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कोरोना काल में 2009 के वित्तीय संकट से चार गुना ज्यादा लोग हुए बेरोजगार, मजदूरों को अरबों की आय की हानि
Tue, 26 Jan 2021 02:53 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Tue, 26 Jan 2021 02:53 PM IST
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कोरोना काल में 2009 के वित्तीय संकट से चार गुना ज्यादा लोग हुए बेरोजगार
- फोटो : pixabay
कोरोना वायरस महामारी के चलते पिछले साल दुनिया में नौकरियों का नुकसान 2009 के वैश्विक वित्तीय संकट में हुए नुकसान का चार गुना रहा। यह आकलन संयुक्त राष्ट्र के एक संगठन द्वारा जारी एक रिपोर्ट का है। पिछले साल इस संकट में कुल मिला कर 22 करोड़ से अधिक पूर्ण नौकरियों और श्रमिकों को 37 अरब डॉलर की आय का नुकसान हुआ।
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दुनिया में 8.8 फीसदी कार्य अवधि की क्षति हुई
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) का अनुमान है कि कोविड-19 की रोकथाम के लिए कंपनियों और सार्वजनिक जीवन पर लागू पाबंदियों से दुनिया में 8.8 फीसदी कार्य अवधि की क्षति हुई। इसे अगर दिहाड़ी के हिसाब से देखें तो कुल 22.5 करोड़ पूर्ण नौकरी का नुकसान कहा जा सकता है। यह 2009 के वैश्विक बैंकिंग सकट के समय गई नौकरियों के चार गुना के बराबर है।
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संकट से अभूतपूर्व बेरोजगारी
आईएलओ के महानिदेशक गुय राइडर ने कहा कि 'यह कोरोना वायरस संकट 1930 के दशक की महामंदी के बाद का सबसे बड़ा संकट है। इसका असर 2009 के वैश्विक वित्तीय संकट से कहीं बहुत गहरा है।' उन्होंने कहा कि इस बार के संकट में काम के घंटों में कमी और अभूतपूर्व बेरोजगारी दोनों ही देखी गई। संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस संकट में रेस्तरां, बार, दुकान, होटल ओर अन्य सेवाओं में रोजगार की भारी हानि हुई है।
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दुनिया में मजदूरों को 3700 अरब डॉलर की आय की हानि
काम के अवसर छिनने से दुनिया में कर्मचारियों और मजदूरों को 3700 अरब डॉलर की आय की हानि हुई। आईएलओ महानिदेशक ने इसे 'असाधारण रूप से बड़ा' नुकसान बताया। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान महिलाओं और युवा वर्ग के लोगों को हुआ। आईएलओ को उम्मीद है कि इस वर्ष के उत्तरार्ध में रोजगार के अवसर फिर बढ़ने लगेंगे। लेकिन यह कोरोना संक्रमण की आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा।