72,000 करोड़ के निवेश से सेल होगी मजबूत
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इस्पात बनाने वाली सरकारी कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ग्लोबल बाजार में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की तैयारी में है। दुनिया की दिग्गज स्टील कंपनियों से प्रतिस्पर्धा के लिए कंपनी 72,000 रुपये करोड़ का निवेश करके अपना विस्तार करेगी। सेल के कारोबारी विस्तार और भावी रणनीतियों पर सेल के चेयरमैन सीएस वर्मा के साथ अमर उजाला के सुजय मेहदूदिया की बातचीत-
पिछले कुछ समय से देश में स्टील की मांग में कुछ नरमी आई है। ऐसे में सेल की विस्तार योजना क्या इसके साथ मेल खाती है? सेल के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया आधारभूत स्तर तक विकास में किस तरह से मददगार होगी?
हमारे आधुनिकीकरण कार्यक्रम के चार आयाम हैं- उत्पादन में बढ़ोतरी करना, पुरानी तकनीक को हटाकर नई तकनीक को जगह देना, अपने उत्पादों में विविधता लाना और कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी खानों (माइन) को विकसित करना।
इस तरह हमारा आधुनिकीकरण कार्यक्रम शीर्ष से लेकर आधारभूत स्तर सुधार और विकास सुनिश्चित करने में सक्षम है। इसलिए करीब 72,000 करोड़ रुपये का निवेश करके सेल के सभी संयंत्रों के आधुनिकीकरण की व्यापक योजना बनाई गई है। इसमें से 39,131 करोड़ रुपये उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी पर खर्च किए जाएंगे।
नई तकनीक और पर्यावरण संरक्षण आदि पर 15,700 करोड़ रुपये, मूल्य वर्धित (वैल्यू एडेड) उत्पादों पर 7,039 करोड़ और खानों के विकास पर 10,264 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे हमारा वैल्यू एडेड प्रोडक्ट का उत्पादन मौजूदा 42 फीसदी के स्तर से बढ़कर 55 फीसदी पर पहुंच जाएगा।
खपत का स्तर अभी 59 किलोग्राम प्रति व्यक्ति
आधुनिकीकरण की इस प्रक्रिया के बाद सेल की आगे के लिए क्या योजना है? कंपनी की ग्रोथ के लिए कुछ और कदम इसके बाद उठाए जाएंगे या फिर कुछ वक्त के लिए इंतजार करेंगे?
सेल का उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था के विकास में बेहतर योगदान देना है। इसलिए मांग की स्थिति का हमारी भावी योजनाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। हालांकि हमारा मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है इसलिए स्टील की मांग एक बेहतर स्तर पर बनी रहेगी।
हमारे देश में स्टील की खपत का स्तर अभी 59 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है, जबकि ग्लोबल आंकड़ा 225 किलोग्राम प्रति व्यक्ति का है। ऐसे में घरेलू स्तर पर मांग को लेकर अभी काफी संभावनाएं मौजूद हैं। मांग में अगर 6 से 8 फीसदी की दर से सालाना बढ़ोतरी भी मान कर चलें, तो 2025-26 तक यह 10 करोड़ टन के स्तर तक पहुंच जाएगी।
सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के विकास के लिए 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा है, जिसमें से करीब 15 फीसदी स्टील सेक्टर पर खर्च किया जाएगा। इस तरह स्टील के क्षेत्र में संभावनाएं काफी व्यापक हैं।
स्टील की कीमतों में 10 से 12 फीसदी की कमी आई
क्या आने वाले समय में आपको स्टील की कीमतों में बढ़ोतरी के आसार दिखाई देते हैं?
वर्ष 2011-12 में घरेलू स्तर पर स्टील की कीमतों में 10 से 12 फीसदी की कमी आई है। पिछले तीन महीनों के दौरान घरेलू बाजार में कीमतों में 500 से 1,000 रुपये प्रति टन की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में कीमतों में अगले कुछ समय तक स्थिरता बनी रहेगी, आगे चल कर धीमे-धीमे कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।
2014 में स्टील की घरेलू मांग और निर्यात की स्थिति कैसी रहने की उम्मीद दिखाई दे रही है? सरकारी क्षेत्र की सभी कंपनियों (पीएसयू) की होल्डिंग कंपनियां बनाने और उनके बोर्ड में सरकार का प्रतिनिधित्व रखकर इन कंपनियों को सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण की प्रस्तावित योजना के बारे में क्या कहना चाहेंगे?
मेरी समझ में हमारा दृष्टिकोण पीएसयू कंपनियों को विकेंद्रीकृत करते हुए उन्हें ऐसे अधिकार दिए जाने चाहिए, ताकि इन कंपनियों का संचालन लाभपूर्ण ढंग से किया जा सके। होल्डिंग कंपनियों के गठन की प्रस्तावित योजना से पीएसयू को यकीनन ज्यादा स्वायत्तता मिल सकेगी, पर इसके साथ ही ज्यादा जिम्मेदारी और दायित्व भी जुड़े होंगे।