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Russian Oil: भारत पर रूस तेल खरीद के कारण बढ़ रहा अमेरिकी दबाव, GTRI ने भारत की रणनीति के बारे में क्या कहा?

Mon, 05 Jan 2026 02:26 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Mon, 05 Jan 2026 02:26 PM IST
सार

अमेरिका के दबाव के बीच रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत असमंजस में है। जीटीआरआई के मुताबिक, नीति में स्पष्टता न होने से भारत पर टैरिफ और व्यापारिक लागत का खतरा बढ़ रहा है। रिपोर्ट कहती है कि भारत को या तो रूसी तेल आयात पूरी तरह रोकना चाहिए या गैर-प्रतिबंधित स्रोतों से खरीद का फैसला खुलकर स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि अनिर्णय अब महंगा साबित हो सकता है।

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US pressure on India is increasing due to purchase of Russian oil, what does GTRI say about India's strategy?
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर अमेरिका के दबाव के बीच भारत एक अहम नीतिगत मोड़ पर खड़ा है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगर भारत ने अपने रुख में स्पष्टता नहीं लाई तो उसे अधिक व्यापारिक लागत और कड़े टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।

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रिपोर्ट के अनुसार, 4 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर नई दिल्ली रूसी कच्चे तेल की खरीद नहीं रोकती है तो वॉशिंगटन भारतीय आयात पर टैरिफ बढ़ा सकता है। पहले से ही अमेरिका में भारतीय निर्यात पर 50% आयात शुल्क लागू है, जिसमें से आधा सीधे तौर पर भारत की रूसी तेल खरीद से जुड़ा बताया गया है।
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युद्धविराम न होने पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने की संभावना 

अमेरिकी कांग्रेस में भी दबाव तेज हो रहा है। सीनेटर लिंडसे ग्राहम ऐसे कानून को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसके तहत यूक्रेन में 50 दिनों के भीतर युद्धविराम न होने पर रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर सेकेंडरी टैरिफ लगाए जा सकते हैं।


बता दें कि अक्तूबर में अमेरिका ने रूसी ऊर्जा कंपनी रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद भारत की प्रमुख रिफाइनरियों, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और कई सरकारी कंपनियां शामिल हैं। इन्होंने सेकेंडरी प्रतिबंधों से बचने के लिए रूसी तेल की खरीद रोकने की घोषणा की। हालांकि, गैर-प्रतिबंधित आपूर्तिकर्ताओं से सीमित मात्रा में आयात जारी है, जिसे GTRI ने भारत को 'रणनीतिक ग्रे जोन' में रखने वाला कदम बताया है।

जीटीआरआई ने भारत को दिए क्या सुझाव?

GTRI का कहना है कि यह अस्पष्टता भारत की स्थिति को कमजोर कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर भारत रूसी तेल आयात बंद करना चाहता है तो उसे साफ और निर्णायक ढंग से करना चाहिए। और अगर गैर-प्रतिबंधित स्रोतों से खरीद जारी रखनी है, तो इसे खुले तौर पर कहकर आंकड़ों के साथ समर्थन देना होगा। मौजूदा अनिर्णय अब टिकाऊ नहीं है।

रिपोर्ट ने यह भी आगाह किया कि रूसी तेल आयात खत्म करने से अमेरिकी दबाव अपने आप खत्म नहीं होगा। इसके बजाय व्यापारिक मांगें कृषि, डेयरी, डिजिटल व्यापार और डेटा गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में शिफ्ट हो सकती हैं। साथ ही, मौजूदा टैरिफ दबाव वॉशिंगटन के एक खास राजनीतिक दौर से जुड़ा है, जो स्थायी नहीं भी रह सकता।

मई से नवबंर 2025 के बीच अमेरिका को भारत का निर्यात 20.7% घटा

जीटीआरआई के मुताबिक, यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया ने अमेरिका के साथ तनाव कम करने के लिए रूसी तेल आयात घटाया, जबकि रूस का सबसे बड़ा खरीदार चीन अपने रणनीतिक वजन के कारण अपेक्षाकृत कम दबाव में रहा। इस बीच, मई से नवंबर 2025 के बीच अमेरिका को भारत का निर्यात 20.7% घट चुका है। रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगर टैरिफ और बढ़े तो यह गिरावट और गहरी हो सकती है।

जीटीआरआई ने कहा कि जैसे-जैसे टैरिफ का खतरा सख्त होता जा रहा है, भारत को रूसी तेल पर साफ फैसला लेना होगा, उस फैसले की जिम्मेदारी लेनी होगी और उसे वॉशिंगटन तक बिना किसी अस्पष्टता के पहुंचाना होगा।


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