खाने पीने का सामान महंगा होने से नवंबर में बढ़ी थोक मूल्य मुद्रास्फीति
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थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के आधिकारिक आंकड़े सोमवार को जारी किए गए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य पर आधारित मुद्रास्फीति नवंबर 2019 में 0.58 फीसदी पर आ गई है। पिछले महीने अक्तूबर में यह 0.16 फीसदी थी। खाने पीने का सामान महंगा होने से इसमें वृद्धि आई है। सितंबर में यह 0.33 फीसदी और अगस्त में 1.17 फीसदी थी। यानी बीते तीन महीने में पहली बार इसमें इजाफा हुआ है। सालाना आधार पर तुलना करें तो पिछले साल नवंबर 2018 में थोक महंगाई दर 4.47 फीसदी थी।
Govt of India: The official Wholesale Price Index for 'All Commodities' (Base: 2011-12=100) for the month of November, 2019 rose by 0.10% to 122.3 (provisional) from 122.2 (provisional) for the previous month. pic.twitter.com/Zfy63A3ERu
— ANI (@ANI) December 16, 2019विज्ञापन
Govt of India: Annual rate of inflation, based on monthly Wholesale Price Index, stood at 0.58% (provisional) for the month of November, 2019 (over November, 2018) as compared to 0.16% (provisional) for the previous month & 4.47% during the corresponding month of the previous yr. pic.twitter.com/VpQoSCTflp
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) December 16, 2019
इस दौरान प्राइमरी आर्टिकल्स की मुद्रास्फीति 7.68 फीसदी पर आ गई, जो पिछले माह 6.4 फीसदी थी। वहीं मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की बात करें, तो इसकी थोक महंगाई दर में बदलाव नहीं हुआ है। पिछले महीने के ही तरह यह -0.84 के स्तर पर है।
नवंबर में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 11 फीसदी रही। अक्तूबर में यह 9.80 फीसदी थी। वहीं गैर-खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में कमी आई है। यह अक्तूबर में 2.35 फीसदी के मुकाबले नवंबर में 1.93 फीसदी रह गई।
खुदरा महंगाई दर तीन साल के उच्चतम स्तर पर
इससे पहले ओद्यौगिक उत्पादन घटने की भी खबर आई थी। खाने पीने की चीजों के दाम चढ़ने से नवंबर माह में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 5.54 फीसदी पर पहुंच गई। यह इसका तीन साल का उच्च स्तर है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति इसी साल अक्तूबर में 4.62 फीसदी और नवंबर, 2018 में 2.33 फीसदी रही थी।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, माह के दौरान खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 10.01 फीसदी पर पहुंच गई। अक्तूबर में यह 7.89 फीसदी तथा एक साल पहले इसी महीने में 2.61 फीसदी थी। इससे पहले जुलाई, 2016 में खुदरा मुद्रास्फीति 6.07 फीसदी दर्ज की गई थी।
औद्योगिक उत्पादन भी घटा
वहीं अक्तूबर में औद्योगिक उत्पादन 3.8 फीसदी गिरा। जबकि एक साल पहले इसी महीने में औद्योगिक उत्पादन 8.4 फीसदी बढ़ा था। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के रूप में मापा जाता है। विनिर्माण क्षेत्र में नरमी दर्ज की गई है। इसमें अक्तूबर महीने में 2.1 फीसदी की गिरावट आई जबकि एक साल पहले इसी महीने में 8.2 फीसदी की वृद्धि हुई थी।
आंकड़े के अनुसार बिजली उत्पादन में अक्तूबर 2019 में तीव्र 12.2 फीसदी की गिरावट आई जबकि पिछले साल इसी महीने इसमें 10.8 फीसदी की वृद्धि हुई थी। खनन उत्पादन भी आलोच्य महीने में 8 फीसदी गिरा जबकि पिछले वित्त वर्ष के इसी महीने में इसमें 7.3 फीसदी की वृद्धि हुई थी।