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Wholesale Price Inflation: अगस्त में थोक मूल्य मुद्रास्फीति 0.52% रही, जुलाई में यह नकारात्मक स्तर पर थी

Mon, 15 Sep 2025 12:11 PM IST
अभिषेक दीक्षित बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 15 Sep 2025 12:11 PM IST
सार

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दो महीने बाद सकारात्मक स्तर पर आ गई। अगस्त में 0.52 प्रतिशत पर दर्ज की गई। जुलाई यह आंकड़ा माइनस में रिकॉर्ड किया गया था।

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Wholesale price inflation below 1 pc in August decrease against July Govt data
थोक महंगाई - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण संकेतकों में से एक थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति अगस्त 2025 में बढ़कर 0.52 प्रतिशत हो गई। यह पिछले चार महीनों में सबसे ऊंचा स्तर है। थोक कीमतों में वृद्धि का मुख्य कारण खाद्य और विनिर्मित वस्तुओं की कीमतों में मामूली इजाफा रहा। दूसरी ओर, ईंधन और बिजली की कीमतों में कमी देखी गई।

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पिछले दो महीनों में थोक महंगाई में गिरावट दिखी थी। इसमें जुलाई में डब्ल्यूपीआई मुद्रास्फीति (-0.58%) और जून में (-0.19%) दर्ज की गई थी। लेकिन अगस्त में यह बढ़कर अप्रैल के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी।, यह उस समय 0.85 प्रतिशत थी। इसके अलावा, पिछले वर्ष अगस्त में यह आंकड़ा 1.25 प्रतिशत था। उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा कि अगस्त में मुद्रास्फीति दर में सुधार मुख्य रूप से खाद्य उत्पाद, विनिर्माण, गैर-धात्विक खनिज उत्पाद, परिवहन उपकरण और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई। 

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खाद्य वस्तुओं में राहत, फिर भी चुनौती बनी रही

अगस्त में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति घटकर 3.06 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 6.29 प्रतिशत थी। विशेष रूप से सब्जियों और दालों की मुद्रास्फीति क्रमशः 28.96% और 15.12% से घटकर 14.18% और 14.85% रह गई। वहीं आलू और प्याज की अपस्फीति बढ़कर क्रमशः 44.11% और 50.46% दर्ज की गई, जबकि जुलाई में ये आंकड़े क्रमशः 41.26% और 44.38% थे।

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बार्कलेज की रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में कम अपस्फीति और उच्च कोर मुद्रास्फीति ने अगस्त में ईंधन क्षेत्र की अधिक अपस्फीति को संतुलित कर दिया। इसके परिणामस्वरूप आने वाले महीनों में WPI मुद्रास्फीति में मामूली वृद्धि की संभावना बनी हुई है।

विनिर्मित उत्पादों की बढ़ती कीमतें

विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति अगस्त में 2.55 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 2.05 प्रतिशत थी। PHDCCI अध्यक्ष हेमंत जैन ने बताया कि वनस्पति व पशु तेल एवं वसा, कपड़ा, रबर और प्लास्टिक उत्पादों ने मुद्रास्फीति में प्रमुख योगदान दिया है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्पादन लागत पर इसका असर कुछ समय बाद दिखाई देगा। जैन ने आगे कहा कि जीएसटी 2.0 जैसे संरचनात्मक सुधारों से थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति पर नियंत्रण की उम्मीद है।

ईंधन और बिजली क्षेत्र में मंदी जारी

आईसीआरए के वरिष्ठ अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने बताया कि ईंधन व बिजली क्षेत्र की अपस्फीति (कीमतों में गिरावट) अगस्त में 3.17 प्रतिशत रही। यह जुलाई में 2.43 प्रतिशत थी। उन्होंने यह भी कहा कि आईसीआरए को उम्मीद है कि सितंबर में WPI मुद्रास्फीति बढ़कर छह महीने का उच्चतम स्तर 0.9 प्रतिशत तक जा सकती है। इसका कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, कमोडिटी की महंगाई और डॉलर/रुपये में गिरावट को बताया गया।

अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि जीएसटी युक्तिकरण के बाद अपेक्षाकृत अनुकूल खुदरा मुद्रास्फीति की स्थिति बनी रहने की संभावना है। वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में सरकार द्वारा किए जाने वाले सुधार और स्थिर जीडीपी वृद्धि के चलते अक्टूबर में होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा में दरें यथास्थिति बनी रहने की उम्मीद जताई जा रही है।

खुदरा मुद्रास्फीति का हाल

आरबीआई, जो खुदरा मुद्रास्फीति पर विशेष ध्यान देता है, ने पिछले महीने बेंचमार्क नीतिगत दरों को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा। वहीं, अगस्त में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई, जिसका मुख्य कारण सब्जियों, मांस, मछली व अंडे जैसी रसोई की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी बताई गई है।

WPI आंकड़ों को समझिए...

  • अगस्त में खाद्य पदार्थों में अपस्फीति 3.06 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में 6.29 प्रतिशत थी। इस दौरान सब्जियों की कीमतों में तेजी देखी गई। अगस्त में सब्जियों में अपस्फीति 14.18 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में 28.96 प्रतिशत थी।

  • निर्मित उत्पादों के मामले में अगस्त में मुद्रास्फीति बढ़कर 2.55 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 2.05 प्रतिशत थी। ईंधन और बिजली क्षेत्र में अगस्त में नकारात्मक मुद्रास्फीति या अपस्फीति 3.17 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 2.43 प्रतिशत थी।

खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) खुदरा मुद्रास्फीति को ध्यान में रखता है। उसने पिछले महीने बेंचमार्क नीतिगत दरों को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा था। नवंबर 2024 से नौ महीनों तक गिरावट के बाद खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई थी, जो सब्जियों, मांस, मछली और अंडे जैसी रसोई की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों से यह पता चला था।

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