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क्या नहीं होगी टाटा संस की लिस्टिंग?: टाटा ट्रस्ट्स ने दो कंपनियों के विलय का दिया प्रस्ताव, जानिए क्या प्लान

Mon, 28 Sep 2026 07:34 PM IST
कुमार विवेक पीटीआई, नई दिल्ली/मुंबई
पीटीआई, नई दिल्ली/मुंबई Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 28 Sep 2026 07:34 PM IST
सार

टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने दो कंपनियों के विलय का बड़ा प्रस्ताव दिया है। जानिए क्या है टाटा ट्रस्ट्स का यह रीस्ट्रक्चरिंग प्लान और इसका भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों पर क्या असर पड़ेगा! पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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Tata Trusts Proposes Merger of TESS and TCE with Tata Sons to Avoid Stock Market Listing
एनचंद्रशेखरन का टाटा संस से इस्तीफा - फोटो : amarujala.com (AI Assisted)

विस्तार

टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग रोकने के लिए टाटा ट्रस्ट की ओर से हर कोशिश जारी है। अब टाटा संस में 66 प्रतिशत की बहुलांश हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट्स ने कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचाने और इसे एक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी के रूप में बनाए रखने के लिए एक नया प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव के तहत टाटा समूह की दो प्रमुख ऑपरेटिंग कंपनियों का विलय टाटा संस में करने की योजना बनाई गई है।

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टाटा संस को लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने क्या प्रस्ताव दिया है?

टाटा ट्रस्ट्स द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड' (टीईएसएस) और 'टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स' (टीसीई) का विलय समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (टीएसपीएल) के साथ किया जाएगा। इस विलय का मुख्य उद्देश्य टाटा संस को नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (एनबीएफसी) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) की श्रेणी से बाहर निकालना है। 

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अक्तूबर 2024 से नोएल टाटा की अध्यक्षता में काम कर रहे टाटा ट्रस्ट्स (जिसमें सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट शामिल हैं) ने जुलाई 2025 में ही सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था कि टाटा संस को एक अनलिस्टेड प्राइवेट संस्था के रूप में ही बनाए रखने के सभी संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

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टाटा संस के वित्तीय आंकड़ों और बिजनेस मॉडल पर क्या असर पड़ेगा?

टाटा संस के इस प्रस्तावित पुनर्गठन से कंपनी की आय और परिसंपत्तियों की संरचना में बड़ा बदलाव आएगा। 31 मार्च 2026 तक के वित्तीय आंकड़ों के अनुसार:

  • ऑपरेटिंग रेवेन्यू में बढ़ोतरी: विलय के बाद बनी नई एकीकृत इकाई का ऑपरेटिंग रेवेन्यू ₹1,05,043 करोड़ हो जाएगा, जो इसकी कुल आय का 64.3 प्रतिशत हिस्सा होगा। वहीं, वित्तीय परिसंपत्तियों से मिलने वाली आय ₹40,072 करोड़ रहेगी।
  • परिसंपत्तियों का पुनर्गठन: पुनर्गठित संस्था की शुद्ध परिसंपत्तियां ₹2,00,158 करोड़ होंगी, जिनमें से समूह की कंपनियों में निवेश ₹1,77,120 करोड़ रहेगा।
  • सीआईसी मानदंडों से बाहर: चूंकि समूह की कंपनियों में निवेश कुल नेट एसेट्स के 90 प्रतिशत से कम हो जाएगा और ऑपरेटिंग आय 50% से अधिक होगी, इसलिए टाटा संस एनबीएफसी या सीआईसी के मुख्य व्यावसायिक मानदंडों से बाहर हो जाएगी और अपना सीआईसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर सकेगी।

यह पूरा विवाद क्यों शुरू हुआ?

यह मामला तब गंभीर हुआ जब 2022 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने टाटा संस को 'अपर-लेयर एनबीएफसी' के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य होता है। टाटा संस ने एनबीएफसी ढांचे से बाहर निकलने के लिए आरबीआई से अनुरोध किया था, लेकिन सितंबर में आरबीआई ने इस याचिका को खारिज कर दिया था। 



इसके अलावा, टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बोर्ड के बीच चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को लेकर भी मतभेद रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, यह नया कदम टाटा संस के पुराने व्यावसायिक ढांचे को बहाल करता है। 2004 से पहले टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) टाटा संस का ही एक डिविजन थी। 2004 में टीसीएस के अलग होने के बाद टाटा संस को गैर-बैंकिंग, गैर-वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया गया था।

क्या आरबीआई की मंजूरी मिलेगी, आगे की राह क्या?

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के बोर्ड से इस पुनर्गठन प्रस्ताव पर विचार करने और आगे की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। इस अमलगमेशन को लागू करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के 'आरबीआई (एनबीएफसी - वॉलिंटरी अमलगमेशन) दिशानिर्देश, 2025' के तहत केंद्रीय बैंक से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य होगा। यदि आरबीआई से इस मर्जर को मंजूरी मिल जाती है, तो टाटा संस अपनी ऐतिहासिक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी की पहचान को सुरक्षित रखते हुए अपने परिचालन को जारी रख सकेगी।

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