समय लग रहा है।
कच्चे माल की कीमत बनी चुनौती
रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और माल ढुलाई में आ रही दिक्कतें अब भी विनिर्माण क्षेत्र के लिए चुनौती बनी हुई हैं। इससे इकाइयों की लागत बढ़ जाती है और मुनाफे पर असर पड़ रहा है। हालांकि, अगले 12 महीनों में क्षेत्र एक बार फिर पूर्ण सुधार के साथ तेजी की राह पर होगा।
उर्जा खपत अगस्त में पिछले साल के बराबर
ऊर्जा क्षेत्र से भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं। अगस्त में कुल ऊर्जा खपत 110.57 अरब यूनिट रहा, जो पिछले की समान अवधि से महज 0.85 फीसदी कम है। अगस्त, 2019 में 111.52 अरब यूनिट बिजली की खपत हुई थी। ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि लॉकडाउन में लगातार दी जा रही ढील के बाद बिजली खपत में सामान्य स्तर पर पहुंच रही है। औद्योगिक इकाइयां शुरू होने से मांग लगातार बढ़ रही, जो जून में 10.93 फीसदी और जुलाई में 3.6 फीसदी कम थी।