{"_id":"6368cd6574e0c82042122a9f","slug":"uniform-gst-rate-the-chairman-of-pm-s-economic-advisory-council-wants-only-one-gst-rate-gave-a-big-statement","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uniform GST: जीएसटी में सिर्फ एक दर चाहते हैं पीएम मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन, जताई यह आशंका","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
Uniform GST: जीएसटी में सिर्फ एक दर चाहते हैं पीएम मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन, जताई यह आशंका
Mon, 07 Nov 2022 02:54 PM IST
विवेक दास
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विवेक दास
Updated Mon, 07 Nov 2022 02:54 PM IST
सार
Uniform GST Rate in India: देबरॉय ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि केंद्र और राज्यों का कर संग्रह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र 15 प्रतिशत है, जबकि सार्वजनिक ढांचे पर सरकार के खर्च की मांग कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी पर यह मेरी राय है। कर की सिर्फ एक दर होनी चाहिए।
विज्ञापन
Bibek Debroy
- फोटो : indian express
विस्तार
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने जीएसटी पर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में सिर्फ एक दर होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि कराधान प्रणाली छूट रहित होनी चाहिए। हालांकि, इस दौरान देबरॉय ने यह भी स्पष्ट किया है कि उनकी इस राय को ईएसी-पीएम का सुझाव नहीं माना जाना जाहिए।
विज्ञापन
देबरॉय ने सोमवार को एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि केंद्र और राज्यों का कर संग्रह सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का मात्र 15 प्रतिशत है, जबकि सार्वजनिक ढांचे पर सरकार के खर्च की मांग कहीं ज्यादा है। उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी पर यह मेरी राय है। कर की सिर्फ एक दर होनी चाहिए। हालांकि, मुझे नहीं लगता कि ऐसा कभी हो पाएगा।’’ उन्होंने कहा कि यदि ‘अभिजात्य प्रकृति’ और अधिक उपभोग वाले उत्पादों पर अलग-अलग कर दरें हटा दी जाएं, तो इससे मुकदमेबाजी घटेगी।
विज्ञापन
देबरॉय ने कहा, ‘‘हमें यह समझने की जरूरत है कि उत्पाद कोई भी हो जीएसटी दर एक होनी चाहिए। यदि हम प्रगतिशीलता दिखाना चाहते हैं तो यह प्रत्यक्ष करों के जरिये होनी चाहिए, जीएसटी या अप्रत्यक्ष करों के जरिये नहीं।’’
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि उनके इस विचार को ईएसी-पीएम का सुझाव नहीं माना जाए। देबरॉय ने कहा कि जीएसटी को लागू करने से पहले आर्थिक मामलों के विभाग ने 17 प्रतिशत के जीएसटी राजस्व निरपेक्ष दर (आरएनआर) का अनुमान दिया था, लेकिन आज औसत जीएसटी 11.5 प्रतिशत है। ईएसी-पीएम के चेयरमैन ने कहा, ‘‘या तो हम कर देने के लिए तैयार रहें या सार्वजनिक वस्तुओं और सेवाओं की कम आपूर्ति के लिए। सरकार की ओर से कर छूट या रियायत दी जाती है वह जीडीपी के 5-5.5 प्रतिशत के बराबर है।"
उन्होंने कहा कि कर चोरी गैरकानूनी है, लेकिन मुक्तता या छूट के प्रावधान के जरिये कर से बचाव कानूनी रूप से सही है। देबरॉय ने सवाल किया कि क्या हमें इस तरह के छूट की जरूरत है। जितना हम करों में छूट देंगे यह उतना जटिल बनेगा। ‘‘हमारा ऐसा सुगम कर ढांचा क्यों नहीं हो सकता, जिसमें किसी तरह का जटिल प्रावधान नहीं हो।’’ देबरॉय ने सुझाव दिया कि कॉरपोरेट कर और व्यक्तिगत आयकर के बीच ‘कृत्रिम अंतर’ को समाप्त किया जाना चाहिए। इससे प्रशासनिक अनुपालन का बोझ घटेगा।