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Health Budget 2026: 'कैंसर दवाएं सस्ती, 3 नए आयुर्वेद संस्थान खुलेंगे', बजट में हेल्थ सेक्टर को बड़ी सौगात

Sun, 01 Feb 2026 02:51 PM IST
नवीन पारमुवाल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवीन पारमुवाल Updated Sun, 01 Feb 2026 02:51 PM IST
सार

Health Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026 का स्वास्थ्य बजट पेश किया। इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 1,04,599 करोड़ रुपये रखे गए हैं, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज सस्ता होगा और नए मेडिकल संस्थान खुलेंगे।

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Union Budget 2026 India nirmala sitharaman big announcement for health sector highlights and announcements in
स्वास्थ्य बजट के बड़े एलान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Health Budget 2026 Big Announcement: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए देश का बजट पेश कर दिया है। यह उनका लगातार 9वां बजट है। इस बार सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया है। विकसित भारत के लक्ष्य को सामने रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं के लिए ₹1,06,530.42 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट रखा गया है। सरकार ने स्वास्थ्य को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बताया है। इस बजट में कई बड़े एलान किए गए हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। आइए जानते हैं कि बजट 2026 में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए क्या खास है...
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कैंसर मरीजों के लिए बड़ी राहत

बजट में आम आदमी को बड़ी राहत देते हुए कई दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाने का एलान किया गया है। कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 दवाओं पर से बेसिक कस्टम ड्यूटी पूरी तरह हटा दी गई है। इस फैसले से कैंसर मरीजों के लिए महंगी दवाएं सस्ती हो जाएंगी। इसके अलावा, 7 अन्य दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं और स्पेशल मेडिकल फूड के निजी आयात पर भी ड्यूटी में छूट दी गई है।
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मेडिकल टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा
देश में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पांच क्षेत्रीय मेडिकल हब बनाए जाएंगे। इन हब को बनाने में निजी क्षेत्र की भी भागीदारी होगी। इन हेल्थकेयर कॉम्प्लेक्स में आयुष केंद्र, जांच केंद्र और इलाज के बाद की देखभाल के लिए सेंटर भी होंगे। इससे डॉक्टरों समेत कई स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

दवा उत्पादन का हब बनेगा भारत
सरकार ने भारत को बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने के लिए 'बायोफार्मा शक्ति' योजना का एलान किया है। इस योजना पर अगले 5 वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत 3 नए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) बनाए जाएंगे और 7 पुराने संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। इसका मकसद कैंसर और डायबिटीज जैसी बीमारियों की जैविक दवाओं का देश में उत्पादन बढ़ाना है। सरकार भारत को इस क्षेत्र में एक ग्लोबल हब बनाना चाहती है। 

युवाओं के लिए हेल्थकेयर में नए अवसर
सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में युवाओं को कुशल बनाने और रोजगार के नए रास्ते खोलने की योजना बनाई है। अगले 5 वर्षों में 1 लाख अलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स (AHP) को ट्रेनिंग दी जाएगी। वहीं, मौजूदा सहायक स्वास्थ्य संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। साथ ही सरकारी और निजी क्षेत्र में नए संस्थान भी खोले जाएंगे। इसमें ऑप्टोमेट्री, रेडियोलोजी और एनेस्थीसिया जैसे 10 विषयों को शामिल किया जाएगा। 

देखभाल के लिए बनेंगे खास इकोसिस्टम
बजट में बुजुर्गों की देखभाल और इससे जुड़ी सेवाओं के लिए एक मजबूत केयर इकोसिस्टम बनाने का एलान किया गया है। इसके तहत देखभाल करने वाले 1.5 लाख केयरगिवर को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें वेलनेस, योग और मेडिकल उपकरणों को चलाने जैसे कई कौशल सिखाए जाएंगे।



3 नए आयुर्वेद संस्थान की घोषणा
सरकार ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी बढ़ावा देने का फैसला किया है। देश में 3 नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान खोले जाएंगे। इसके अलावा, आयुष फार्मेसी और दवा जांच प्रयोगशालाओं को भी अपग्रेड किया जाएगा ताकि दवाओं की गुणवत्ता बेहतर हो सके। योग और आयुर्वेद को दुनिया भर में पहचान दिलाने के लिए काम किया जाएगा। जामनगर में स्थित WHO के ग्लोबल सेंटर को और मजबूत किया जाएगा, जिससे आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात भी बढ़ेगा।

मानसिक स्वास्थ्य पर जोर
उत्तर भारत में एक नया राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (NIMHANS-2) खोला जाएगा। डिजिटल प्रोफेशनल्स और कंटेंट क्रिएटर्स की मानसिक सेहत पर भी खास ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रामा केयर की क्षमता 50% बढ़ाई जाएगी।

हेल्थ बजट में किसको क्या मिला?

जन आरोग्य योजना को 9,500 करोड़ रुपये: बजट में सरकार की बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं के लिए भी आवंटन बढ़ाया गया है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के लिए 9,500 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इसका लक्ष्य योजना का दायरा बढ़ाना और अस्पतालों के नेटवर्क को मजबूत करना है। वहीं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को 39,390 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के लिए 4,770 करोड़ रुपये: प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। इसके लिए 4,770 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है, जो पिछले साल से काफी ज्यादा है। इस राशि से क्रिटिकल केयर ब्लॉक, पब्लिक हेल्थ लैब और जिला अस्पतालों जैसी जरूरी सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी।

स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए 11,307 करोड़ रुपये: बजट में मेडिकल शिक्षा और बड़े अस्पतालों पर भी ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के लिए 11,307 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है। इस पैसे से नए एम्स बनाने और सरकारी मेडिकल कॉलेजों को अपग्रेड करने का काम किया जाएगा। इससे सुपर-स्पेशियलिटी सेवाओं को भी मजबूती मिलेगी।

बीमारियों की रोकथाम और डिजिटल हेल्थ: बीमारियों की रोकथाम के लिए भी बजट में खास प्रावधान हैं। राष्ट्रीय एड्स और एसटीडी नियंत्रण कार्यक्रम का बजट बढ़ाया गया है। इसके अलावा, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के लिए भी आवंटन बढ़ा है। इसका मकसद डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाओं को बेहतर बनाना है।


देश में कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की बढ़ती मांग को देखते हुए भी एक अहम घोषणा हुई है। सरकार अगले तीन वर्षों में 980 करोड़ रुपये खर्च करके स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों की शिक्षा का विस्तार करेगी। इसका एक बड़ा मकसद बुजुर्गों की देखभाल के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित लोग तैयार करना है।

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इस साल बजट में बढ़ोतरी
वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के लिए ₹1,06,530.42 करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की। यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के लिए 4,821.21 करोड़ रुपये शामिल हैं, साल 2014-15 के स्वास्थ्य बजट की तुलना में यह कुल मिलाकर 194 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी है।

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