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सोने और चांदी के भाव अचानक धड़ाम क्यों?: कैसे 27 जनवरी को ही लिख दी गई गिरावट की पटकथा, समझें पूरी कहानी

Mon, 02 Feb 2026 08:21 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Mon, 02 Feb 2026 08:21 PM IST
सार

Gold Silver Crash Reason: जानिए कैसे डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने सोने और चांदी की कीमतों में भूचाल ला दिया और बाजार क्रैश हो गया। कैसे इस गिरावट की पटकथा घंटों पहले ही लिख दी गई थी।?आइए इस बारे में सबकुछ समझते हैं।

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Why Gold Silver Price Fall Gold Silver Price Rate Today Gold and Silver Market Sone Chandi ka Bhav
चांदी-सोने में गिरावट क्यों? - फोटो : amarujala.com

विस्तार

सर्राफा बाजार में जश्न का माहौल था। सोना और चांदी अपनी रिकॉर्ड स्तरों पर थे और निवेशक इस उम्मीद में थे कि डॉलर का कमजोर होना जारी रहेगा। उन्हें लग रहा था कि सोने-चांदी की कीमतें और बढ़ेंगी, पर बाजार धराशाई हो गया। चांदी एक दिन में ही सवा लाख रुपये टूट गई। सोना भी बुरी तरह फिसल गया। हालांकि, इस गिरावट की असली कहानी डोनाल्ड ट्रंप ने 27 जनवरी को ही लिख दी थी। क्या है पूरा मामला विस्तार से जानेंगे। पहले जानते हैं दिल्ली में सोमवार को सोने और चांदी का भाव क्या रहा।

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सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों का क्या हाल?

अखिल भारतीय सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार सोमवार को भी सोने-चांदी की कीमतों में फिर भारी गिरावट दर्ज की गई। चांदी की कीमतों में लगातार तीसरे दिन बड़ी गिरावट आई और यह 52,000 रुपये टूटकर 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। पिछले तीन सत्रों में चांदी अपने 29 जनवरी के उच्चतम स्तर से लगभग 36 प्रतिशत गिर चुकी है।  वहीं 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत भी 12,800 रुपये गिरकर 1,52,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई है। 

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क्यों धड़ाम हो गया सोने और चांदी का भाव?

आइए अब विस्तार से समझते हैं सर्राफा बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का कारण। विशेषज्ञों के अनुसार, इस भारी बिकवाली के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से दुनिया के अलग-अलग देशों से हो रही टैरिफ पर बातचीत, अमेरिका-ईरान के बीच तनाव में कमी और अमेरिका में फेडरल रिजर्व के अगले अध्यक्ष के रूप में केविन वॉर्श के नाम का आगे आना है। इसके अलावे केंद्रीय बजट 2026-27 में सोने और चांदी के आयात शुल्क में कोई बदलाव न होने से भी बाजार की उम्मीदों को झटका लगा। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की और कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट देखने को मिली।

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डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे लिखी चांदी-सोने में गिरावट की पटकथा?    

30 जनवरी 2026 को सोने और चांदी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसकी पटकथा 29 जनवरी 2026 को इन धातुओं के रिकॉर्ड स्तरों तक पहुंचे के दो दिन पहले ही लिख दी गई थी। 27 जनवरी 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आधिकारिक निवास व्हाइट हाउस से एक ऐसी खबर सामने आई जिसने पूरे बुलियन मार्केट में सनसनी पैदा कर दी। डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसे व्यक्ति को फेडरल रिजर्व का चेयरमैन बनाने का एलान कर दिया, जिसकी पहचान एक पेशेवर की रही है जो डॉलर को मजबूत बनाए रखने के लिए कुछ भी कर गुजरे। डॉलर की मजबूती का मतलब है कीमती धातुओं की कीमतों में नरमी। यही कारण रहा कि सोने और चांदी की कीमतें टूट गईं।

फेड चेयरमैन के रूप में केविन वॉर्श का चेहरा बाजार को क्यों नहीं आ रहा रास?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 27 जनवरी 2026 को अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (अमेरिका के केंद्रीय बैंक) के अगले चेयरमैन के लिए केविन वॉर्श के नाम आगे किया। इससे पहले बाजार को उम्मीद थी कि ट्रंप इस पद के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को चुनेंगे जो 'अल्ट्रा-डव' (नरमपंथी) हो- यानी जो ब्याज दरें तेजी से घटाए और महंगाई को नजरअंदाज करें। लेकिन केविन वॉर्श की छवि ठीक इसके ठीक विपरीत है। वे एक 'पॉलिसी हॉक' (सख्त नीतियों वाले नौकरशाह) माने जाते हैं, जो महंगाई पर लगाम लगाने और डॉलर को मजबूत रखने के पक्षधर हैं। और ऐसा करने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं, ऐसी उनकी छवि पहले से है।

यही वजह है कि जैसे ही ट्रंप ने फेड चेयरमैन के लिए वॉर्श का नाम आगे बढ़ाया बाजार में सनसनी फैल गई। उनका नाम सामने आते ही बाजार की यह गलतफहमी दूर हो गई कि सस्ता कर्ज आसानी से मिलता रहेगा। नतीजा यह हुआ कि 30 जनवरी को चांदी ने इतिहास का सबसे बड़ा गोता लगाया और एक ही दिन में 26% टूट गई। सोने की कीमतों में भी 9% की भारी गिरावट दर्ज की गई। जो सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस और चांदी 120 डॉलर प्रति औंस की ऊंचाई छू रही थी, वो वॉर्श के नाम की चर्चा मात्र से धड़ाम हो गई। हालांकि बाजार में गिरावट की वजह सिर्फ वॉर्श का नाम नहीं था, बल्कि बाजार का ढांचा भी था। निवेशक भारी कर्ज लेकर सट्टेबाजी कर रहे थे। जैसे ही कीमतें गिरनी शुरू हुईं, मार्जिन कॉल्स का सिलसिला शुरू हो गया। इससे सोने, चांदी और प्लेटिनम पर मार्जिन अचानक बढ़ गया, जिसने आग में घी का काम किया। मजबूरन सट्टेबाजों को अपनी पोजीशन काटनी पड़ी, जिससे गिरावट और तेज हो गई।

अब आगे क्या हो सकता है?

भले ही केविन वॉर्श के डर ने अभी बाजार को हिला दिया है, लेकिन दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन  का मानना है कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। फर्म के मुताबिक, सेंट्रल बैंकों की खरीदारी और जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण सोना साल के अंत तक 6,300 डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, चांदी के लिए अब 75-80 डॉलर का स्तर एक मजबूत आधार माना जा रहा है। लेकिन, यह भी तय है इस बीच सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहेगा।

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