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आम बजट 2020 : भारी सरकारी खर्च से अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार, 10% होगी विकास दर

Sun, 02 Feb 2020 04:47 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 02 Feb 2020 04:47 AM IST
सार

  • 2024-25 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य के लिए सरकार का बड़ा दांव
  • बढ़ाएगी खर्च और लेगी ज्यादा कर्ज, राज कोषीय घाटे में भी की 0.50% की बढ़ोतरी
  • 2020-21 में 22.46 लाख करोड़ होगी आय, लेकिन 30.42 लाख करोड़ होगा खर्च

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Economy boost up by heavy government spending, 10 percent growth rate
Nirmala Sitharaman - फोटो : PTI

विस्तार

सरकार वित्त वर्ष 2020-21 में अर्थव्यवस्था को लेकर खासी जोश में है। इस क्रम में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में वित्त वर्ष 2020-21 में देश की नॉमिनल (सांकेतिक) जीडीपी विकास दर 10 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया है।

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सरकार ने शनिवार को पेश बजट में 22.46 लाख करोड़ रुपये की आय की तुलना में खर्च के लिए 30.42 लाख करोड़ रुपये का भारी भरकम आवंटन किया है। नॉमिनल जीडीपी तत्कालीन बाजार मूल्य पर आधारित होती है।
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वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2019-20 में अनुमानित रूप से 26.99 लाख करोड़ रुपये का खर्च होगा और आय 19.32 लाख रुपये रहेगी। इसकी तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार ने खर्च बढ़ाकर 30.42 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव किया है, जबकि 22.46 लाख करोड़ रुपये आय की उम्मीद जाहिर की है।
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भारी खर्च के चलते सरकार कर्ज बढ़ाने को भी मजबूर होगी। इस क्रम में सरकार ने 2020-21 में 5.36 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का प्रस्ताव किया है, जबकि 2019-20 में 4.99 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने की उम्मीद है।

सरकार को आर्थिक सुधारों से आगे अच्छा फायदा मिलने की उम्मीद

सीतारमण ने कहा, सरकार का अनुमान है कि जीएसटी जैसे कर सुधारों के चलते कर संग्रह बढ़ोतरी में अभी वक्त लग सकता है और हाल में कंपनी कर में कटौती से भी सरकार को अल्पावधि में बड़ा राजस्व घाटा हुआ है।

सरकार को आर्थिक सुधारों से आगे अच्छा फायदा मिलने की उम्मीद है। वित्तमंत्री ने कहा कि सरकार ने 15वें वित्त आयोग की अंतरिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली है और अंतिम रिपोर्ट बाद में जमा की जाएगी।

राजकोषीय घाटे पर बढ़ेगा दबाव

2019-20 में सरकारी खर्च बढ़ने और राजस्व संग्रह में कटौती से सरकार राजकोषीय घाटे के 3.3 फीसदी के लक्ष्य से बड़े अंतर से चूक सकती हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार ने इसके 3.8 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया है। वित्तमंत्री ने कहा, 2019-20 में राजकोषीय घाटा 3.8 फीसदी (संशोधित अनुमान) रहने का अनुमान है और 2020-21 में यह 3.5 फीसदी रह सकता है।

सरकार ने इसके लिए वित्तीय दायित्व और बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) अधिनियम के अंतर्गत ‘एस्केप क्लॉज’ का इस्तेमाल किया है, जो मुश्किल दौर में राजकोषीय घाटा बढ़ाने की स्वतंत्रता देता है। सरकार का अनुमान है कि जीएसटी जैसे कर सुधारों के चलते कर संग्रह बढ़ोतरी में अभी वक्त लग सकता है। लेकिन आर्थिक सुधारों से आगे अच्छा फायदा मिलने की उम्मीद है। 

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