तो ये कारण है कि हम इसे कहते हैं कोका कोला
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ठंडा मतलब कोका कोला। ये जुमला भले ही कंपनी ने अपने प्रोडक्ट को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया हो। लेकिन, इसमें शक नहीं कि कोका कोला में इसे इस्तेमाल करने वालों को अपना दीवाना बनाने की भरपूर क्षमता है।
एक जमाने में कोका कोला सुनकर लोग सोचते थे कि कोका का मतलब है इसमें कोकीन मिलाई जाती है। जिससे लोग उसके आदी हो जाते हैं। हालांकि सच ये था कि उसमें कोका की पत्तियों का रस मिलाया जाता था। आज बच्चा बच्चा कोका कोला के बारे में जानता है। लेकिन क्या आप इसके इतिहास के बारे में कुछ जानते हैं? कोका कोला नाम के पेय का आविष्कार, अमेरिका के अटलांटा शहर के केमिस्ट जॉन पेम्बर्टन ने किया था।
अमेरिका के गृह युद्ध में जख्मी पेम्बर्टन को मॉरफीन की लत लग गई थी। उससे छुटकारा पाने के लिए पेम्बर्टन ने शराब में कोका की पत्तियों का रस मिलाकर पीना शुरू किया। अच्छा लगा तो उसे बेचना भी शुरू कर दिया। शराब में कोका की पत्तियों का रस मिलाने की वजह ये भी थी कि अटलांटा की सरकार ने शराबबंदी का सख्त कानून बना दिया था। इसी से बचने के लिए पेम्बर्टन ने ये नया नुस्खा तैयार किया था।
असल में कोका कोला में जो पहला शब्द यानी कोका है, वो इसमें मिलाए जाने वाले कोका की पत्तियों के रस की वजह से है। इसे तो कमोबेश सब जानते हैं या मानते हैं। मगर इसके साथी 'कोला' की कहानी क्या है, वो हम आपको बताते हैं। असल में ये कोला शब्द आया है, Kola नाम के नट से। कोला नाम का ये बीज, पश्चिमी अफ्रीका के एक पेड़ का होता है।
ताकत बढ़ाने की सुपारी होता है Kola
कोला की हरे रंग की फली होती है, जो करीब दो इंच लंबी होती है। इसमे सेम के बीज जैसा गुदाज फल होता है। इसका रंग भूरा और लाल रंग का होता है। पश्चिम अफ्रीका में लोग इसे ताकत बढ़ाने के लिए सुपारी की तरह चबाते थे।
इसे चबाने से लोगों पर एक तरह का सुरूर भी भारी हो जाता था। क्योंकि इसमें कैफीन और थियोब्रोमाइन नाम के केमिकल होते हैं। ये दोनों ही केमिकल, चाय, कॉफी और चॉकलेट में भी मिलते हैं। यूं तो पश्चिमी अफ्रीकी देशों में कोला की खेती सदियों पुरानी है। मगर बाकी दुनिया को इसकी खूबियों का अंदाजा सोलहवीं सदी में जाकर हुआ था। ब्रिटिश इतिहासकार पॉल लवजॉय कहते हैं कि पश्चिमी अफ्रीका में पुराने जमाने में लोग कोला के पेड़ों को कब्र पर लगाते थे।
स्थानीय लोग लड़कियों के मासिक धर्म की शुरुआत के वक्त होने वाले पूजा पाठ में भी इनका इस्तेमाल करते थे। कोला के बीज लंबे वक्त तक इस्तेमाल हो सके, इसके लिए इनमें नमी रहना जरूरी होता था। इसलिए इन्हें ज्यादा दिनों तक नहीं रखा जा सकता था। मगर सैकड़ों साल पहले भी अफ्रीकी लोग कोला के बीजों को सहेजकर हजारों किलोमीटर दूर तक ले जाते थे। इसकी अहमियत इसी बात से समझी जा सकती है कि इसे सोने के बराबर तरजीह दी जाती थी।
इन्हें राजा-महाराजा तोहफे के तौर पर एक-दूसरे को दिया करते थे। पॉल लवजॉय कहते हैं पंद्रहवीं सदी तक यूरोप के लोगों को कोला के बीजों की खूबियों का अंदाजा नहीं हुआ था। सोलहवीं सदी में जब पुर्तगालियों ने अफ्रीका के तटों पर तिजारत शुरू की तो उन्होंने कोला के बीजों को भी कई ठिकानों तक ढोकर पहुंचाया। फिर भी उन्हें कोला के बीजों की खूबियों का एहसास नहीं हुआ।
उन्नीसवीं सदी तक अमेरिकी जान चुके थे Kola की खूबी
जब 1620 में एक अंग्रेज व्यापारी, रिचर्ड जॉब्सन, गैम्बिया नदी के सहारे, पश्चिमी अफ्रीका के अंदरूनी हिस्से तक पहुंचा, तो उसके लिए कोला के बीज एकदम नई चीज थी। जॉब्सन ने अपने सफरनामे में इसका जिक्र किया है।
जॉब्सन ने लिखा है कि इन कड़वे बीजों को लोग बड़े उत्साह से लाकर उसे देते थे। मगर उसे समझ नहीं आया कि इसमें स्थानीय लोगों को अच्छा क्या लगता है। उसने ये भी लिखा कि कोला के दस बीज राजा को भेंट के तौर पर दिए जाते थे। जॉब्सन जब इंग्लैंड लौटा तो अपने साथ कोला के छह बीज लेकर आया।
मगर स्वदेश पहुंचते-पहुंचते वो सब खराब हो गए। हालांकि कोला की हल्की खुमारी चढ़ाने वाली खूबी, यूरोपीय लोगों से ज्यादा दिन नहीं छुपी रह सकी। उन्नीसवीं सदी तक अमेरिका और यूरोप को कोला के बीजों की अच्छी-खासी खेप अफ्रीका से भेजी जाने लगी थी। यूरोप और अमेरिका में कोला के बीजों की मदद से सेहत को फायदा पहुंचाने वाली दवाएं और सिरप तैयार किए जा रहे थे।
इंग्लैंड में 'फोर्स्ड मार्च' के नाम से एक टिकिया बेची जा रही थी। जिसमें कोका की पत्तियों का रस और कोला के बीजों की खूबियां मिली हुई थीं। कंपनी का दावा था कि ये लोगों की भूख मिटाती है और उन्हें सेहतमंद बनाती है। फ्रांस में कोला के बीजों को वाइन में मिलाकर एक सेहतमंद पेय तैयार किया गया था। जिसका नाम विन मारियानी था। इसका नुस्खा फ्रेंच केमिस्ट एंजेलो मारियानी ने 1863 में तैयार किया था।
विन मारियानी से आया कोका कोला का आइडिया
कहते हैं कि पोप लियो तेरहवें, इंग्लैंड की महारानी विक्टोरिया, अमेरिकी वैज्ञानिक थॉमस एडिसन और ब्रिटिश लेखक आर्थर कॉनन डायल जैसी हस्तियां विन मारियानी की मुरीद थीं। इसके प्रचार में इन नामचीन लोगों की तस्वीरें इस्तेमाल की जाती थीं।
लोग मानते हैं कि अमेरिकी केमिस्ट जॉन पेम्बर्टन को कोका कोला का आइडिया, विन मारियानी से ही मिला था। अमेरिकन केमिस्ट पेम्बर्टन ने कोला और कोका के स्वाद के मेल से तैयार अपना ड्रिंक बाजार में उतारा तो लोगों ने उसे खूब पसंद किया। पहले ही साल लोग औसतन कोका कोला की नौ ड्रिंक पी रहे थे। आज दुनिया भर में रोज कोका कोला की करीब दो अरब बोतलें रोज बिकती हैं।
कोला और कोका की तासीर लोगों को इतनी अच्छी लगी कि जब 1985 में कंपनी ने बिक्री बढ़ाने के लिए एक तजुर्बा किया तो उससे भारी नुकसान हुआ। तीन महीने बाद ही कंपनी को नए नाम के साथ अपना प्रोडक्ट बाजार में दोबारा लाना पड़ा। हालांकि अब कंपनी कोला का असली स्वाद मिलाकर अपना ड्रिंक नहीं तैयार करती। अब इसकी केमिकल नकल से कोला बनाया जाता है।
इसका पाउडर दुनिया भर में कोका कोला की फैक्ट्रियों में भेजा जाता है। जहां पर कंपनी के डीलर, इस कंसंट्रेट की मदद से कोका कोला तैयार करते हैं।अब कोला का असली स्वाद पाने के लिए इसके नट को ही चखना होगा। वैसे कोला की मदद से सोडा बनाने की तमाम तरकीबें उपलब्ध हैं। जैसा कि, रिचर्ड जॉब्सन ने लिखा था, कि कोला बेहद कड़वा होता है। मगर आज इसे संतरे के रस, वनीला और कैरेमेल में मिलाकर खाने से कड़वाहट को कम किया जा सकता है। हां, इन तमाम चीजों को मिलाने के बावजूद इसमें मौजूद कैफीन और थियोब्रोमाइन से आपको हल्का नशा जरूर होगा।