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आईएलएंडएफएस पर काले धन को सफेद बनाने का संदेह, फिर से हुई डिफॉल्टर
शिशिर चौरसिया, नई दिल्ली
Updated Sat, 06 Oct 2018 10:36 AM IST
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लगातार कई डिफॉल्ट से देश की वित्तीय व्यवस्था को हिला देने वाली कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज (आईएलएंडएफएस) पर काले धन को सफेद बनाने का संदेह जताया गया है। अगर इसमें सच्चाई का जरा भी अंश मिला, तो उसके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जांच कर सकती है। यह मामला नीरव मोदी, मेहुल चोकसी, ललित मोदी और विजय माल्या के घोटालों से भी बड़ा हो सकता है।
आईएलएंडएफएस मामले पर पैनी नजर रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने अमर उजाला के साथ बातचीत में इस बात की आशंका जाहिर की है कि कंपनी इस गैर-कानूनी कार्य में लिप्त हो सकती है। उनके मुताबिक, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इसकी कई अनुषंगी इकाइयां हैं और ये बड़ी मात्रा में नकदी का लेन-देन करती थीं।
इसलिए आशंका जताई जा रही है कि इसकी आड़ में नकदी को इधर-उधर घुमाकर काले धन को सफेद बनाने का खेल चल रहा था। यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनी के इस मामले की जांच ईडी भी करेगी, तो उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो ऐसा भी होगा।
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नौकरशाहों से थे घनिष्ठ संबंध
मामले पर नजर रखने वाले एक अन्य व्यक्ति का कहना है कि आईएलएंडएफएस का शासन के अहम पद पर बैठे कुछ नौकरशाहों से भी घनिष्ठ संबंध रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि कंपनी की तरफ से कुछ अधिकारियों को नियमित रूप से बड़ी रकम दी जाती थी, वह भी बिना कंपनी में काम किए। ऐसा इसलिए, ताकि अधिकारियों का कंपनी पर रहम-ओ-करम बना रहे। हालांकि इस तथ्य की पुष्टि नहीं हो पा रही है।
राजमार्ग, बिजली परियोजनाओं ने डुबोया
सत्ता के गलियारों से ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि राजमार्ग और बिजली क्षेत्र आईएलएंडएफएस का काल बन गया। कंपनी ने जितनी रकम का वित्तपोषण किया है, उनमें से 60,000 करोड़ रुपये की रकम सिर्फ राजमार्ग, बिजली और पानी की परियोजनाओं पर खर्च हुए। राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ आधिकारिक सूत्र का कहना है कि इसने राजमार्ग की परियोजनाओं के लिए खुले हाथ से पैसे बहाए। कई मामलों में परियोजना की वित्तीय लागत बेहद बढ़ा-चढ़ा कर बताई गई और आईएलएंडएफएस ने बिना उसकी जांच-परख किए वित्तपोषण कर दिया।
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आईएलएंडएफएस मामले पर पैनी नजर रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने अमर उजाला के साथ बातचीत में इस बात की आशंका जाहिर की है कि कंपनी इस गैर-कानूनी कार्य में लिप्त हो सकती है। उनके मुताबिक, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इसकी कई अनुषंगी इकाइयां हैं और ये बड़ी मात्रा में नकदी का लेन-देन करती थीं।
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इसलिए आशंका जताई जा रही है कि इसकी आड़ में नकदी को इधर-उधर घुमाकर काले धन को सफेद बनाने का खेल चल रहा था। यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनी के इस मामले की जांच ईडी भी करेगी, तो उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो ऐसा भी होगा।
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नौकरशाहों से थे घनिष्ठ संबंध
मामले पर नजर रखने वाले एक अन्य व्यक्ति का कहना है कि आईएलएंडएफएस का शासन के अहम पद पर बैठे कुछ नौकरशाहों से भी घनिष्ठ संबंध रहा है। बताया तो यह भी जा रहा है कि कंपनी की तरफ से कुछ अधिकारियों को नियमित रूप से बड़ी रकम दी जाती थी, वह भी बिना कंपनी में काम किए। ऐसा इसलिए, ताकि अधिकारियों का कंपनी पर रहम-ओ-करम बना रहे। हालांकि इस तथ्य की पुष्टि नहीं हो पा रही है।
राजमार्ग, बिजली परियोजनाओं ने डुबोया
सत्ता के गलियारों से ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि राजमार्ग और बिजली क्षेत्र आईएलएंडएफएस का काल बन गया। कंपनी ने जितनी रकम का वित्तपोषण किया है, उनमें से 60,000 करोड़ रुपये की रकम सिर्फ राजमार्ग, बिजली और पानी की परियोजनाओं पर खर्च हुए। राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ आधिकारिक सूत्र का कहना है कि इसने राजमार्ग की परियोजनाओं के लिए खुले हाथ से पैसे बहाए। कई मामलों में परियोजना की वित्तीय लागत बेहद बढ़ा-चढ़ा कर बताई गई और आईएलएंडएफएस ने बिना उसकी जांच-परख किए वित्तपोषण कर दिया।
रिपोर्ट चट कर गए दीमक
सरकार ने आईएलएंडएफएस मामले की जांच का जिम्मा धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को सौंप दिया है। बताया जाता है कि इस मामले में सरकार ने 2009 के सत्यम घोटाले से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है, लेकिन दुर्भाग्य की बात की यह रिपोर्ट मिल नहीं रही है। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट दीमक चट कर गए हैं।
आईएलएंडएफएस से जुड़े कुछ अहम तथ्य
डिफॉल्ट किया एक और पेमेंट
आईएलएंडएफएस ने एक और पेमेंट डिफॉल्ट किया है। 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच आईएलएंडएफएस ने 33.9 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट डिपॉजिट पेमेंट का डिफॉल्ट किया है। आईएलएंडएफएस मामले पर आरबीआई ने भी चिंता जताई है।
क्रेडिट पॉलिसी के दौरान गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि आईएलएंडएफएस मामले पर मैनेजमेंट से बातचीत की जा रही है। वहीं कल आईएलएंडएफएस के नए बोर्ड की पहली बैठक में उदय कोटक ने भी माना था कि आईएलएंडएफएस ग्रुप की समस्या सत्यम से भी बड़ी है।
आईएलएंडएफएस से जुड़े कुछ अहम तथ्य
- - करीब 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज
- - कर्ज का बड़ा हिस्सा 10,198 करोड़ रुपये का ऋण पत्र
- - सरकार के ऊपर भी करीब 17,000 करोड़ रुपये की देनदारी
- - 250 से भी ज्यादा अनुषंगी इकाई और संयुक्त उपक्रम
- - बीते महीने सिडबी का 1,000 करोड़ रुपये का किस्त चुकाने में विफल
- - अगले छह महीने में 3,600 करोड़ रुपये की चुकानी है किस्त
- - जिन परियोजनाओं का वित्तपोषण किया, उनमें से 17,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अटकीं
डिफॉल्ट किया एक और पेमेंट
आईएलएंडएफएस ने एक और पेमेंट डिफॉल्ट किया है। 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच आईएलएंडएफएस ने 33.9 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट डिपॉजिट पेमेंट का डिफॉल्ट किया है। आईएलएंडएफएस मामले पर आरबीआई ने भी चिंता जताई है।
क्रेडिट पॉलिसी के दौरान गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि आईएलएंडएफएस मामले पर मैनेजमेंट से बातचीत की जा रही है। वहीं कल आईएलएंडएफएस के नए बोर्ड की पहली बैठक में उदय कोटक ने भी माना था कि आईएलएंडएफएस ग्रुप की समस्या सत्यम से भी बड़ी है।