आगरा: 70 दिनों में 25 फीसदी रह गया दवा कारोबार, सबसे ज्यादा मास्क-सैनिटाइजर की बिक्री
- 70 दिनों में 52 करोड़ का दवा व्यापार, सामान्य दिनों में 210 करोड़ का
- लॉकडाउन में 95 गुना बिके मास्क-सैनिटाइजर, कफ सीरप तीन गुना
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जिले में दवा की थोक की दुकानें 600 हैं। इनमें सामान्य दिनों में औसतन 50 हजार रुपये की प्रति थोक व्यापारी करता था। 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन 70 दिन तक चला। अस्पताल-क्लीनिक बंद रहे, इससे सर्जिकल सामान और ग्लूकोज की बोतल की बिक्री नहीं हुई।
ऑपरेशन भी बंद थे, दुर्घटनाएं और डायरिया के मामले भी नहीं आए। इस कारण सिरिंज, कॉटन, ऑपरेशन सामान, ड्रिप लगाने को ग्लूकोज की बोतल के खरीददार नहीं रहे। इक्का-दुक्का सामान बिका, जो पहले से ही अस्पताल और फुटकर दवा विक्रेताओं के यहां था।
कोरोना वायरस के चलते इन दिनों में जुकाम, खांसी, बुखार के सीरप, दवा और एंटीबायोटिक की बिक्री तीन गुना रही। इनमें अधिकांश ने तो कोरोना वायरस के डर से इनका स्टॉक भी कर लिया था।
सैनिटाइजर-मास्क की बंपर सेल
एसिडिटी की दवा की दोगनी रही मांग
लॉकडाउन में लोग घरों में रहे और जमकर पसंदीदा खाना खाया। व्यायाम भी नहीं किया, जिससे एसिडिटी की परेशानी बढ़ गई। इसके चलते एसिडिटी की दवा की भी खूब मांग रही और बिक्री दो गुनी हो गई। मधुमेह और ब्लडप्रेशर की दवा सामान्य दिनों की तरह ही बिकी। दरअसल, इसके मरीजों ने ही यह दवाएं खरीदी।
25 फीसदी रह गया कारोबार
सामान्य दिनों की बात करें तो 70 दिन में थोक की दवा का 210 करोड़ रुपये का व्यापार होता है। लेकिन लॉकडाउन से 20 से 25 फीसदी ही व्यापार रह गया।- पुनीत कालरा, आगरा फार्मा एसोसिएशन
लॉकडाउन से दवा व्यापार प्रभावित रहा, चुनिंदा दवाएं ही बिकीं। सर्जिकल आयटम नहीं बिके, मास्क और सैनिटाइजर की बंपर बिक्री हुई है। अब सर्जिकल आयटम की डिमांड आने लगी है। - आशीष शर्मा, अध्यक्ष आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन
बीपी, मधुमेह रोगियों की बिक्री सामान्य की तरह रही, लेकिन सबसे ज्यादा जुकाम-खांसी, बुखार की दवा-सीरप और एंटीबायोटिक की बिक्री सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना तक रही। - आशू शर्मा, अध्यक्ष जिला आगरा महानगर केमिस्ट एसोसिएशन