सितंबर में बढ़कर 1.32 फीसदी पर पहुंची थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति
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सरकार ने सितंबर माह के थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) के आंकड़े जारी कर दिए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति सितंबर में बढ़कर 1.32 फीसदी हुई, जो अगस्त में 0.16 फीसदी थी। वहीं जुलाई में यह आंकड़ा नकारात्मक 0.58 फीसदी था और जून में यह नकारात्मक 1.81 फीसदी था। सितंबर 2019 में देश की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति (WPI) 0.33 फीसदी थी।
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खाद्य वस्तुओं की महंगाई 8.17 फीसदी रही, जबकि अगस्त में यह 3.84 फीसदी थी। समीक्षाधीन अवधि में अनाज की कीमतों में गिरावट आई, जबकि दालें महंगी हुईं। इस दौरान सब्जियों के महंगा होने की दर 36.54 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। आलू की कीमत एक साल पहले के मुकाबले 107.63 फीसदी अधिक थी, हालांकि प्याज की कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिली।
Wholesale Price Index (WPI) inflation, rises to 1.32% for September 2020 as compared to 0.16% in August 2020: Government of India pic.twitter.com/lQtTNiWZ0p
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) October 14, 2020
भारत में महंगाई दर बाजारों में सामान्य तौर पर कुछ समय के लिए वस्तुओं के दामों में उतार-चढ़ाव महंगाई को दर्शाती है। जब किसी देश में वस्तुओं या सेवाओं की कीमतें अधिक हो जाती हैं, तो इसको महंगाई कहते हैं। उत्पादों की कीमत बढ़ने से परचेजिंग पावर प्रति यूनिट कम हो जाती है। थोक मूल्य सूचकांक के आधार पर ही वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के फैसले लिए जाते हैं।