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WTO: डब्ल्यूटीओ प्रमुख ने की भारत से अपील, चीन के निवेश सुविधा प्रस्ताव का दें समर्थन

Tue, 03 Jun 2025 07:29 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाल, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाल, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 03 Jun 2025 07:29 PM IST
सार

WTO: डब्ल्यूटीओ की प्रमुख ने भारत से चीन के निवेश सुविधा प्रस्ताव को समर्थन देने की अपील की है। भारत ने पिछली बैठक में इस प्रस्ताव का विरोध जताया था।

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WTO chief appeals to India, Support China's investment facilitation proposal
डब्लूटीओ - फोटो : डब्लूटीओ.ऑर्गेनाइजेशन

विस्तार

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने भारत से चीन की अगुवाई वाले निवेश सुविधा प्रस्ताव का समर्थन करने की अपील की। डब्ल्यूटीओ की प्रमुख नगोजी ओकोन्जो-इवेला ने मंगलवार को कहा कि कई विकासशील देश इस पहल का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने भारतीय वाणिज्य व उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के साथ डब्ल्यूटीओ सुधार और कृषि जैसे कई मुद्दों पर चर्चा की। पीयूष गोयल आधिकारिक यात्रा पर जेनेवा में हैं। 

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विकासशील देश कर रहें इसका समर्थन- डब्युटीओ प्रमुख 

डब्ल्यूटीओ प्रमुख ने कहा कि हमें भारत एक नेता के रूप में चाहिए। भारत एक अग्रणी देश है और भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसलिए, भारत को अन्य विकासशील देशों के लिए रास्ता खोलने की जरूरत है। उदाहरण के लिए, विकास के लिए निवेश सुविधा पर, हम चाहते हैं कि वह इसका समर्थन करें, क्योंकि बहुत से विकासशील देश इसका समर्थन कर रहे हैं। 126 में से 90 सदस्य देश  इसके साथ आगे बढ़ना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि कृषि के लिए, हमें भारत के मुद्दों को सुनने और उसका समर्थन करने की भी जरूरत है। 

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भारत ने 13वीं बैठक में जताया था इसका विरोध 

चीन के नेतृत्व वाले 128 देशों का समूह विकास के लिए निवेश सुविधा (आईएफडी) प्रस्ताव पर जोर दे रहा है। यह केवल हस्ताक्षरकर्ता सदस्यों के लिए बाध्यकारी होगा। भारत इसके खिलाफ है और उसने अबू धाबी में पिछले 13वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में इस पहल का विरोध किया था। भारत का तर्क है कि ऐसे समझौते 166 सदस्यीय संगठन की बहुपक्षीय प्रकृति को कमजोर कर देंगे।

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अमेरिका भी इस समझौते से बाहर 

आईएफडी को सबसे पहले 2017 में चीन और अन्य देशों द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जो चीनी निवेश पर बहुत अधिक निर्भर हैं, और संप्रभु धन निधि वाले देश उस समझौते के पक्षकार हैं। प्रमुख देशों में, अमेरिका भी समझौते से बाहर है। डब्ल्यूटीओ, देशों के बीच व्यापार के वैश्विक नियमों से संबंधित है। इसका मुख्य कार्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापार यथासंभव सुचारू और स्वतंत्र रूप से प्रवाहित हो।

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