फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Economic slowdown, the slowest pace of production in eight months

आर्थिक चुनौतियों से उत्पादन की रफ्तार आठ महीने में सबसे कम, आरबीआई घटा सकता है रेपो रेट

Fri, 03 May 2019 06:42 AM IST
Avdhesh Kumar एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Fri, 03 May 2019 06:42 AM IST
विज्ञापन
Economic slowdown, the slowest pace of production in eight months
Industrial growth rate
आर्थिक क्षेत्र की चुनौतियों और चुनाव से छाई अनिश्चितता के असर से अप्रैल में देश की उत्पादन गतिविधियों में बड़ी गिरावट रही। इस दौरान उत्पादन क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स (पीएमआई) घटकर आठ महीने के निचले स्तर पर चला गया। निक्केई इंडिया ने बृहस्पतिवार को जारी सर्वे में बताया कि अप्रैल में उत्पादन पीएमआई 51.8 अंक रहा, जो एक महीने पहले मार्च में 52.6 अंक रहा था। यह अगस्त 2018 के बाद उत्पादन पीएमआई का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, पीएमआई की वृद्धि दर लगातार 21वें महीने 50 अंक से ऊपर रही, जो इसकी गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। 
विज्ञापन


आईएसएच मार्किट की मुख्य अर्थशास्त्री और रिपोर्ट की लेखिका पॉलियाना डी लीमा ने बताया कि उत्पादन क्षेत्र की पीएमआई में विस्तार सीमित रहा, लेकिन वृद्धि धीमी गति से चलती रही। है। यह दर्शाता है कि उत्पादकों को सुधार के लिए कड़े माहौल का सामना करना पड़ रहा है, जिससे रोजगार की गति 13 महीने में सबसे धीमी रही है। लीमा ने कहा कि इस सुस्ती का सबसे बड़ा कारण चुनाव से छाई अनिश्चितता रही, क्योंकि कंपनियां अगला कोई कदम उठाने से पहले नीतियां बनाने वाली नई सरकार का रुख देखना चाहती हैं।  
विज्ञापन


नए कारोबार और मांग में गिरावट

पिछले साल अगस्त से व्यापारिक माहौल में कमजोरी के चलते अप्रैल में नए कारोबार शुरू करने और मांग में भारी कमी देखी गई। इसके असर से भी उत्पादन पीएमआई में 80 आधार अंकों की कमी आई। हालांकि, इस दौरान निर्यात क्षेत्र में मजबूती देखने को मिली, जो मार्च के मुकाबले तेज रहा। अप्रैल में उपभोक्ता और उत्पादकों दोनों ही मोर्चे पर सुस्ती रही और सबसे ज्यादा कमजोरी पूंजीगत उत्पादों की वृद्धि में दिखी।
विज्ञापन
विज्ञापन


आरबीआई घटा सकता है रेपो रेट

रिपोर्ट की लेखिका लीमा ने बताया कि उत्पादन लागत के मोर्चे पर राहत दिखी रही है और इसकी महंगाई दर 43 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई है। बावजूद इसके उत्पादन की कुल महंगाई में बेहद मामूली गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि कीमतों के दबाव के साथ उत्पादन अर्थव्यवस्था को बढ़ाने और विकास दर को गति देने के लिए आरबीआई लगातार तीसरी बार रेपो रेट में कटौती कर सकता है। रिजर्व बैंक की अगली एमपीसी बैठक 3 से 6 जून तक होनी है।


सुस्त रहेगी विकास दर 

विश्लेषकों का कहना है कि उत्पादन गतिविधियों में कमी से विकास दर पर असर पड़ेगा। बुधवार को जारी कोर सेक्टर की वृद्धि दर भी पांच साल के निचले स्तर पर रही थी। 2018-19 में देश के कोर सेक्टर की आर्थिक वृद्धि गिरकर 4.3 फीसदी हो गई, जो 2014-15 में 4.9 फीसदी रही थी। कोयला, क्रूड, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी, उर्वरक, स्टील, सीमेंट और ऊर्जा क्षेत्र कोर सेक्टर में आते हैं। यहां उत्पादन में कमी सीधे तौर पर मांग में आई गिरावट को दर्शाता है, जिसका असर आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed