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चालू वित्त वर्ष में इस कंपनी में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार, मिलेंगे 8400 करोड़ रुपये
Wed, 20 Jan 2021 03:04 PM IST
डिंपल अलवधी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Wed, 20 Jan 2021 03:04 PM IST
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : ANI
सरकार टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड (टीसीएल) (पूर्व में वीएसएनएल) में अपनी समूची शेष 26.12 फीसदी हिससेदारी को चालू वित्त वर्ष में ही बिक्री पेशकश और रणनीतिक बिक्री के जरिए बेचेगी। निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एक नोटिस में कहा है कि शेयर होल्डिंग के एक हिस्से को बिक्री पेशकश के जरिए बेचा जाएगा और शेष हिस्सेदारी जो भी बची होगी उसे रणनीतिक भागीदार पानाटोन फिनवेस्ट लिमिटेड को पेश किया जाएगा।
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सरकार को प्राप्त हो सकते हैं 8,400 करोड़ रुपये
इस संदर्भ में दीपम ने कहा कि यह सौदा 20 मार्च 2021 को पूरा कर लिया जाएगा। टाटा कम्युनिकेशंस का शेयर बीएसई में पिछले दिन के बंद भाव के मुकाबले 1.08 फीसदी बढ़कर 1,129.95 रुपये पर बंद हुआ। टीसीएल में मौजूदा 26.12 फीसदी हिस्सेदारी को बेचकर सरकार को 8,400 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं।
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पहले विदेश संचार निगम लिमिटेड था कंपनी का नाम
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) का 2002 में निजीकरण किया गया था। कंपनी के 25 फीसदी शेयर प्रबंधन नियंत्रण सौंपने के साथ रणनीतिक भागीदार पानाटोन फिनवेस्ट लिमिटेड को बेचे गए थे। बाद में इस कंनी का नाम बदलकर टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड कर दिया गया। टाटा कम्युनिकेशंस लिमिटेड की शेयर होल्डिंग में प्रवर्तक की हिस्सेदारी 74.99 फीसदी है, जिसमें से भारत सरकार के पास 26.12 फीसदी, पैनाटोन फिनवेस्ट के पास 34.80 फीसदी, टाटा संस के पास 14.07 फीसदी है और शेष 25.01 फीसदी हिस्सेदारी जनता के पास है।
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ये है सरकार का लक्ष्य
कोरोना काल में विनिवेश के जरिए भी सरकार चालू वित्त वर्ष 2020-21 में लक्ष्य का करीब पांच फीसदी हासिल कर पाई है। हालांकि, हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया था कि सरकार के हिस्सेदारी बिक्री प्रोग्राम को लेकर विनिवेश में अब तेजी आएगी और ऐसे मामले, जिनमें कंपनियों को कैबिनेट की मंजूरी मिल चुकी है, उन्हें पूरी गंभीरता से लिया जाएगा। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में अब तक केंद्रीय लोक उपक्रमों में अल्पांश हिस्सेदारी बेचकर करीब 11,006 करोड़ रुपये जुटाए हैं। पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश के जरिए 67,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था।