Tariffs: पूर्व राजनयिक ने कहा- ट्रंप का रास्ता तर्कहीन, फैसले एकतरफा; उद्योग जगत बोला- अर्थव्यवस्था पर असर कम
Trump Tariffs On India: भारत पर टैरिफ को लेकर अमेरिका जैसी सख्ती दिखा रहा है, इसे लेकर देश-दुनिया के तमाम अर्थशास्त्रियों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप के टैरिफ ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया तनाव जरूर पैदा किया है, लेकिन भारत के विशेषज्ञों और संस्थानों का मानना है कि भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखनी चाहिए।
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पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने क्या कहा?
पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुणायत ने ट्रंप के फैसले को अतार्किक और व्यक्तिगत नाराजगी से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा 'ट्रंप एक बार फिर बिना वजह सजा देने के रास्ते पर चल पड़े हैं। 6 जुलाई को भारत-अमेरिका के बीच वार्ता लगभग पूरी हो चुकी थी, लेकिन खुद ट्रंप ने उसे रोककर अपनी टीम को फिर से बातचीत शुरू करने को कहा।'
#WATCH | Delhi: On US President Trump imposing an additional 25% tariff on India over Russian oil purchases, former diplomat, Anil Trigunayat says, "I think he is continuing on this irrational path. This is driven by a certain kind of personal antagonism, more than any… pic.twitter.com/xLV0Gy255O
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) August 7, 2025
इसके साथ ही उन्होंने सवाल उठाया, 'अगर अमेरिका कहता है कि भारत को रूस से तेल नहीं खरीदना चाहिए, तो क्या वह वैसा ही सस्ता तेल दे सकता है? भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को पहले रखना ही होगा।' अनिल त्रिगुणायत ने यह भी कहा कि, 'लगता है कि पश्चिमी देश भारत की स्वतंत्र आर्थिक ताकत से खुश नहीं हैं और उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिलेगी।'
#WATCH | Delhi: On US President Trump imposing an additional 25% tariff on India over Russian oil purchases, Former diplomat, Anil Trigunayat says, "If you say that India should not buy oil from Russia, can you provide oil at the same price as Russia is doing to us? Should we not… pic.twitter.com/wbMiIPrRS4
— ANI (@ANI) August 7, 2025
PHDCCI के CEO डॉ. रणजीत मेहता का विश्लेषण
डॉ. रणजीत मेहता, जो भारत के प्रमुख वाणिज्य मंडल PHDCCI के CEO हैं, उन्होंने कहा कि टैरिफ से नुकसान तो है, लेकिन वो बहुत सीमित है। उन्होंने कहा, 'हमने एक रिपोर्ट में इसका अध्ययन किया है। भारत का अमेरिका को 2024-25 में कुल निर्यात करीब 88 अरब डॉलर है। इस 25% अतिरिक्त टैरिफ से लगभग 1.87% (यानि 8.11 अरब डॉलर) का असर पड़ेगा।'
#WATCH | Dr. Ranjeet Mehta, CEO & Secretary General, PHDCCI says, "The US has imposed an additional 25% tariff on India. We are definitely concerned about it and quite disappointed. However, its impact on the overall Indian economy is very negligible. Today, PHDCCI has released a… pic.twitter.com/6tSRhkoGyr
— ANI (@ANI) August 7, 2025
उन्होंने आगे बताया, 'अगर हम भारत की पूरी अर्थव्यवस्था पर असर देखें, तो यह सिर्फ 0.19% से 0.38% के बीच है। हमारी अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत है कि ऐसे बाहरी झटकों को झेल सकती है।'
वहीं इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मनोरंजन शर्मा ने कहा, 'ट्रंप के इस कदम से औषधि, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण जैसे क्षेत्रों को झटका लगेगा।' लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि 'भारत एक घरेलू खपत पर आधारित अर्थव्यवस्था है। जैसे हमने 2008 का आर्थिक संकट और कोविड-19 की महामारी को झेला, वैसे ही इस झटके को भी झेल लेंगे।'
#WATCH | Delhi: Dr Manoranjan Sharma, Chief Economist, Infomerics Ratings, says, "This evening, President Donald Trump has imposed additional tariffs on India to the extent of 25%, taking the total tariff level to 50%. This will severely hit sectors such as drugs and… pic.twitter.com/7sXeBCrs7v
— ANI (@ANI) August 7, 2025
माइकल कुगेलमैन, जो वॉशिंगटन डीसी में मौजूद विल्सन सेंटर के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के निदेशक हैं, उन्होंने कहा, 'भारत-अमेरिका के रिश्ते बीते 20 वर्षों में जिस तेजी से बढ़े हैं, यह संकट शायद अब तक का सबसे बड़ा है।' उनके मुताबिक, 'राष्ट्रपति ट्रंप शुरू से ही इस टैरिफ को लगाने के पक्ष में थे और यह आश्चर्य की बात नहीं है।'
यह भी पढ़ें - US: 'भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी में अब तक सबसे बड़ा संकट', ट्रंप के 25% अतिरिक्त टैरिफ पर विशेषज्ञ
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि 'भारत-अमेरिका का रिश्ता कई स्तरों पर बना हुआ है - रणनीतिक, व्यापारिक, शिक्षा, तकनीक और रक्षा। इसलिए इस झटके को यह रिश्ता झेल सकता है।'