साइरस मिस्त्री विवादः NCLAT के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा टाटा संस
- NCLAT के आदेश के खिलाफ टाटा संस ने उच्च न्यायालय में अपील की।
- 18 दिसंबर को एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला दिया था।
- साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे।
विस्तार
अब रतन टाटा एनसीएलएटी के साइरस मिस्त्री को फिर से टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन बनाने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। शुक्रवार को दायर अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि न्यायाधिकरण का फैसला गलत, त्रुटिपूर्ण और मामले के रिकॉर्ड के विपरीत है।
उनकी याचिका, 110 अरब डॉलर के टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस द्वारा दायर की गई याचिका से अलग है। टाटा संस ने एक दिन पहले ही इस मामले सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीली न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने 18 दिसंबर को दिए अपने आदेश में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन पद पर फिर से बहाल किए जाने का आदेश दिया था।
टाटा संस के मानद चेयरमैन और शेयरधारक रतन टाटा ने अपनी याचिका में कहा कि एनसीएलएटी का फैसला गलत है, क्योंकि यह टाटा संस को दो समूहों की कंपनी के रूप में देखता है। उन्होंने दलील दी कि मिस्त्री को उनकी पेशेवर क्षमता को देखते हुए टाटा संस का कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया था, न कि टाटा संस में 18.4 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पलोनजी समूह के प्रतिनिधि के रूप में।
टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की 65.89 फीसदी हिस्सेदारी है और कई वर्षों से रतन टाटा इसके चेयरमैन बने हुए हैं। याचिका में कहा गया, एनसीएलएटी के आदेश में गलत तरीके से संकेत किया गया है कि ‘एसपी समूह के किसी शख्स को कुछ अधिकारों या परंपरा के तहत निदेशक नियुक्त किया गया था।’
उन्होंने दलील दी, ‘यह असत्य है और टाटा संस के रिकॉर्ड्स व आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एक प्रकार की नियमावली) के विपरीत है, जो गैर विवादित है और एसपी समूह सहित शेयरधारकों के लिए बाध्यकारी है।’उन्होंने कहा कि साइरस मिस्त्री के नेतृत्व में कमी थी और वह ‘वह समय पर अपने पारिवारिक कारोबार से खुद को अलग करने में अनिच्छुक थे।’
‘टाटा संस को निजी कंपनी बनाने’ के मामले में फैसला सुरक्षित
कंपनी मामलों के मंत्रालय (एमसीए) ने एनसीएलएटी में कहा कि टाटा संस को निजी कंपनी में तब्दील किए जाने की अनुमति देने में कुछ भी गलत नहीं है। कंपनी निबंधक (आरओसी) द्वारा न्यायाधिकिकरण में दायर याचिका में यह बात कही गई। न्यायाधिकरण ने 18 दिसंबर के अपने आदेश में टाटा संस को पब्लिक से निजी कंपनी में तब्दील किए जाने को अवैध करार दिया है। चेयरमैन एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने इस मामले में अपने फैसले को सोमवार तक के लिए टाल दिया है।Tata Sons moves Supreme Court against the National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) order that directed reinstatement of Cyrus Mistry as Executive Chairman of Tata Sons. pic.twitter.com/TiLIF7DzHt
— ANI (@ANI) January 2, 2020
एनसीएलएटी ने शुक्रवार तक स्थगित की सुनवाई
एनसीएलएटी ने टाटा मिस्त्री मामले में कंपनी पंजीयक की याचिका पर सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया है। एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को कंपनी अधिनियम के नियमों के तहत निजी और सार्वजनिक कंपनियों की परिभाषा का विवरण जमा करने के लिए कहा है।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने लिया था फैसले
न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मिस्त्री के खिलाफ रतन टाटा के उठाए गए कदम परेशान करने वाले थे। पीठ ने नए चेयरमैन की नियुक्ति को भी अवैध ठहराया। अदालत ने यह भी कहा कि टाटा संस को पब्लिक कंपनी से निजी बनाने का फैसला भी गैर कानूनी है और इसे पलटने का आदेश दिया जाता है। यह आदेश चार सप्ताह में लागू होगा और टाटा समूह के पास इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी विकल्प है।
साइरस मिस्त्री ने इस फैसले पर कहा था कि, ‘आज का फैसला मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह अच्छे प्रशासन और अल्पांश शेयरधारकों के अधिकारों की जीत है। इससे मेरा रुख सही साबित होता है।’
टाटा संस के छठे चेयरमैन थे साइरस मिस्त्री
साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे और उन्हें इस पद से अक्तूबर 2016 में हटा दिया गया था। रतन टाटा के बाद उन्होंने 2012 में चेयरमैन का पद संभाला था। समूह के 150 साल के इतिहास में मिस्त्री चेयरमैन बनने वाले टाटा परिवार से बाहर के दूसरे व्यक्ति थे।
साइरस मिस्त्री परिवार ने किया था विरोध
बता दें सितंबर 2017 में टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनाने के लिए शेयरधारकों ने मंजूरी दी थी। उसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर दर्ज किया था। सायरस मिस्त्री परिवार इसके खिलाफ था। क्योंकि निजी कंपनी होने से वे अपने शेयर बाहरी लोगों को नहीं बेच सकते, बल्कि टाटा को ही बेचने पड़ेंगे। जबकि, पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरधारक किसी को भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।