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कोरोना का दुनियाभर में गंभीर आर्थिक परिणाम, इतनी रह सकती है भारत की वृद्धि दर: संयुक्त राष्ट्र
Thu, 09 Apr 2020 03:05 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Thu, 09 Apr 2020 03:05 PM IST
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अर्थव्यवस्था
- फोटो : PTI
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि कोरोना वायरस महामारी के दुनियाभर में गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे। साथ ही रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष के दौरान भारत की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है।
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सबसे अधिक प्रभावित हुए ये क्षेत्र
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ‘एशिया और प्रशांत का आर्थिक और सामाजिक सर्वेक्षण (ईएससीएपी) 2020: संवहनीय अर्थव्यवस्थाओं की ओर’ में कहा गया है कि क्षेत्र में कोरोना वायरस का दूरगामी आर्थिक और सामाजिक परिणाम हुआ है और सीमापार व्यापार, पर्यटन और वित्तीय संबंध सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
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2021-22 में इतनी रह सकती है वृद्धि दर
रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान भारत की वृद्धि दर घटकर 4.8 फीसदी रहने का अनुमान है और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए वृद्धि दर 5.1 फीसदी रह सकती है।
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एशिया व प्रशांत की अर्थव्यवस्थाओं पर नकारात्मक असर
इसके अतिरिक्त रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ये बेहद प्रारंभिक पूर्वानुमान हैं और 10 मार्च तक उपलब्ध आंकड़ों और सूचनाओं पर आधारित हैं। चूंकि कोविड-19 महामारी अभी भी तेजी से बढ़ रही है, इसलिए एशिया और प्रशांत की अर्थव्यवस्थाओं पर इसका नकारात्मक असर बहुत अधिक होने की आशंका है।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत की आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में पहले की तुलना में काफी कमी आई है और बेरोजगारी बढ़ने से भी उपभोक्ता भावनाएं प्रभावित हुई हैं। भारत को निर्यात के साथ ही कृषि गतिविधियों संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।