थोड़ी देर में संसद में पेश होगा पहला इकोनॉमिक सर्वे, इन सेक्टर पर रहेगी नजर
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इकोनॉमिक सर्वे से पता चलेगा कि इकोनॉमी से जुड़ी चुनौतियों पर सरकार की राय क्या है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इकोनॉमिक सर्वे का आम बजट से कोई सीधा संबध नहीं होता है हालांकि ऐसा हो सकता है कि जो बात इकोनॉमिक सर्वे में कही जाए वजट में उसे जगह मिल जाए।
बढ़ सकता है जीडीपी ग्रोथ का अनुमान
इस सर्वे में कारोबारी साल 2018-19 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ सकता है। चालू कारोबारी साल के लिए 6.75 से 7.5 फीसदी के बीच जीडीपी ग्रोथ का अनुमान था। सभी की निगाहें आज जीएसटी के असर के आकलन पर होंगी। जीएसटी, एक्सपोर्ट, एग्रीकल्चर और जॉब पर सरकार का विजन दिखेगा।
किसानों पर भी हो सकता है फोकस
सर्वे में ग्रामीण इलाकों में खासतौर से किसानों के बीच बढ़ती समस्या पर फोकस मुमकिन हैं। इसमें किसानों की समस्या से निपटने के ठोस उपाय सुझाए जा सकते हैं। आर्थिक सर्वे के मुख्य फोकस में रोजगार शामिल हो सकता है। इसके अलावा इनकम टैक्स पर आर्थिक सर्वे की टिप्पणी अहम होगी। नोटबंदी के असर पर आर्थिक सर्वे की बातों पर भी नजर होगी।
नौकरियां बना चार सालों में बड़ा मुद्दा
मोदी सरकार के लगभग चार साल के कार्यकाल में युवाओं को नौकरियां बहुत कम मिलना एक बड़ा मुद्दा रहा है। इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना भी हो रही है। लेबर ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार मोदी सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल में नई नौकरियां 60 फीसदी तक कम हुईं हैं।
युवाओं को जॉब मिलना भी एक अहम मुद्दा है। इकोनॉमिक सर्वे में इस पर सरकार को कुछ सुझाव दिए जा सकते हैं। इकोनॉमिक सर्वे में जॉब क्रिएशन से जुड़ी बाधाओं पर भी बात हो सकती है।
जीएसटी
जीएसटी का इम्पलीमेंटेशन इकोनॉमी के लिए बेहद अहम है। ऐसे में इस पर इकोनॉमिक सर्वे में सरकार को जरूरी कदमों के बारे में सुझाव आ सकता है। केंद्र सरकार ने हाल में जीएसटी में ईवे बिल नाम से नया सिस्टम लागू किया है। इस सिस्टम में खामियां हैं, जिसका फायदा उठा कर लोग टैक्स देने से बच सकते हैं। ऐसे में इकोनॉमिक सर्वे में इस कमी को दूर करने के लिए सुझाव दिया जा सकता है।