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स्टेनलेस स्टील की पाइपलाइन से होगी जलापूर्ति, लोगों को मिलेगी कई गंभीर बीमारियों से छुटकारा

शिशिर चौरसिया, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Aug 2018 11:00 AM IST
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water supply to be done through stainless pipes, people not to face health problems
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केंद्र सरकार डायरिया, हैजा, टाइफाइड और वायरल हेपेटाइटिस जैसे जल जनित रोगों से होने वाली मौतों की बड़ी संख्या के मद्देनजर अब स्टेनलेस स्टील (एसएस) की पाइपलाइन बिछाने की योजना बना रही है। इससे एक ओर जहां पेयजल की बर्बादी और चोरी पर लगाम लगेगी, वहीं यह दूषित भी नहीं होगा। 
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केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने पिछले दिनों कई मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें इस समस्या पर चर्चा हुई। इस दौरान, अधिकारियों ने बताया कि पहले परंपरागत रूप से गैल्वेनाइज्ड स्टील की पाइपलाइन बिछाई जाती थी, जिसमें 10 से 20 साल में जंग लगने के बाद वह गल जाती है। इसके बाद सीवर या नाली का पानी पेय जल के साथ मिलकर घरों तक पहुंचने लगता है।  

इसके विकल्प के रूप में अब प्लास्टिक की पाइपलाइन बिछाई जा रही है, जिसमें जंग लगने का खतरा नहीं है। लेकिन इसके साथ दिक्कत यह है कि यह बेहद नाजुक होती है। अगर पाइपलाइन के ऊपर से भारी ट्रक गुजर जाए, तो यह क्षतिग्रस्त हो जाती है। साथ ही, पाइपलाइन में ज्यादा प्रेशर से पानी आने पर भी यह क्षतिग्रस्त हो जाती है। इसके अलावा, झुग्गी-झोपड़ी वाले इसमें जगह-जगह छेद कर पानी निकालते हैं, जिससे पाइप में दूषित जल चला जाता है।

अगर स्टेनलेस स्टील की पाइपलाइन बिछाई जाए, तो इसमें कम से कम 50 साल तक जंग लगने का खतरा नहीं है। इसके साथ ही इसमें आसानी से छेद भी नहीं किया जा सकता। इस मुद्दे पर कई मंत्रालयों के अधिकारी अगले सप्ताह फिर विचार-विमर्श करने वाले हैं।

स्टेनलेस स्टील पाइपलाइन बढ़िया विकल्प 

जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड के एमडी अभ्युदय जिंदल का कहना है कि पेयजल को दूषित होने से बचाने के लिए स्टेनलेस स्टील की पाइप सबसे बेहतर है, क्योंकि इसमें कोई भी रोगाणु नहीं पनपते। इसके अलावा, इसमें जंग भी नहीं लगता। बेहतर गुणवत्ता वाले पाइप का उपयोग किया जाए तो इसमें 50 साल तक कुछ नहीं होता। 
  
पिछले साल 10 हजार से अधिक मौतें 

अधिकारी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से बताया कि वर्ष 2017 में 6.91 करोड़ लोग जल जनित बीमारियों का शिकार हुए, जिनमें 10,738 लोगों की मौत हो गई। ये उन मरीजों के आंकड़े हैं, जो अस्पताल पहुंच सके। देश में वैसे मरीजों की भी काफी संख्या है, जो इस तरह की बीमारियों से ग्रसित होने के बाद अस्पताल तक पहुंच नहीं पाते और जान गंवा देते हैं। विकसित देशों में स्टेनलेस स्टील की ही पाइपलाइन बिछाई जा रही है।
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