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टायर की कीमत बढ़ाने की तैयारी में कंपनियां, 200-300 रुपये महंगे होंगे टायर

Fri, 04 May 2018 11:17 AM IST
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली
शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 04 May 2018 11:17 AM IST
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tyre cost set be increased as crude prices rises

कच्चे तेल की कीमत बढ़ने की वजह से अब मोटर वाहनों के टायर भी महंगे होने वाले हैं। देश की नामचीन कंपनियां - एमआरएफ, सिएट, अपोलो, योकोहोमा, कांटिनेंटल और जेके ने तो अपने डीलरों को टायर की कीमत में एक से तीन फीसदी की बढ़ोतरी के बारे में सूचना भी दे दी है। माना जा रहा है कि कीमतों में बढ़ोतरी के निर्णय को इसी पखवाड़े लागू कर दिया जाएगा। ऐसा हुआ, तो ग्राहकों को प्रति टायर 200 से 300 रुपये अधिक चुकाने होंगे। 

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ट्रक-बस के टायरों की कीमतों में बढ़ोतरी
टायर डीलरों से मिली सूचना के मुताबिक एमआरएफ, सिएट, कांटिनेंटल, अपोलो और जेके टायर ने ट्रक टायरों की कीमत बढ़ाने के बारे में सूचना दे दी है। इन कंपनियों ने टायर की कीमतों में 1.5 से तीन फीसदी की बढ़ोतरी की जानकारी दी है।
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ट्रैक्टर एवं कार के टायर बनाने वाली कंपनी योकोहोमा इंडिया ने भी डीलरों को बता दिया है कि उनके विभिन्न टायरों की कीमतों में इजाफा किया जा रहा है। कंपनी ने ट्रैक्टर के पिछले टायर की कीमत में एक फीसदी, कार के टायरों की कीमत में एक फीसदी, जबकि 900-16 ग्रेड वाले टायरों की कीमतों में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। उनका कहना है कि एक बार किसी कंपनी ने कीमत बढ़ाई, तो धीरे-धीरे सभी कंपनियां ऐसा करती हैं। इसलिए सभी किस्म के टायरों की कीमतें बढ़ेंगी।

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कच्चा माल महंगा होने से बढ़ रही कीमतें 

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एक टायर कंपनी के मिड लेवल मैनेजमेंट में शामिल एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कार्बन ब्लैक काफी महंगा हो गया है।

इसके साथ ही नायलॉन टायर फैब्रिक, रबर केमिकल्स और स्टील बीड वायर्स की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि टायर बनाने में इन कच्चे माल की 25-30 फीसदी की हिस्सेदारी होती है।  

तुरंत राहत के आसार नहीं 
टायर उद्योग को कच्चे माल की कीमतों में फिलहाल राहत मिलने के आसार भी नहीं हैं। दरअसल, सरकार ने कार्बन ब्लैक के आयात पर पिछले दिनों एंटी डंपिंग ड्यूटी थोप दी थी। इससे मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है और कार्बन ब्लैक की कीमत 50 फीसदी तक महंगे हो गए हैं।

टायर कंपनियों ने कार्बन ब्लैक की कमी का मामला सरकार के सामने भी उठाया गया है, लेकिन इसमें फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि एंटी डंपिंग ड्यूटी हटने में भी छह महीने का समय लग सकता है।  
 
सीसीआई से टायर कंपनियों की शिकायत
ऑल इंडिया टायर डीलर्स फेडरेशन के संयोजक एस पी सिंह का कहना है कि कच्चा तेल महंगा होने के नाम पर टायर की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन अभी भी कच्चा तेल 70-75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही चल रहा है।

टायर की जितनी कीमतें अभी हैं, उतनी तो वर्ष 2014 में भी नहीं हुई थी, जबकच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर थी। इसलिए उन्होंने टायर कंपनियों की शिकायत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) तथा सरकार से भी किया है।

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