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Aviation: भारतीय एयरलाइन कंपनियों को 38,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड घाटे का अनुमान, क्या और महंगे होंगे टिकट?

Fri, 26 Jun 2026 08:12 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: कुमार विवेक Updated Fri, 26 Jun 2026 08:12 PM IST
सार

इक्रा (ICRA) ने भारतीय एयरलाइंस के लिए चालू वित्त वर्ष में 38,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड घाटे का अनुमान जताया है। महंगे ईंधन और कमजोर रुपये से एविएशन सेक्टर पर पड़ रहे इस भारी प्रभाव को समझने के लिए पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

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Turbulence Ahead: Indian Airlines Face Record Loss of Rs 38,000 Crore in FY27, Fares Expected to Remain High
भारत का विमानन क्षेत्र - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारत का विमानन क्षेत्र इन दिनों भारी आर्थिक दबाव और अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। रेटिंग एजेंसी इक्रा (आईसीआरए) ने चालू वित्त वर्ष (FY2027) के लिए घरेलू एयरलाइंस के शुद्ध घाटे का अनुमान बढ़ाकर 36,000 से 38,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर कर दिया है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी, महंगे जेट ईंधन (एटीएफ) और पश्चिम एशियाई संकट ने इस उद्योग की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एविएशन सेक्टर इतने भारी घाटे में क्यों जा रहा है और इसका भविष्य पर क्या असर होगा।

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एयरलाइंस के घाटे में इतनी बड़ी बढ़ोतरी की वजह क्या है?
आईसीआरए के अनुसार, पहले यह अनुमान था कि बेहतर यात्री यातायात के दम पर FY2027 में एयरलाइंस का घाटा सिमटकर 11,000-12,000 करोड़ रुपये रह जाएगा, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। इतने बड़े घाटे के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

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  • रुपये में गिरावट: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के कमजोर होने से एयरलाइंस को भारी विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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  • लीज रेंटल का बढ़ता बोझ: एयरलाइंस को नए विमानों की डिलीवरी लगातार मिल रही है, जिससे उनके पट्टे (लीज) का किराया भी काफी बढ़ गया है।
  • लागत और किराये का असंतुलन: कंपनियों की परिचालन लागत तेजी से बढ़ी है, लेकिन वे पूरी तरह से इस भारी भरकम खर्च का बोझ किराए में बढ़ोतरी के जरिए यात्रियों पर नहीं डाल सकतीं। इससे पहले, पिछले वित्त वर्ष में भी भारतीय एविएशन इंडस्ट्री का कुल घाटा अनुमानित 17,000-18,000 करोड़ रुपये से कहीं अधिक 32,000-34,000 करोड़ रुपये रहा था।

पश्चिम एशियाई संकट से हवाई यातायात पर क्या असर पड़ा?
फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए पश्चिम एशियाई संकट ने एविएशन सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इस विवाद के चलते कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं, जिसका सीधा असर एयरलाइंस की लागत और किरायों पर पड़ा है। किराए बढ़ने और बढ़ती महंगाई के कारण लोगों ने गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की है, जिससे हवाई सफर करने वालों की संख्या पर भी नकारात्मक असर दिख रहा है।

यात्री यातायात (पैसेंजर ट्रैफिक) को लेकर क्या है नया अनुमान? 
हवाई सफर करने वालों की घटती संख्या को देखते हुए रेटिंग एजेंसी ने अपने ट्रैफिक ग्रोथ अनुमानों में बड़ी कटौती की है:

  • घरेलू ट्रैफिक: चालू वित्त वर्ष में घरेलू यात्रियों की वृद्धि दर का अनुमान 6-8 प्रतिशत से घटाकर 3-6 प्रतिशत कर दिया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक: पश्चिम एशियाई विवाद के कारण अप्रैल 2026 में भारतीय एयरलाइंस के अंतरराष्ट्रीय यात्री यातायात में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते चालू वित्त वर्ष के लिए इसके ग्रोथ अनुमान को भी 8-10 प्रतिशत से घटाकर मात्र 0-3 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, मई 2026 में 'फेवरेबल बेस' के कारण घरेलू ट्रैफिक में 11.3% की बढ़ोतरी हुई और यह 1.56 करोड़ रहा। पिछले साल इसी महीने में पहलगाम हमले और भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष के कारण यात्रा मांग बुरी तरह प्रभावित हुई थी। वहीं, मई 2026 में घरेलू विमानन उद्योग का पैसेंजर लोड फैक्टर 88.8 प्रतिशत रहा, जो पिछले साल के इसी महीने में 83.9 प्रतिशत था।

क्या विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें भी बढ़ा रही हैं मुसीबत?
विमान के संचालन में सबसे बड़ा खर्च जेट फ्यूल (एटीएफ) का होता है। 1 जून, 2026 को घोषित एटीएफ कीमतों में मासिक आधार पर कोई बदलाव नहीं हुआ, लेकिन सालाना आधार पर यह 26.9 प्रतिशत अधिक रही हैं। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भी विमान ईंधन की कीमतें पिछले साल के मुकाबले 22.8 प्रतिशत ज्यादा हैं।

भारतीय एविएशन सेक्टर इस वक्त बढ़ती लागत और घटती मांग के दोहरे दबाव में है। एक तरफ ईंधन और लीज की कीमतें आसमान छू रही हैं, तो दूसरी तरफ भू-राजनीतिक तनाव अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों की राह में रोड़ा बन रहे हैं। एयरलाइंस के लिए इस ऐतिहासिक घाटे से उबरना एक बड़ी चुनौती है, जिसके चलते आने वाले समय में यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद कम है।

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