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ED Case: यस बैंक के सह संस्थापक राणा कपूर को विशेष अदालत से मिली जमानत, ऋण धोखाधड़ी से जुड़ा है मामला
Thu, 21 Dec 2023 09:08 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Thu, 21 Dec 2023 09:08 PM IST
सार
एक विशेष अदालत ने वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले में यस बैंक के सह संस्थापक राणा को राहत दी है।
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विस्तार
ऋण में धोखाधड़ी से जुड़े मामले में यस बैंक के सह संस्थापक राणा कपूर को जमानत मिल गई है। गुरुवार को एक विशेष अदालत ने वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े धनशोधन मामले में यस बैंक के सह संस्थापक राणा को राहत दी है। इसके बावजूद आरोपी राणा कपूर जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे क्योंकि सीबीआई द्वारा दर्ज संबंधित मामले में उन्हें जमानत नहीं दी गई है।
बता दें निजी बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ राणा कपूर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मार्च 2020 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था। पीएमएलए अदालत के विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने गुरुवार को राणा कपूर को जमानत दे दी है।
याचिका में कहा- साढ़े तीन साल से ज्यादा समय जेल में
अधिवक्ता राहुल अग्रवाल और जैस्मीन पुराणी के जरिए से दायर जमानत याचिका में राणा कपूर ने कहा कि वह साढ़े तीन साल से अधिक समय से जेल में हैं, जो पीएमएलए के तहत अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा की आधी अवधि है।
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दूसरी ओर ईडी ने तर्क दिया कि राणा कपूर मुख्य आरोपी व्यक्तियों में से एक हैं, जिन्होंने रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग में खुद को शामिल करके अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के लिए 5,050 करोड़ रुपये का अनुचित वित्तीय लाभ हासिल करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। साथ ही आरोप लगाया है कि राणा कपूर को यस बैंक द्वारा डीएचएफएल और कपिल वधावन और धीरज वधावन के स्वामित्व वाली समूह कंपनियों को दिए गए फर्जी ऋणों पर रिश्वत के रूप में कई सौ करोड़ रुपये मिले।
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बता दें निजी बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ राणा कपूर को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मार्च 2020 में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत गिरफ्तार किया था। पीएमएलए अदालत के विशेष न्यायाधीश एमजी देशपांडे ने गुरुवार को राणा कपूर को जमानत दे दी है।
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याचिका में कहा- साढ़े तीन साल से ज्यादा समय जेल में
अधिवक्ता राहुल अग्रवाल और जैस्मीन पुराणी के जरिए से दायर जमानत याचिका में राणा कपूर ने कहा कि वह साढ़े तीन साल से अधिक समय से जेल में हैं, जो पीएमएलए के तहत अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम सजा की आधी अवधि है।
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दूसरी ओर ईडी ने तर्क दिया कि राणा कपूर मुख्य आरोपी व्यक्तियों में से एक हैं, जिन्होंने रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग में खुद को शामिल करके अपने परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के लिए 5,050 करोड़ रुपये का अनुचित वित्तीय लाभ हासिल करने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया। साथ ही आरोप लगाया है कि राणा कपूर को यस बैंक द्वारा डीएचएफएल और कपिल वधावन और धीरज वधावन के स्वामित्व वाली समूह कंपनियों को दिए गए फर्जी ऋणों पर रिश्वत के रूप में कई सौ करोड़ रुपये मिले।