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Budget 2026: क्या बजट में कर्ज पर लगाम लगाकर विकास को नई रफ्तार मिलेगी? ईएसी क्या बोले जानिए

Sat, 10 Jan 2026 05:47 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Sat, 10 Jan 2026 05:47 PM IST
सार

केंद्रीय बजट 2026 में सरकार का जोर राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण और कर्ज की स्थिरता बनाए रखने पर रहने की उम्मीद है। महामारी के बाद राजकोषीय स्थिति में सुधार हुआ है और आगे घाटा 4.4% तक लाने का लक्ष्य है। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को पाने के लिए उच्च निवेश दर और निवेश की बेहतर दक्षता को अहम बताया गया है।

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Will the budget curb debt boost development? Find out what the EAC said
ईएसी-पीएम के अध्यक्ष एस महेंद्र देव - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्रीय बजट 2026 में सरकार का फोकस राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण और कर्ज की स्थिरता बनाए रखने पर रहने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष महेंद्र देव ने शनिवार को यह बात कही। उन्होंने कहा कि बजट विकसित भारत रोडमैप के अनुरूप होगा और राजकोषीय घाटे व कर्ज-से-जीडीपी अनुपात जैसे प्रमुख संकेतकों पर सख्ती से टिके रहने का लक्ष्य रखा जाएगा।

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उन्होंने बताया कि महामारी के बाद भारत ने राजकोषीय समेकन में लगातार प्रगति की है। कोविड काल में जहां राजकोषीय घाटा करीब 9% था, वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में यह घटकर लगभग 4.8% रह गया है। आगे सरकार का लक्ष्य इसे करीब 4.4% तक लाने का है। देव के अनुसार, केंद्र सरकार का कर्ज-जीडीपी अनुपात करीब 56.1% है, जबकि केंद्र और राज्यों का संयुक्त कर्ज लगभग 80% है, जो 2030 तक घटकर करीब 76% हो सकता है।  

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उच्च विकास के लिए निवेश और दक्षता जरूरी

विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए देव ने उच्च और टिकाऊ आर्थिक वृद्धि पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 7-8% की विकास दर बनाए रखने के लिए करीब 35% का निवेश अनुपात जरूरी है, जबकि फिलहाल यह करीब 30% है।

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इसके साथ ही उन्होंने निवेश की दक्षता सुधारने की जरूरत बताई। उनके मुताबिक, पूंजी-उत्पादन अनुपात को मौजूदा 5 से घटाकर 3.5-4 के स्तर पर लाना होगा ताकि पूंजी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कुल कारक उत्पादकता की भूमिका को भी अहम बताया, जिसमें तकनीक और दक्षता से मिलने वाले लाभ शामिल हैं। इससे समग्र आर्थिक दक्षता में सुधार होगा।

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वैश्विक चुनौतियां और आत्मनिर्भरता

वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए देव ने कहा कि भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण विनिर्माण को बढ़ावा देकर भारत निवेशकों के लिए आकर्षक गंतव्य बन सकता है।

सुधार और राज्यों की भूमिका

देव ने बीते एक दशक में हुए सुधारों जैसे जीएसटी, आयकर सुधार, श्रम संहिताएं, बीमा क्षेत्र में एफडीआई का उदारीकरण और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने को निजी निवेश और दक्षता बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित देश बनने की दिशा में राज्यों की भूमिका बेहद अहम है और प्रत्येक राज्य को अपने लक्ष्य और कार्यान्वयन तंत्र तय करने होंगे।

विकास अनुमान सकारात्मक

विकास के मोर्चे पर देव ने कहा कि वैश्विक प्रतिकूलताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। चालू वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान 7.4% है, जबकि अगले वर्ष यह 6.5% से 7% के बीच रह सकती है।



उन्होंने बताया कि पोस्ट-कोविड वर्षों में भारत की औसत विकास दर करीब 7.7% रही है, जो घरेलू आर्थिक मजबूती को दर्शाती है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निवेश से वैश्विक वृद्धि को भी समर्थन मिल रहा है और भारत के लिए अधिकांश कारक अनुकूल बने हुए हैं।

समाज की जटिल चुनौतियों का समाधान तकनीक के माध्यम 


 

पीएम मोदी का दृढ़ विश्वास है कि समाज की जटिल चुनौतियों का समाधान तकनीक के माध्यम से किया जा सकता है। यह बात नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कही। बेरी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अनुसंधान के परिणामों को 'राष्ट्रीय प्राथमिकताओं' और 'जनकल्याण' से जोड़ने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया है, ताकि शोध और नवाचार का सीधा लाभ समाज तक पहुंच सके।

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