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क्रेडिट सुइस-यूबीएस के विलय से भारत में 14 हजार नौकरियों पर संकट, आईटी कंपनियों के 20 लाख करोड़ के कारोबार पर
Tue, 21 Mar 2023 01:41 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 21 Mar 2023 01:41 PM IST
सार
Banking Crisis: यूबीएस और क्रेडिट स्विस दोनों के प्रौद्योगिकी केंद्रों में तीन भारतीय शहरों में लगभग 7,000-7000 लोग हैं। विलय के बाद कंपनी में मानव संसाधन की भूमिका को तर्कसंगत बनाने से इन क्षेत्रों में कई नौकरियों के घटने की आशंका है। माना जा रहा है कि यूबीएस-क्रेडिट सुइस की ओर से केवल सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को बनाए रखने की कोशिश होगी।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अमेरिका और यूरोप में बैंकिंग संकट के बीच क्रेडिट सुइस के यूबीएस ग्रुप एजी में विलय के बाद भारत में 14,000 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है। यूबीएस और क्रेडिट सुइस दोनों वित्तीय संस्थानों के भारत में 7,000-7,000 कर्मचारी हैं। इस विलय के बाद यूबीएस ने 2027 तक अपनी लागत में 8 अरब डॉलर की कटौती का लक्ष्य रखा है। इसका सबसे ज्यादा असर भारत में नौकरियों पर पड़ेगा।
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यूबीएस और सीएस दोनों के प्रौद्योगिकी केंद्रों में तीन भारतीय शहरों में लगभग 7,000-7000 लोग हैं। विलय के बाद कंपनी में मानव संसाधन की भूमिका को तर्कसंगत बनाने से इन क्षेत्रों में कई नौकरियों के घटने की आशंका है। माना जा रहा है कि यूबीएस-क्रेडिट स्विस की ओर से केवल सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को बनाए रखने की कोशिश होगी। भारत में दोनों बैंकों के परिचालन की जानकारी रखने वाले एक बैंकर ने कहा, "उन्हें शायद इतने लोगों की आवश्यकता नहीं होगी। इसलिए छंटनी हो सकती है।" उन्होंने कहा, 'बैंकिंग क्षेत्र में यूबीएस भारत में पहले से ही बहुत कम था। इसलिए बड़ा सवाल यह है कि क्या यह क्रेडिट स्विस संचालन को जारी रखना चाहता है या अपनी पूंजी के अनुरुप उन्हें कम करेगा।'
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नौकरियों पर संकट के अलावा मौजूदा बैंकिंग संकट ने भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों (आईटी) के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। दरअसल, देश की आईटी कंपनियों को मौजूदा संकट में फंसे विदेशी बैंकों से बहुत बड़े स्तर पर कारोबार मिलता है। ये बैंक मौजूदा टेक बजट में कटौती के साथ आगे के सौदों को भी बंद कर सकते हैं। इससे भारत के 245 अरब डॉलर (20 लाख करोड़ रुपये) के आईटी बिजनेस प्रॉसेस मैनेजमेंट (आईटी-बीपीएम) उद्योग का भविष्य भी खतरे में है। नैसकॉम के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023 में आईटी उद्योग का 41 फीसदी राजस्व बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस सेक्टर (बीएफएसआई) से आया था। इसमें उत्तरी अमेरिका की हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक रही है।
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विप्रो, टीसीएस, इन्फोसिस होंगी सर्वाधिक प्रभावित
बैंकिंग संकट गहराता है तो सबसे ज्यादा असर टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, एलएंडटी माइंडट्री जैसी कंपनियों पर पड़ सकता है। वजह यह है कि इनका अमेरिका के वित्तीय संस्थानों से ज्यादा कारोबार आता है। दुनियाभर में खुदरा बैंकिंग में टेक्नोलॉजी में निवेश के मामले में उत्तरी अमेरिका के बैंक सबसे आगे हैं। 2022 में इन बैंकों का आईटी बजट 82 अरब डॉलर था। बैंकों के टेक बजट पर खर्च से भारतीय आईटी कंपनियों को काफी फायदा हुआ था।
मार्च तिमाही के नतीजों पर दिखेगा असर
टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और माइंडट्री का अपने बैंकिंग वर्टिकल के जरिये उत्तरी अमेरिका के क्षेत्रीय बैंकों में एक्सपोजर है। बैंकिंग संकट के कारण निकट भविष्य में उनकी बीएफएसआई वृद्धि पर असर पड़ेगा। अनिश्चितता के माहौल से नई परियोजनाओं पर असर पड़ेगा। इससे लागत का दबाव बढ़ेगा। मौजूदा करार के लिए भी नए सिरे से मोलभाव हो सकता है। इससे लाखों नौकरियों पर असर पड़ सकता है। ये कंपनियां जब मार्च तिमाही के नतीजों की घोषणा करेंगी तो उन्हें निवेशकों के मुश्किल सवालों का सामना करना पड़ेगा।