फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Wheat prices increased due to ban on exports sharp jump in wheat prices in the international market China supported India

चीन ने दिया भारत का साथ: निर्यात पर रोक से बढ़े गेहूं के दाम, अंतरराष्ट्रीय बाजार में आया गेहूं की कीमतों में तेज उछाल

Mon, 16 May 2022 08:36 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 16 May 2022 08:36 PM IST
सार

भारत के प्रतिबंध के बाद करीब 18 लाख टन गेहूं भारतीय बंदरगाहों पर अटका है। ऐसे में इस गेहूं को तुलनात्मक कमजोर घरेलू बाजार में बेचने से विक्रेताओं को नुकसान होगा।

विज्ञापन
Wheat prices increased due to ban on exports sharp jump in wheat prices in the international market China supported India
गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गेहूं निर्यात पर भारत की रोक के बाद सोमवार को दुनिया भर में गेहूं के दाम में आए उछाल के बीच जी 7 देशों ने भारत की आलोचना शुरू कर दी। भारत के इस फैसले से अमेरिका, कनाडा, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया में संकट गहरा गया है। शिकागो में सोमवार को गेहूं 6 फीसदी महंगा हुआ। पश्चिमी देशों ने भारत के इस फैसले की आलोचना करते हुए उसे इस महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि चीन ने इस फैसले पर भारत का पक्ष लेते हुए कहा, विकासशील देशों पर इल्जाम लगाने से वैश्विक खाद्य संकट का हल नहीं निकाला जा सकता।

विज्ञापन


भारत में भीषण गर्मी और लू के कहर के कारण गेहूं का उत्पादन घट गया है। ऐसे में घरेलू बाजार में गेहूं के दाम बढ़ते देख केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया था। हालांकि कुछ दिन पहले तक सरकार ने 1 करोड़ टन गेहूं निर्यात का लक्ष्य रखा था, जो यूक्रेन संकट के कारण घटी आपूर्ति की भरपाई के लिए पर्याप्त था। लेकिन घरेलू बाजार में महंगाई को देखते हुए सरकार ने निर्यात नीति में बदलाव का फैसला किया। यूक्रेन युद्ध के कारण पहले से संकट झेल रहे यूरोपीय देशों के लिए गेहूं के बढ़ते दाम संकट पैदा कर रहे हैं।
विज्ञापन


चीन की दो टूक, विकासशील देशों पर दोष मढ़ना बंद करें
चीन सरकार के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा, भारत जैसे विकासशील देशों पर दोष मढ़ने से खाद्य संकट का समाधान नहीं होगा। विकसित देश (जी7 के सदस्य) ऐसा करना बंद करें। जिस तरह जी 7 देशों के कृषिमंत्री भारत से गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध हटाने की अपील कर रहे हैं, वे अपने निर्यात में वृद्धि करके खाद्य बाजार की आपूर्ति को स्थिर क्यों नहीं कर लेते? 
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा, हालांकि भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक है, लेकिन यह वैश्विक गेहूं निर्यात का केवल एक छोटा सा हिस्सा है। इसके विपरीत, कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाएं, जिनमें अमेरिका, कनाडा, यूरोपीय संघ और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, गेहूं के प्रमुख निर्यातकों में से हैं। यदि कुछ पश्चिमी देश संभावित वैश्विक खाद्य संकट के मद्देनजर गेहूं का निर्यात घटाते हैं तो वे भारत की आलोचना करने की स्थिति में नहीं रहेंगे। चीन ने कहा, भारत पर इस वक्त अपनी जनता को गेहूं आपूर्ति करने का दबाव है। ऐसे में उसका फैसला गलत नहीं है। 


18 लाख टन गेहूं भारतीय बंदरगाहों पर अटका
भारत के प्रतिबंध के बाद करीब 18 लाख टन गेहूं भारतीय बंदरगाहों पर अटका है। ऐसे में इस गेहूं को तुलनात्मक कमजोर घरेलू बाजार में बेचने से विक्रेताओं को नुकसान होगा। अधिकारियों ने कहा, खाद्य सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए लेटर ऑफ क्रेडिट और सरकारी सौदों के जरिये मौजूदा निर्यात बिक्री की अनुमति दी जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed